
पड़ोसी देश पाकिस्तान में पहले से महंगाई की मार झेल रहे लोगों के सामने अब प्रशासनिक कारणों की वजह से आटे की उपलब्धता का नया संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है. इस्लामाबाद और रावलपिंडी क्षेत्र में काम करने वाली करीब 45 फ्लोर मिलों ने चेतावनी दी है कि अगर गेहूं की सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई तो उनके पास मौजूद स्टॉक खत्म हो जाएगा. इससे राजधानी क्षेत्र में आटे की कमी, कीमतों में तेजी और कालाबाजारी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है.
रावलपिंडी चैप्टर की पाकिस्तान फ्लोर मिल्स एसोसिएशन (PFMA) ने कहा कि पंजाब फूड डिपार्टमेंट ने अचानक गेहूं ट्रांसपोर्ट परमिट जारी करना बंद कर दिया है. एसोसिएशन का आरोप है कि विभाग ने इस फैसले का कोई लिखित आदेश या आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की. 13 जुलाई को सिर्फ मौखिक रूप से परमिट रोकने की जानकारी दी गई, जिससे पूरी सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हो गई.
एसोसिएशन का कहना है कि कुछ दिन पहले तक रावलपिंडी और इस्लामाबाद के लिए करीब 8,000 टन गेहूं के ट्रांसपोर्ट परमिट नियमित रूप से जारी किए जा रहे थे. इससे बाजार में सप्लाई बनी हुई थी और कीमतों पर भी नियंत्रण था. लेकिन, अचानक परमिट बंद होने के बाद दोनों शहरों में गेहूं की सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे आटे की उपलब्धता पर संकट गहराने लगा है.
पीएफएमए के मुताबिक, इस्लामाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित फ्लोर मिलें लंबे समय से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से गेहूं मंगाकर इस्लामाबाद और आसपास के क्षेत्रों की जरूरत पूरी करती रही हैं. रावलपिंडी, मरी और कोटली सतियां जैसे क्षेत्रों की आटा सप्लाई भी काफी हद तक इन्हीं मिलों पर निर्भर है. ऐसे में अगी गेहूं की आवाजाही लगातार बाधित रही तो पूरे क्षेत्र की खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
रावलपिंडी चैप्टर की पाकिस्तान फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने कहा है कि अगर इस्लामाबाद की मिलों के लिए गेहूं की सप्लाई बहाल नहीं की गई तो रावलपिंडी की फ्लोर मिलें भी उत्पादन बंद करने पर मजबूर होंगी. एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी स्थिति में खाद्य वितरण व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी पंजाब फूड डिपार्टमेंट की होगी.
पीएफएमए (पंजाब) के अध्यक्ष रियाजुल्लाह खान ने कहा कि इस्लामाबाद की फ्लोर मिलें विशेष रूप से राजधानी और आसपास के इलाकों की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से लगाई गई थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के महीनों में पंजाब फूड डिपार्टमेंट अलग-अलग कारण बताकर बार-बार गेहूं की आपूर्ति रोकता रहा है, जिससे मिल संचालकों को आर्थिक नुकसान और अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है.
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार ने गेहूं परमिट जारी करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया था और इस्लामाबाद की फ्लोर मिलों का रजिस्ट्रेशन भी इसी सिस्टम पर किया गया था. मिल संचालकों का दावा है कि उन्होंने सभी सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया, इसके बावजूद बिना कोई कारण बताए ऑनलाइन परमिट की सुविधा बंद कर दी गई. इससे पारदर्शी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं.
फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है. एसोसिएशन ने मांग की है कि गेहूं परिवहन परमिट तुरंत बहाल किए जाएं, ऑनलाइन पोर्टल फिर से चालू किया जाए और गेहूं की अंतर-क्षेत्रीय आवाजाही पर लगी बाधाओं को हटाया जाए. ऐसा नहीं होने पर इस्लामाबाद और रावलपिंडी में आटे का गंभीर संकट पैदा हो सकता है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. (एएनआई)