बारिश बनी किसानों की दुश्मन: हरियाणा-पंजाब की मंडियों में भीगा धान, खरीद व्यवस्था और जल निकासी पर उठे सवाल

बारिश बनी किसानों की दुश्मन: हरियाणा-पंजाब की मंडियों में भीगा धान, खरीद व्यवस्था और जल निकासी पर उठे सवाल

हरियाणा और पंजाब में हुई बारिश ने धान किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गोहाना, अंबाला, करनाल और फाजिल्का की मंडियों में खुले में रखा धान भीग गया, जिससे किसानों और आढ़तियों को भारी नुकसान का खतरा पैदा हो गया है. किसानों ने जल निकासी, खरीद व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठाते हुए मुआवजे की मांग की है.

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क‍िसान तक
  • चंडीगढ़,
  • Oct 12, 2026,
  • Updated Oct 12, 2026, 1:33 PM IST

हरियाणा और पंजाब में हुई बारिश धान किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है. कई मंडियों में खुले में रखा धान बारिश के पानी में भीग गया, जबकि जलभराव की स्थिति ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है. किसानों का आरोप है कि मंडियों में पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है.

गोहाना मंडी में भीगा धान, किसानों में नाराजगी

सोनीपत जिले के गोहाना स्थित नई अनाज मंडी में देर रात हुई बारिश से खुले में रखी धान की ढेरियां भीग गईं. किसानों का कहना है कि उन्होंने महीनों की मेहनत से फसल तैयार की, लेकिन मंडी में पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण फसल को नुकसान उठाना पड़ रहा है.

किसानों और आढ़तियों ने आरोप लगाया कि मंडी में बरसाती पानी की निकासी की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है, लेकिन इसके समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए. बारिश के बाद मंडी परिसर में जलभराव होने से धान के खराब होने की आशंका बढ़ गई है.

खरीद में देरी से बढ़ी परेशानी

किसानों ने धान खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि सरकारी खरीद शुरू होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन पीआर धान की खरीद अभी तक पूरी तरह शुरू नहीं हुई है. ऐसे में किसान एक ओर खरीद का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बारिश उनकी फसल को नुकसान पहुंचा रही है.

अंबाला में जलभराव, मंडी बोर्ड ने दिया भरोसा

अंबाला की अनाज मंडी में भी बारिश के कारण जलभराव की स्थिति पैदा हो गई और कई स्थानों पर धान की बोरियां पानी से प्रभावित हुईं. मंडी बोर्ड के सहायक सचिव जसबीर ने बताया कि मंडी में अब तक 4.14 लाख क्विंटल से अधिक धान की आवक हो चुकी है, जिसमें से लगभग 3.44 लाख क्विंटल की खरीद की जा चुकी है और करीब 74 प्रतिशत स्टॉक का उठान भी हो चुका है.

उन्होंने कहा कि जलभराव से निपटने के लिए कर्मचारियों को तैनात किया गया है और नालियों की सफाई कर पानी निकासी सुनिश्चित की जा रही है. साथ ही भीगे हुए स्टॉक को सुखाने की व्यवस्था भी की जाएगी ताकि किसानों को किसी प्रकार का नुकसान न हो.

करनाल में कृषि मंत्री बोले, सरकार किसानों के साथ

करनाल में अचानक हुई तेज बारिश के कारण खुले में पड़ी धान की फसल भीग गई. इससे किसानों को फसल बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

राज्य के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि मौसम प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता, लेकिन सरकार किसानों के साथ खड़ी है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों को मंडियों का दौरा कर किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए कहा गया है.

फाजिल्का में मंडी बनी तालाब, धान पानी में बहा

पंजाब के सीमावर्ती जिले फाजिल्का की अनाज मंडी में भी बारिश ने भारी तबाही मचाई. लगातार बारिश के कारण मंडी में दो से तीन फीट तक पानी भर गया और खुले में रखी धान की फसल पानी में डूब गई. कई जगहों पर धान के दाने पानी में बहते दिखाई दिए.

किसानों का कहना है कि कुछ फसल की सरकारी खरीद हो चुकी थी, लेकिन तौल और उठान नहीं होने के कारण वह भी बारिश की चपेट में आ गई. किसानों, मजदूरों और आढ़तियों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए प्रभावित लोगों को मुआवजा देने और तत्काल पानी निकासी की मांग की है.

हरियाणा और पंजाब की मंडियों में बारिश से हुए नुकसान ने धान खरीद व्यवस्था, जल निकासी और फसल प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. किसान अब नुकसान के आकलन, मुआवजे और तेजी से खरीद और उठान प्रक्रिया शुरू किए जाने की मांग कर रहे हैं.

एशिया की सबसे बड़ी मंडी में भी परेशानी

एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडियों में शामिल खन्ना मंडी में खुले आसमान के नीचे रखी धान की बोरियां और किसानों की फसल बारिश में भीग गई. किसानों का आरोप है कि मंडी में फसल को बारिश से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, जिससे उनकी मेहनत से तैयार फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है. किसानों के मुताबिक, बारिश के दौरान फसल को बचाने के लिए कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. ऐसे में किसानों ने खुद ही तिरपाल की व्यवस्था करके धान को ढकने की कोशिश की, लेकिन लगातार और तेज बारिश के कारण फसल को पूरी तरह बचाना मुश्किल हो गया.(पवन राठी, कमलदीप, सुरेंदर सिंह, सुरिंदर गोयल और गुरदीप सिंह का इनपुट)

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