
ईरान मिडिल ईस्ट का वह देश है जो अक्सर राजनीतिक संकट का सामना करता है. अब एक बार फिर यह मुल्क सुलग रहा है और इसकी वजह भारतीय चाय निर्यातक टेंशन में आ गए हैं. भारतीय चाय निर्यातकों के लिए ईरान एक बड़ा विदेशी मार्केट है. लेकिन अब निर्यात पूरी तरह से रुक गया है क्योंकि संकट के चलते आयाताकों के साथ संपर्क पूरी तरह से टूट गया है. ईरान ज्यादातर प्रीमियम क्वालिटी का पारंपरिक चाय बाजार है जहां असम के कई ब्रांड्स ने अपनी खास जगह बनाई है.
ईरान को चाय निर्यात करने वाली प्रमुख कंपनी भंसाली एंड कंपनी के पार्टनर अनीश भंसाली ने मौजूदा हालात पर चिंता जताई है. अखबार बिजनेसलाइन ने उनके हवाले से लिखा कि फिलहाल ईरान से किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पा रहा है क्योंकि सभी फोन लाइनें बंद हैं. ऐसे में स्थिति की गंभीरता का सही अंदाजा लगाना मुश्किल है. भंसाली के मुताबिक जब वहां मौजूद क्लाइंट्स से बातचीत शुरू होगी, तभी असली परेशानी पता चल पाएगी. उन्होंने साफ कहा कि हालात बिल्कुल अच्छे नहीं हैं.
ईरान इस समय बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों की चपेट में है. राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारी आर्थिक और राजनीतिक सुधारों की मांग को लेकर सड़कों पर हैं. हालात को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों ने कार्रवाई तेज कर दी है. इसकी वजह से इंटरनेट और टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं बड़े स्तर पर ठप कर दी गई हैं. भंसाली ने बिजनेसलाइन से बातचीत में बताया कि इस स्थिति का चाय निर्यात पर क्या असर पड़ेगा, इस बारे में कोई भी जानकारी ईरानी इंपोर्टर्स से बात होने के बाद ही साफ हो सकेगी.
उन्होंने कहा कि कुछ शिपमेंट पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत पहले से ही रास्ते में हैं जबकि कुछ शिपमेंट अभी भेजे जाने बाकी हैं. मौजूदा हालात को देखते हुए फिलहाल शिपमेंट रोक दिए गए हैं और स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है. पश्चिम एशिया लंबे समय से भारतीय चाय के लिए एक प्रमुख निर्यात बाजार रहा है. पिछले साल जनवरी से नवंबर के बीच ईरान को करीब 10 मिलियन किलोग्राम और इराक को 49 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया गया. इसी अवधि में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को 45 मिलियन किलोग्राम चाय भेजी गई. इसमें से एक बड़ा हिस्सा ईरान के लिए री-एक्सपोर्ट होता है.
इंडियन टी एसोसिएशन (आईटीए) के पूर्व सचिव सुजीत पात्रा ने बताया कि ईरान को चाय का निर्यात मुख्य रूप से फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए होता है. इसके तहत चाय पहले ही इंपोर्टर्स द्वारा खरीदी जा चुकी होती है. हालांकि मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात के चलते शिपमेंट प्रभावित हो सकती है, लेकिन इसका असर चरणबद्ध तरीके से देखने को मिलेगा. पात्रा ने यह भी कहा कि ईरान प्रीमियम क्वालिटी चाय का एक पारंपरिक और मजबूत बाजार रहा है. भारतीय चाय वहां के ब्रांड्स में अच्छी तरह स्थापित है और मौजूदा चुनौतियों के बावजूद भारतीय चाय ईरानी बाजार में अपनी जगह बनाए रखेगी.
आपको बता दें कि ईरान, इराक और चीन को बढ़ते शिपमेंट के चलते वर्ष 2025 में भारत के कुल चाय निर्यात में 2024 की तुलना में इस बार इजाफे की उम्मीद जताई जा रही है. वर्ष 2024 में भारत ने कुल 256.17 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया था.
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