
रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने की प्रक्रिया के बीच किसान महापंचायत ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) के सामने किसानों से जुड़े कई प्रमुख मुद्दे उठाए हैं. संगठन ने आयोग को पत्र लिखकर MSP की कानूनी गारंटी, दलहन-तिलहन खरीद में ढील और सुधार, नुकसान झेल चुके किसानों को राहत और खरीद ढांचे में बदलाव की मांग रखी. किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि सिर्फ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करना काफी नहीं है, जब तक किसानों को उस मूल्य पर खरीद की गारंटी न मिले. संगठन ने आयोग से खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाने की दिशा में दोबारा अनुशंसा करने का आग्रह किया.
किसान संगठन ने ज्ञापन में कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग पहले भी तीन बार इस तरह की सिफारिश कर चुका है. साथ ही केंद्र सरकार द्वारा 12 जुलाई 2022 को गठित समिति के उपसमूह की 21 अप्रैल 2023 की सिफारिशों का उल्लेख करते हुए MSP को आरक्षित मूल्य घोषित करने, खरीद और नीलामी प्रक्रिया MSP से शुरू करने और CACP को कानून के तहत स्थायी और आधिकारिक दर्जा देने की दिशा में आगे बढ़ने की बात दोहराई.
संगठन ने कहा कि अगर देश को दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना है तो मूल्य समर्थन योजना और प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत खरीद पर लागू सभी प्रतिबंध समाप्त किए जाने चाहिए. किसान संगठन ने कहा कि चना खरीद के दौरान मूल्य समर्थन योजना के तहत तय मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. किसान महापंचायत ने मांग की कि कमी मूल्य भुगतान योजना के तहत अंतर राशि किसानों के बैंक खातों में पहुंचाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार को अनुशंसा की जाए. संगठन ने मूंग खरीद के मामलों में भी इसी तरह की कार्यवाही करने की मांग रखी.
किसान महापंचायत ने औसत गुणवत्ता मानकों को लागू करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की मांग की. संगठन का कहना है कि गुणवत्ता निर्धारण के लिए न्यायपूर्ण मानदंड अपनाए जाने चाहिए. इसके साथ ही गांव स्तर पर सालभर चलने होने वाले स्थाई खरीद केंद्र बनाने का सुझाव भी दिया गया.
इसके लिए ग्राम सेवा सहकारी समितियों और प्राथमिक कृषि ऋण दात्री समितियों को आधार बनाने की बात कही गई, ताकि छोटे किसानों का ट्रांसपोर्ट खर्च कम हो और खरीद सुविधा नजदीक उपलब्ध हो सके. संगठन ने ज्ञापन में राजस्थान में अक्टूबर 2019 में सरकार और किसानों के बीच हुए समझौते का भी जिक्र किया.
ज्ञापन में कहा गया कि कृषि क्षेत्र से जुड़ी आयात-निर्यात नीतियां बनाते समय किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और इसी आधार पर निर्णय लिए जाएं. किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने आयोग से मांग की कि रबी विपणन मौसम 2027-28 के मूल्य निर्धारण में ज्ञापन में दिए गए सुझावों को शामिल करते हुए जरूरी कार्यवाही की जाए.