Explained: क्यों ठप है महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई? जानिए गिरावट, वजह और आगे क्या असर होगा

Explained: क्यों ठप है महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई? जानिए गिरावट, वजह और आगे क्या असर होगा

महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई इस साल 66% तक घट गई है. मॉनसून में देरी और कम बारिश इसके प्रमुख कारण हैं. जानिए किन जिलों में सबसे ज्यादा गिरावट आई, किसानों को क्या सलाह दी गई है और आगे इसका खेती पर क्या असर पड़ सकता है.

Maharashtra kharif sowing delayMaharashtra kharif sowing delay
रवि कांत सिंह
  • New Delhi,
  • Jun 17, 2026,
  • Updated Jun 17, 2026, 7:11 PM IST

महाराष्ट्र में खरीफ की बुवाई पिछले साल के स्तर के मुकाबले सिर्फ एक-तिहाई तक ही पहुंच पाई है. 15 जून तक सिर्फ 1.43 लाख हेक्टेयर में खेती पूरी हुई है—जो 2025 की इसी अवधि की तुलना में 66% की भारी गिरावट है (हालांकि 2025 में मई में ही भारी बारिश शुरू हो गई थी).

पुणे जिले में, पिछले साल इसी अवधि में 21,000 हेक्टेयर से ज्यादा बुवाई हुई थी, जबकि इस बार सिर्फ छह हेक्टेयर में बुवाई पूरी हुई है.

राज्य के प्रमुख कृषि जिलों में से एक, नासिक में बुवाई का आंकड़ा लगभग 2,200 हेक्टेयर है, जबकि पिछले साल यह लगभग 10,000 हेक्टेयर था.

मराठवाड़ा में और भी ज्यादा गिरावट देखी गई है. धाराशिव में, पिछले साल 15 जून तक 56,000 हेक्टेयर में बुवाई हुई थी, जबकि इस बार सिर्फ दो हेक्टेयर में बुवाई हुई है.

जालना में 1,881 हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले 19,000 हेक्टेयर से भी कम है.

पश्चिमी महाराष्ट्र में भी बुवाई की रफ्तार धीमी रही है. सोलापुर में पिछले साल 58,000 हेक्टेयर से ज्यादा बुवाई हुई थी, जबकि इस बार सिर्फ 20 हेक्टेयर में बुवाई पूरी हुई है.

वहीं कोल्हापुर में खेती का रकबा 5,741 हेक्टेयर है, जबकि 2025 में यह 18,525 हेक्टेयर था. कई जिलों के कृषि विभागों ने किसानों को सलाह दी है कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें.

पुणे और नासिक जिले के कृषि अधिकारियों ने किसानों से घबराने के बजाय इंतजार करने को कहा है, क्योंकि 20 जून के आसपास मॉनसून के सक्रिय होने की प्रबल संभावना है. कृषि अधिकारियों का कहना है कि किसानों को तब तक बुवाई नहीं करनी चाहिए जब तक उनके खेतों में कम से कम 75 मिमी बारिश न हो जाए. वे आगे कहते हैं, "उन्हें बीजों का रिजर्व स्टॉक भी रखना चाहिए, ताकि अगर शुरुआती बुवाई में बीज न उगें, तो उनका इस्तेमाल किया जा सके.
 

MORE NEWS

Read more!