
हरियाणा सरकार ने राज्य में पानी की उपलब्धता बढ़ाने, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और भूजल स्तर सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी-C (SFC-C) की बैठक में ‘वॉटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. विश्व बैंक ने इस कार्यक्रम के लिए 5,714.80 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. सरकार का लक्ष्य अगले छह वर्षों में राज्य के जल संसाधनों को बेहतर बनाना और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है.
अधिकारियों के मुताबिक, ‘वॉटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ के तहत वर्ष 2026 से 2032 तक चरणबद्ध तरीके से काम किए जाएंगे. इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 5,714.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसमें 4,000 करोड़ रुपये विश्व बैंक से लोन के रूप में मिलेंगे, जबकि 1,714.80 करोड़ रुपये राज्य सरकार अपने बजट से खर्च करेगी. प्रोजेक्ट के तहत पूरे हरियाणा में 15 क्लस्टर विकसित किए जाएंगे. इन क्लस्टरों के जरिए करीब 48.94 लाख एकड़ क्षेत्र में जल प्रबंधन और सिंचाई से जुड़े काम किए जाएंगे.
हरियाणा के किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम नहरों और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने का है. प्रोजेक्ट के तहत विश्व बैंक की मदद से 104 नहरों का पुनर्निर्माण और सुधार किया जाएगा. इस काम पर करीब 2,484.87 करोड़ रुपये खर्च होंगे. सरकार का कहना है कि नहरों के पुनर्निर्माण से पानी के रिसाव को कम करने, सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और किसानों तक पानी की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी.
गांवों और खेतों तक नहर का पानी पहुंचाने वाले 620 जलमार्गों का भी पुनर्निर्माण किया जाएगा. यह काम माइक्रो इरिगेशन एंड कमांड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MICADA) के माध्यम से होगा. इससे करीब 3.18 लाख एकड़ जमीन को सिंचाई की सुविधा मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा नहर आधारित माइक्रो-इरिगेशन प्रोजेक्ट भी शुरू किए जाएंगे, जिनसे करीब 56,830 एकड़ जमीन को फायदा होगा.
हरियाणा के कई इलाकों में जलभराव खेती के लिए बड़ी समस्या है. लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से जमीन की उत्पादकता प्रभावित होती है. सरकार के इस प्रोग्राम के तहत करीब 2 लाख एकड़ जलभराव वाली जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इससे ऐसी जमीन का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और किसानों को खेती के लिए अतिरिक्त क्षेत्र उपलब्ध हो सकता है.
पानी बचाने के लिए सरकार खेती के तरीकों में बदलाव पर भी जोर दे रही है. प्रोजेक्ट के तहत करीब 5 लाख एकड़ क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) को बढ़ावा देने की योजना है. DSR में धान की रोपाई के बजाय सीधे खेत में बीज बोया जाता है, जिससे पारंपरिक तरीके की तुलना में पानी की बचत हो सकती है. इसके अलावा करीब 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा. इसका मकसद किसानों को ऐसी फसलों की ओर बढ़ाना है, जिनमें पानी की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है.
भूजल को रिचार्ज करने के लिए राज्य के भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा जिलों में करीब 131 नए जल स्रोत बनाए जाएंगे. इससे बारिश और दूसरे स्रोतों से मिलने वाले पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने और भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह प्रोग्राम हरियाणा के जल प्रबंधन में बड़ा बदलाव ला सकता है. सरकार का लक्ष्य राज्य के नहर नेटवर्क को आधुनिक बनाना, पानी की उपलब्धता बढ़ाना, भूजल रिचार्ज को मजबूत करना और खेती में पानी की खपत कम करना है. अगर योजना तय समय के अनुसार लागू होती है, तो इसका सीधा फायदा किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा के रूप में मिल सकता है. साथ ही जलभराव वाली जमीन को खेती योग्य बनाने, भूजल स्तर सुधारने और पानी के दोबारा इस्तेमाल से हरियाणा में लंबे समय के लिए जल संरक्षण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.