Bhu Neer Portal के बारे में कितना जानते हैं आप, जानें किसान कैसे उठा सकते हैं फायदा

Bhu Neer Portal के बारे में कितना जानते हैं आप, जानें किसान कैसे उठा सकते हैं फायदा

पोर्टल को जल शक्ति मंत्रालय की तरफ से केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) के तहत शुरू किया गया है. भू-नीर पोर्टल, भारत में भूजल यानी जमीन के नीचे पानी निकालने यानी कि बोरिंग के लिए परमिट की अप्‍लीकेशन की प्रक्रिया को सरल और कारगर बनाने के लिए तैयार किया है. पोर्टल एक अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे उपयोगकर्ता के लिए सुविधाओं और पारदर्शिता के साथ ही साथ स्थिरता को ध्‍यान में रखते हुए तैयार किया गया है.

क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 08, 2026,
  • Updated Jan 08, 2026, 4:45 PM IST

अक्‍सर पर्यावरण विशेषज्ञों की तरफ से इस बात को लेकर चिंता जताई गई है कि भूजल का स्‍तर का गिरता जा रहा है. भारत जैसे देश में जहां अर्थव्‍यवस्‍था कृषि पर ही निर्भर है, भूजल का गिरना गंभीर स्थिति की तरफ इशारा कर सकता है. सरकार की तरफ इस चिंता को दूर करने और किसानों को सुविधा देने के मकसद से साल 2024 में भू-नीर नाम से एक पोर्टल की शुरुआत की गई है. सरकार की इस पहल को किसानों के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस पोर्टल की खास बातें कौन सी हैं. 

क्‍या है पोर्टल का मकसद 

पोर्टल को जल शक्ति मंत्रालय की तरफ से केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) के तहत शुरू किया गया है. भू-नीर पोर्टल, भारत में भूजल यानी जमीन के नीचे पानी निकालने यानी कि बोरिंग के लिए परमिट की अप्‍लीकेशन की प्रक्रिया को सरल और कारगर बनाने के लिए तैयार किया है. पोर्टल एक अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे उपयोगकर्ता के लिए सुविधाओं और पारदर्शिता के साथ ही साथ स्थिरता को ध्‍यान में रखते हुए तैयार किया गया है. कहा जा रहा है कि यह पोर्टल भारत के बहुमूल्य भूजल संसाधनों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.  

भू-नीर पोर्टल भारत में भूजल निकासी को रेगुलेट यानी विनियमित और प्रबंधित करने के लिए तैयार किया गया सेंट्रलाइज्‍ड डिजिटल प्लेटफॉर्म है. पोर्टल  व्यवसायों, उद्योगों और भूजल निकासी परमिट (अनापत्ति प्रमाण पत्र या एनओसी) के लिए आवेदन करने के इच्छुक आम व्यक्तियों या फिर किसानों के लिए वन-स्टॉप सॉल्‍यूशन के तौर पर काम कर रहा है. पोर्टल का मकसद पानी के स्थायी उपयोग को बढ़ावा देना तो है ही साथ ही साथ यह सुनिश्चित करना भी कि भूजल संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा सके. 

कौन-कौन कर सकता है अप्‍लाई 

भू-नीर पोर्टल पर जो लोग अप्लाई कर सकते हैं उनमें: 

  • कृषि क्षेत्र के तहत आने वाले किसान या दूसरे ऐसे व्यवसाय जो सिंचाई और बाकी गतिविधियों के लिए भूजल पर ही निर्भर हैं. 
  • इंडस्‍ट्रीयल यूनिट्स जिनमें कारखाने, मैन्युफैक्‍चरिंग प्‍लांट्स और बाकी ऐसी फैसिलिटीज जिन्हें भूजल की जरूरत पड़ती है. 
  • व्यवसाय, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होटल और अन्य वाणिज्यिक उपक्रम जिन्हें भूजल निकालने की जरूरत होती है. 
  • कंस्‍ट्रक्‍शन प्रोजेक्‍ट्स, इनफ्रास्‍ट्रक्चर परियोजनाएं और सरकारी पहल जिन्हें कई मकसदों के भूजल की जरूरत होती है. 
  • यूनिवर्सिटीज, रिसर्च सेंटर और ऐसे शैक्षणिक संस्थान जिन्हें अपने रोजमर्रा की जरूरत के लिए बोरिंग या फिर भूजल की जरूरत है.  
  • कोई भी यूनिट या व्यक्ति जिसे वैध और विनियमित उपयोग के लिए भूजल की जरूरत हो, इस पर अप्लाई कर सकता है. 

क्‍या हैं पोर्टल की मुख्य विशेषताएं 

पैन-बेस्‍ड सिंगल आईडी सिस्‍टम: यूजर सिंगल पैन आईडी की मदद से पोर्टल पर रजिस्‍ट्रेशन कर सकते हैं. इससे आवेदन प्रक्रिया सरल हो जाती है और कई परियोजनाओं में परमिट आसान हो जाता है. 
क्यूआर कोड लैस एनओसी: पोर्टल आसान वैरीफिकेशन और पारदर्शिता के लिए एक क्यूआर कोड के साथ नो-ऑब्‍जेक्‍शन सर्टिफिकेट (एनओसी) तैयार करता है. 
आसान डेटा एक्सेस: पोर्टल पर राज्य और राष्‍ट्रीय, दोनों ही स्तरों पर भूजल कानूनों, विनियमों और संधारणीय प्रथाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद हैं जो मददगार साबित हो सकती हैं. 

आसान इंटरफेस: भू-नीर पोर्टल का इंटरफेस बहुत ही आसान है और इस वजह से यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर नेविगेट करना भी सरल हो जाता है. 
साथ ही वो रियल टाइम के आधार पर  अपने आवेदनों की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं. 
ऑनलाइन पेमेंट सिस्‍टम: पोर्टल उपयोगकर्ताओं को नए और रिन्‍यू दोनों तरह की अप्‍लीकेशन लिए इंटीग्रेटेड ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के जरिये डायरेक्‍ट पेमेंट की सुविधा प्रदान कराता है. 
आसान आवेदन प्रक्रिया: चाहे नए परमिट के लिए आवेदन करना हो या फिर मौजूदा परमिट को रिन्‍यू कराना हो,  नवीनीकरण कर रहे हों, पोर्टल पर आसान स्‍टेप-बाई-स्‍टेप प्रक्रिया के बारे में हर जानकारी दी गई है. 

क्‍या हैं इसके फायदे 

एनओसी पर क्यूआर कोड शामिल करने से, उपयोगकर्ता आसानी से दस्तावेजों को वैरीफाई कर सकते हैं.  पोर्टल की वजह से कागजी कार्रवाई की वजह से होने वाली गैर-जरूरी देरी को टाला जा सकता है. इससे  भूजल परमिट और रिन्‍यू करने का काम भी तेज हो जाता है. 
भूजल की मात्रा को विनियमित करके, पोर्टल स्थायी जल उपयोग प्रथाओं को बढ़ावा देता है. इससे लंबे समय के लिए संसाधनों को संरक्षित किया जा सकता है.  भू-नीर पोर्टल सरकार की व्यवसाय करने में आसानी पहल के साथ है. इससे व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए भूजल नियमों का पालन करना आसान हो सकेगा. 

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