
खेती आज सिर्फ खेत तक सीमित मसला नहीं रह गई है. सूखा, बढ़ती गर्मी, अनियमित बारिश और नई बीमारियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे माहौल में अमेरिका ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी सरकार ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्था CIMMYT को 40 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद देने की घोषणा की. यह मदद आने वाले वर्षों में खेती को जलवायु संकट से उबारने में अहम भूमिका निभाएगी.
यह घोषणा एक अमेरिकी सरकारी प्रतिनिधिमंडल की आधिकारिक यात्रा के दौरान की गई. इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अमेरिका खेती और खाद्य सुरक्षा को सिर्फ विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय मानता है. पिछले करीब 80 वर्षों से अमेरिका और मैक्सिको, निजी संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर कृषि अनुसंधान को आगे बढ़ाते रहे हैं. उसी सहयोग की अगली कड़ी के तौर पर इस नई फंडिंग को देखा जा रहा है.
CIMMYT इस राशि का इस्तेमाल उन चुनौतियों से निपटने में करेगा, जिनका सामना आज किसान रोजाना कर रहे हैं. सबसे बड़ा फोकस गेहूं और मक्का जैसी प्रमुख फसलों पर रहेगा. वैज्ञानिक ऐसी किस्में विकसित करने पर काम करेंगे जो कम पानी में भी टिक सकें और ज्यादा तापमान को सहन कर सकें. बदलते मौसम में पारंपरिक बीज कई इलाकों में नाकाम साबित हो रहे हैं, ऐसे में नई किस्में किसानों के लिए राहत बन सकती हैं.
इसके साथ ही बीजों की आनुवंशिक विविधता को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया जाएगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर बीजों की विविधता खत्म हुई तो भविष्य में खेती नई चुनौतियों के सामने पूरी तरह असहाय हो सकती है. यही वजह है कि पुराने और दुर्लभ जीन संसाधनों को संरक्षित करना इस परियोजना का अहम हिस्सा होगा.
डिजिटल तकनीक को भी खेती से जोड़ने की तैयारी है. डेटा आधारित टूल्स के जरिए किसानों को यह जानकारी मिल सकेगी कि कब बुवाई करनी है, कितनी सिंचाई जरूरी है और किस समय फसल पर खतरा मंडरा रहा है. इससे किसान सीमित संसाधनों में बेहतर फैसले ले सकेंगे और नुकसान का जोखिम कम होगा.
एक और बड़ा खतरा फसलों में तेजी से फैल रही नई बीमारियों और कीटों का है. CIMMYT इस फंड से ऐसे अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करेगा, जिससे किसी बीमारी या कीट के फैलने से पहले ही अलर्ट मिल सके. इससे बड़े पैमाने पर फसल नुकसान को रोका जा सकेगा और बाजार में आपूर्ति बनी रहेगी.
CIMMYT के महानिदेशक ब्रैम गोवर्ट्स ने कहा कि खाद्य सुरक्षा अब सिर्फ भूख मिटाने का सवाल नहीं रह गया है. यह सीधे तौर पर देशों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा हुआ है. मजबूत कृषि प्रणाली के बिना किसी भी देश की सुरक्षा अधूरी है.
एशिया के लिहाज से यह निवेश खास अहम माना जा रहा है. भारत और नेपाल जैसे देशों में छोटे किसान पहले ही जलवायु बदलाव का सबसे ज्यादा असर झेल रहे हैं. CIMMYT और BISA से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस फंडिंग से इन देशों में कृषि अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी.