2 मीट्रिक टन जीआई-टैग मखाना दुबई रवाना, कृषि निर्यात में बिहार की बड़ी छलांग

2 मीट्रिक टन जीआई-टैग मखाना दुबई रवाना, कृषि निर्यात में बिहार की बड़ी छलांग

बिहार ने मखाना के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. दरअसल, पहली बार मिथिला मखाना को समुद्री रास्ते से दुबई के लिए सफलतापूर्वक निर्यात किया गया है.

जीआई-टैग मखाना दुबई रवानाजीआई-टैग मखाना दुबई रवाना
क‍िसान तक
  • Patna,
  • Jan 22, 2026,
  • Updated Jan 22, 2026, 4:55 PM IST

बिहार ने कृषि निर्यात के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. पहली बार GI-टैग प्राप्त मिथिला मखाना को समुद्री रास्ते से दुबई के लिए सफलतापूर्वक निर्यात किया गया है. दरअसल,  2 मीट्रिक टन की यह खेप बुधवार को पूर्णिया जिले से रवाना हुई. यह निर्यात वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, बिहार सरकार और कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से संभव हुआ.

बिहार अब अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी मानकों में सक्षम

मिथिला मखाना बिहार के मिथिला क्षेत्र का पारंपरिक, पोषक और विशिष्ट कृषि उत्पाद है, जिसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल चुका है. समुद्री रास्ते से इसका सफल निर्यात इस बात का प्रमाण है कि बिहार अब अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी मानकों, आधुनिक पैकेजिंग, ट्रेसेब्लिटी और लॉजिस्टिक्स आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हो चुका है.

वर्चुअल फ्लैग-ऑफ समारोह का हुआ आयोजन

इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव की अध्यक्षता में एक वर्चुअल फ्लैग-ऑफ समारोह का आयोजन किया गया. समारोह को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि जीआई-टैग उत्पादों का निर्यात किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य की वैश्विक पहचान को भी सशक्त करेगा. उन्होंने कहा कि इस पहल से मखाना मूल्य श्रृंखला से जुड़े किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और कृषि उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसर मिलेंगे. साथ ही भविष्य में बिहार से अन्य जीआई-टैग और अच्छी कमाई वाली कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा.

किसानों की आय और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

कृषि मंत्री ने इसे किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच स्थापित होने से मखाना उत्पादक किसानों को उनके उत्पाद का उचित और लाभकारी मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. (रोहित कुमार सिंह की रिपोर्ट)

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