
भारत में चाय बहुत पसंद की जाती है, लेकिन अब देश में बाहर से आने वाली चाय (आयात) भी तेजी से बढ़ रही है. हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, साल 2024-25 में भारत ने लगभग 50.14 मिलियन किलो चाय आयात की, जबकि 2023-24 में यह मात्रा लगभग 25.21 मिलियन किलो थी. इसका मतलब है कि एक साल में चाय का आयात लगभग दोगुना हो गया है.
केंद्रीय मंत्री Jitin Prasada ने लोकसभा में बताया कि 2025-26 के पहले 10 महीनों (अप्रैल से जनवरी) में भी भारत ने 33.55 मिलियन किलो चाय आयात की है. इससे साफ है कि विदेशी चाय की मांग लगातार बढ़ रही है.
सरकार और Tea Board of India ने इस पर कुछ नियम बनाए हैं ताकि भारतीय चाय की पहचान बनी रहे. एक नियम के अनुसार, बाहर से आई चाय को भारत की खास GI (Geographical Indication) वाली चाय के साथ मिलाकर बेचा नहीं जा सकता. अगर कोई चाय मिलाई जाती है, तो उसे GI चाय नहीं कहा जा सकता.
सरकार ने यह भी कहा है कि अगर चाय में विदेशी चाय मिलाई गई है, तो पैकेट पर साफ-साफ लिखना होगा. इससे लोगों को पता रहेगा कि वे कौन सी चाय खरीद रहे हैं. साथ ही, चाय के पैकेट पर यह भी बताना जरूरी है कि वह चाय किस देश से आई है.
अब जो लोग चाय का आयात या निर्यात करते हैं, उन्हें पहले टी बोर्ड के पोर्टल से अनुमति लेनी होगी. बिना अनुमति के चाय का व्यापार नहीं किया जा सकता. इससे सरकार को यह पता रहता है कि कितनी चाय आ रही है और कहां जा रही है.
सरकार ने यह भी नियम बनाया है कि चाय आयात करने के 24 घंटे के अंदर यह बताना जरूरी है कि वह चाय कहां रखी गई है. इससे निगरानी करना आसान हो जाता है और कोई गड़बड़ी नहीं होती.
ये सभी नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि भारत की असली और मशहूर चाय की पहचान बनी रहे. भारत की चाय दुनिया भर में पसंद की जाती है, इसलिए उसकी गुणवत्ता को बनाए रखना बहुत जरूरी है.
सीधे शब्दों में कहें तो भारत में अब ज्यादा चाय बाहर से आ रही है, लेकिन सरकार यह चाहती है कि लोग असली और नकली चाय में फर्क समझ सकें. इसलिए पैकेट पर सही जानकारी देना और नियमों का पालन करना जरूरी किया गया है.
इस तरह, सरकार और टी बोर्ड मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीय चाय की गुणवत्ता और पहचान बनी रहे, और लोगों को सही जानकारी मिलती रहे.
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