Mango Ban Controversy: नेपाल ने भारतीय आम पर नहीं लगाया प्रतिबंध, केंद्र सरकार ने बताया पूरा मामला

Mango Ban Controversy: नेपाल ने भारतीय आम पर नहीं लगाया प्रतिबंध, केंद्र सरकार ने बताया पूरा मामला

नेपाल में भारतीय आमों के आयात पर रोक की खबरों को केंद्र सरकार ने गलत बताया है. कृषि मंत्रालय के अनुसार नेपाल ने किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया है और तय फाइटोसैनिटरी नियमों के तहत आयात-निर्यात जारी है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 10, 2026,
  • Updated Jun 10, 2026, 10:39 PM IST

केंद्र सरकार ने नेपाल द्वारा भारतीय आम के आयात पर बैन लगाए जाने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने साफ किया है कि नेपाल ने भारतीय आमों के आयात पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई है और निर्धारित फाइटोसैनिटरी शर्तों को पूरा करने पर निर्यात और आयात प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी है. साथ ही, नई आयात शर्तों को लेकर भारत ने अपनी चिंताओं को भी नेपाल के सामने उठाया है.

मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बैन के दावे किए गए, लेकिन वे तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक हैं. नेपाल सरकार के प्लांट क्वारंटीन एंड पेस्टिसाइड मैनेजमेंट सेंटर ने 10 जून 2026 को स्पष्ट किया कि भारत से आमों का आयात पहले की तरह जारी है. हालांकि, आयात के लिए निर्धारित फाइटोसैनिटरी शर्तों का पालन करना अनिवार्य रहेगा. वैध फाइटोसैनिटरी प्रमाणपत्र जमा करने और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने पर आयात परमिट और माल रिलीज आदेश जारी किए जा रहे हैं.

भारत से इतने मीट्रिक टन आम पहुंचे नेपाल

कृषि मंत्रालय ने जानकारी दी कि भारत से नेपाल को आम की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी है. जनवरी 2026 से अब तक कुल 149 खेपों के जरिए 2005 मीट्रिक टन आम नेपाल भेजे जा चुके हैं. वहीं, केवल जून 2026 में अब तक 18 खेपों के माध्यम से 266 मीट्रिक टन आम का निर्यात किया गया है.

नई शर्तों के बीच निर्यात व्यवस्था पर भारत का फोकस

नेपाल ने हाल ही में आयात से जुड़ी कुछ शर्तों में बदलाव किया है, जिनमें हॉट वॉटर ट्रीटमेंट की जरूरत भी शामिल है. भारत सरकार ने कहा है कि वह निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्यात को सुचारु बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है, ताकि व्यापार प्रभावित न हो.

भारत ने उठाई प्रक्रिया को लेकर चिंता

कृषि मंत्रालय ने बयान में यह भी कहा कि भारत सरकार ने बिना पूर्व परामर्श के नई फाइटोसैनिटरी शर्तें लागू किए जाने को लेकर अपनी चिंता नेपाल के सामने रखी है. इस मुद्दे को द्विपक्षीय माध्यमों से आगे बढ़ाया जा रहा है और इस दौरान डब्ल्यूटीओ के एसपीएस समझौते और अंतरराष्ट्रीय प्लांट प्रोटेक्शन कन्वेंशन के ढांचे का पालन किया जा रहा है.

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