
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में फिजी के कृषि एवं जलमार्ग मंत्री टोमासी टुनाबुना के साथ द्विपक्षीय बैठक की. इस बैठक का मकसद भारत और फिजी के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को और अधिक मजबूत बनाना रहा. बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत और फिजी के बीच ऐतिहासिक और भरोसेमंद संबंध रहे हैं. ये रिश्ते आपसी सम्मान, सहयोग, सांस्कृतिक जुड़ाव और मजबूत जन-जन के संपर्क पर आधारित हैं. उन्होंने बताया कि दोनों देश कृषि और खाद्य सुरक्षा को द्विपक्षीय सहयोग के सबसे अहम स्तंभ के रूप में देखते हैं.
बैठक में दोनों मंत्रियों ने माना कि कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका और आम लोगों की खाद्य जरूरतों से सीधे तौर पर जुड़ा क्षेत्र है. इसी वजह से भारत और फिजी के बीच कृषि और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करने की जरूरत और भी बढ़ जाती है.
बैठक में यह फैसला लिया गया कि भारत और फिजी के बीच कृषि सहयोग से जुड़ा मौजूदा मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाया जाएगा. इसके साथ ही सहयोग को व्यावहारिक रूप देने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह यानी जॉइंट वर्किंग ग्रुप के गठन पर भी सहमति बनी.
भविष्य के सहयोग के तहत छात्रों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई. दोनों देशों ने माना कि इससे युवा कृषि पेशेवरों और किसानों को आधुनिक तकनीकों और नए अनुभवों से जुड़ने का मौका मिलेगा.
बैठक में छोटे स्तर की कृषि मशीनरी, आधुनिक खेती से जुड़ी तकनीक और डिजिटल कृषि टूल्स साझा करने पर भी सहमति बनी. स्मार्ट फार्मिंग, डेटा आधारित खेती और तकनीकी नवाचारों को अपनाने से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया गया.
दोनों पक्षों ने कृषि अनुसंधान ढांचे को मजबूत करने, फसलों और बीजों से जुड़े आनुवंशिक आदान-प्रदान और खाद्य नुकसान और अपव्यय को कम करने के उपायों पर भी विचार किया. इन क्षेत्रों में सहयोग से किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी.
इस बैठक में फिजी की ओर से कृषि एवं जलमार्ग मंत्री टोमासी टुनाबुना के साथ बहु-जातीय मामलों और चीनी उद्योग मंत्री चरण जीत सिंह, भारत में फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी, चीनी मंत्रालय के स्थायी सचिव डॉ. विनेश कुमार, फिजी शुगर कॉरपोरेशन के चेयरमैन नित्या रेड्डी और उच्चायोग के काउंसलर पाउलो डॉरेवा शामिल रहे. भारत की ओर से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव एम.एल. जाट सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.