
जब गर्मियों की तपिश अपने चरम पर होती है, तब आमों के बाजार में रंग-बिरंगे और रसीले आमों की रौनक आ जाती है. लेकिन हर आम, 'आम नहीं होता'. दरअसल, बिहार की राजधानी पटना का दीघा क्षेत्र एक खास किस्म के आम के लिए विख्यात है और वो आम 'दूधिया मालदा' है. हालांकि की समय के साथ इसका क्षेत्र काफी कम होकर करीब सिमट ही चुका है. इसके संरक्षण और विस्तार को लेकर इस आम को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है. कृषि विश्वविद्यालय सबौर की मीठापुर स्थित शाखा जिसे कृषि अनुसंधान संस्थान मीठापुर के नाम से भी जानते हैं, इस प्रयास का नेतृत्व कर रहा है.
पटना में दूधिया मालदा किस्म के आम को बचाने और उसे पहचान दिलाने में इस संस्थान की बड़ी भूमिका रही है. यह संस्थान न सिर्फ इस खास आम की किस्म को संरक्षित कर रहा है, बल्कि उसे GI टैग दिलाने के लिए जरूरी वैज्ञानिक प्रमाण और दस्तावेज भी जुटा रहा है. मीठापुर स्थित कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रभारी क्षेत्रीय निदेशक डॉ. शिवनाथ दास ने बताया कि GI टैग से जुड़ी लगभग सारी कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अब सिर्फ राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया जाना बाकी है.
उन्होंने बताया कि जैसे ही NOC मिल जाएगा, GI टैग के लिए आवेदन चेन्नई स्थित GI कार्यालय में कर दिया जाएगा. दूसरी ओर, दूधिया मालदा आम उगाने वाले किसानों ने भी मिलकर एक संगठन बना लिया है, जिसका नाम ‘पटना दूधिया मालदा आम उत्पादक समिति’ रखा गया है. ये समिति GI टैग दिलाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से काम कर रही है. आसान शब्दों में कहें तो पटना की दूधिया मालदा आम किस्म को बचाने, पहचान दिलाने और GI टैग दिलाने की प्रक्रिया अब आखिरी चरण में है. सरकार से NOC मिलते ही आधिकारिक आवेदन कर दिया जाएगा, जिससे इस खास आम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकेगी.
दूधिया मालदा अपने स्वाद के लिए विश्व प्रसिद्ध है. आम कारोबारी शशिकांत प्रसाद ने बताया कि 1970 के दशक में पटना में दूधिया मालदा के पेड़ फतुहा से बिहटा तक गंगा तट से पुनपुन से दनियावा तक की पट्टी में फैली हुई थी. यहा कई बड़े-बड़े बागान थे. वहीं, दीघा के रहने वाले अशोक कुमार ने बताया कि पटना और आसपास के इलाकों में शहरीकरण होने और जमीन की कीमत में इजाफा होने के कारण दूधिया मालदा अपने उत्पादक क्षेत्र में सिमटती चली गई. अभी यह दीघा के कुछ इलाकों में ही सिमट गई है.
दूधिया मालदा को बचाने के लिए काफी प्रयास किए जा रहे है. मीठापुर कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक ने बताया कि दीघा के दूधिया मालदा की 50 हजार पौधा संस्थान द्वारा तैयार करने का लक्ष्य है, जिसमें से 25 हजार पौधे तैयार हो चुके हैं, जबकि अगले डेढ़ दो महीने में 25 हजार दीघा दूधिया मालदा के पौधे तैयार हो जाएंगे. उन्होंने बताया कि दीघा सहित पटनावासियों को दूधिया मालदा आम के पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
आम की इस किस्म को दुधिया इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके छिलके पर चूने जैसा दुधिया रंग होता है. एक समय ऐसा था जब इसके पौधे को दूध से सींचा जाता था. दूध से सिंचाई के कारण इसका रंग दुधिया हो गया. इस आम में खास खुशबू और स्वाद होता है.