वाधवन पोर्ट प्रोजेक्ट: पालघर में किसानों को मिलेगा 2 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा, विरोध अब भी जारी

वाधवन पोर्ट प्रोजेक्ट: पालघर में किसानों को मिलेगा 2 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा, विरोध अब भी जारी

महाराष्ट्र के पालघर जिले में वाधवन पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए खेती की जमीन का मुआवजा 2 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर से अधिक तय किया गया है. जहां सरकार इस परियोजना को इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का बड़ा कदम मान रही है, वहीं किसान, मछुआरे और आदिवासी समुदाय आजीविका और पर्यावरण को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Feb 19, 2026,
  • Updated Feb 19, 2026, 2:31 PM IST

महाराष्ट्र के पालघर जिले के अधिकारियों ने महाराष्ट्र में वाधवन पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए ली गई खेती की जमीन के लिए 2 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर से ज्यादा मुआवजे को मंजूरी दी है. यह पैकेज इस बड़े ग्रीनफील्ड पोर्ट के लिए इंफ़्रास्ट्रक्चर विकास में मदद करेगा, जिसमें जरूरी सड़क और रेल कनेक्टिविटी शामिल है.

इससे प्रभावित जमीन मालिकों को तय बाजार कीमत का दोगुना और 100 परसेंट मुआवजा मिलेगा, जिसमें 29 अगस्त, 2024 से 12 परसेंट ब्याज लगेगा. पालघर तालुका में, खेती का बेस रेट 62.50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, जो जोड़ने के बाद कुल मिलाकर लगभग 2.5 करोड़ रुपये हो जाएगा. दहानू तालुका में वरोर और बावड़े जैसे गांवों में 1.16-1.22 करोड़ रुपये बेस रेट जैसे बड़े क्लस्टर हैं, जो शायद 4.88 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकते हैं. अलग-अलग वैल्यूएशन में जमीन पर बने स्ट्रक्चर, पेड़, कुएं और बोरवेल शामिल हैं.

24 गांवों पर प्रभाव

यह प्रोसेस नेशनल हाईवे एक्ट, 1956 के तहत केंद्र सरकार के एक नोटिफिकेशन के बाद हो रहा है, जिसमें पालघर और दहानू तालुका के 24 गांवों को टारगेट किया गया है. डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर इंदु रानी जाखड़ ने किसानों को मुआवजा दिलाने पर जोर दिया, और 60 दिनों के अंदर सही अधिकारियों को डॉक्यूमेंट जमा करने को कहा. 

जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड की ओर से बनाया गया 76,220 करोड़ रुपये का वाधवन पोर्ट, डीप-ड्राफ्ट फैसिलिटी के तौर पर दुनिया के टॉप 10 पोर्ट्स में रैंक करने का लक्ष्य रखता है. भारत के मैरीटाइम इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए जमीन अधिग्रहण में कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जा रही है.

किसानों को मुआवजा

मुआवजे वाली राहत की खबर ऐसे समय में आई है जब इस पोर्ट के खिलाफ कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन चले हैं. यह प्रदर्शन अभी रुका नहीं है बल्कि स्थगित है. जनवरी में हजारों लोगों ने पालघर में रैली निकालकर इस पोर्ट का विरोध जताया.

आंदोलनकारियों का कहना है कि ये बंदरगाह परियोजनाएं विनाशकारी हैं, जिनके कारण उनकी आजीविका, पर्यावरण और पारंपरिक जीवनशैली पर गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा. इसलिए सरकार से इन विनाशकारी परियोजनाओं को तुरंत रद्द किए जाने की जोरदार मांग की गई. विरोध मोर्चे के दौरान प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई और जिला प्रशासन को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा.

बंदरगाह के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन कई साल से चल रहा है. पालघर के अलावा इस मोर्चे में दहानू और ठाणे जिले के प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं. चार साल पहले मुंबई के आजाद मैदान में भी इन तीनों जिलों के मछुआरे, आदिवासी और ग्रामीणों ने बड़ा विरोध मोर्चा निकाला था.

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