Urea Crisis: यूरिया की किल्लत पर सरकार के चिंतन शिविर, किल्लत और कालाबाजारी रोकने का मास्टर प्लान तैयार

Urea Crisis: यूरिया की किल्लत पर सरकार के चिंतन शिविर, किल्लत और कालाबाजारी रोकने का मास्टर प्लान तैयार

यूरिया खाद की किल्लत और कालाबाजारी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने हाल ही में एक 'चिंतन शिविर' आयोजित किया, जिसमें इस संकट को दूर करने का एक ठोस मास्टर प्लान तैयार किया गया है. इस शिविर में यह रणनीति बनाई गई कि खाद के स्टॉक की डिजिटल निगरानी की जाएगी ताकि हर जिले में आपूर्ति पारदर्शी रहे और अवैध भंडारण पर तुरंत नकेल कसी जा सके.

Urea CrisisUrea Crisis
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Jan 05, 2026,
  • Updated Jan 05, 2026, 6:55 PM IST

देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हमारे कृषि और किसान हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से किसानों के सामने खाद, विशेषकर यूरिया की भारी किल्लत एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है. इस साल देश के कई राज्यों से ऐसी तस्वीरें आईं, जहां किसान कड़ाके की धूप और ठंड में यूरिया की एक बोरी के लिए लंबी लाइनों में खड़े दिखे. कई जगह समय पर खाद न मिलने के कारण फसलों के खराब होने का डर पैदा हो गया, जिसने किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान किया. खाद की कालाबाजारी और सप्लाई चेन में देरी ने इस संकट को और गहरा कर दिया. इसी पीड़ा को समझते हुए और उर्वरक संकट को जड़ से खत्म करने के लिए भारत सरकार के उर्वरक विभाग ने नई दिल्ली के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में एक विशेष 'चिंतन शिविर' का आयोजन किया.

सरकार के नीतियो के केंद्र में हमेशा किसान

चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य किसानों को केंद्र में रखकर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना था. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय उर्वरक और रसायन मंत्री, जे.पी. नड्डा ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की हर नीति का आधार किसान ही हैं. उन्होंने कहा कि तमाम अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव और विकट परिस्थितियों के बावजूद, उर्वरक विभाग ने यह सुनिश्चित किया कि किसानों की जरूरतों को समय पर पूरा किया जाए. इसी का परिणाम है कि इस वर्ष भारत खाद के आयात के साथ-साथ घरेलू उत्पादन बढ़ा रहा है. सरकार कहना है — नीतियों को इतना सरल और प्रभावी बनाना कि किसानों का जीवन आसान हो सके और उन्हें खाद के लिए भटकना न पड़े.

यूरिया की कालाबाजारी पर वार के लिए रोड मैप

यूरिया की कमी और दुरुपयोग को रोकने के लिए शिविर में कई आधुनिक समाधानों पर चर्चा की गई. इसमें सबसे अहम, खाद की सप्लाई की 'डिजिटल मॉनिटरिंग' करने पर जोर दिया गया ताकि बिचौलिए स्टॉक जमा न कर सकें और इसकी कालाबाजारी करना रोक सके. साथ ही खाद सीधे जरूरतमंद किसान तक पहुंचे. केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि खाद का खेती के अलावा अन्य कामों में दुरुपयोग रोकना एक बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने के लिए सरकार के विभिन्न विभाग अब मिलकर काम करेंगे. साथ ही, बंद पड़े खाद कारखानों को पूरी क्षमता से चलाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं. 

चिंतन शिविर में सरकार ने बनाई रणनीति

इस कार्यक्रम में राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने प्रधानमंत्री के उस विजन को साझा किया, जिसमें भारत को दुनिया के लिए 'खाद्य भंडार' (Food Hub) बनाने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने कहा कि इस चिंतन शिविर से निकले विचार भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे. उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्र ने बताया कि पहली बार सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र पीएसयू और निजी क्षेत्र ने मिलकर एक मंच पर मंथन किया है. शिविर में 15 अलग-अलग समूह बनाए गए थे, जिन्होंने उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता, सब्सिडी की नई व्यवस्था और डिजिटल इकोसिस्टम जैसे अहम पर विस्तार से चर्चा की और अपने कारगर सुझाव सरकार के सामने रखे.

इन सुझावों से क्या बदलेगी खेती की सूरत?

चिंतन शिविर का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि आने वाले समय में खाद की कमी की वजह से देश के अन्नदाता को दोबारा सड़कों पर न उतरना पड़े. 15 विभिन्न समूहों द्वारा दिए गए सुझावों, जैसे 'पोषण आधारित सब्सिडी' और 'सीधा किसान संवाद', को अगर जमीन पर सही ढंग से लागू किया गया, तो यूरिया संकट बीते कल की बात हो जाएगी. सरकार का यह प्रयास न केवल मिट्टी की उर्वरता बचाएगा, बल्कि किसानों की लागत कम करके उनकी आय बढ़ाने में भी मदद करेगा. जब किसान बिना किसी बाधा के अपनी खेती पर ध्यान दे पाएंगे, तभी भारत सही मायने में खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बन पाएगा. यह चिंतन शिविर केवल एक बैठक नहीं, बल्कि भारतीय कृषि को नई दिशा देने वाला एक 'महामंथन' है.

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