किसानों के हित में बड़ा संकल्प, पटना कृषि अनुसंधान परिसर ने दिखाई भविष्य की राह

किसानों के हित में बड़ा संकल्प, पटना कृषि अनुसंधान परिसर ने दिखाई भविष्य की राह

पटना स्थित आईसीएआर के पूर्वी अनुसंधान परिसर ने अपना 26वां स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक मनाया. कार्यक्रम में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर विशेष जोर दिया गया. वैज्ञानिकों ने जलवायु-अनुकूल खेती, स्मार्ट जल प्रबंधन और नई फसल किस्मों के विकास पर चर्चा की, जिससे किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि को मजबूती मिलेगी.

पटना में गूंजा विकसित भारत का संदेशपटना में गूंजा विकसित भारत का संदेश
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 23, 2026,
  • Updated Feb 23, 2026, 10:56 AM IST

कृषि अनुसंधान परिसर, पटना ने 22 फरवरी 2026 को अपना 26वां स्थापना दिवस बहुत खुशी और उत्साह के साथ मनाया. यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत काम करता है और पूर्वी भारत के किसानों के लिए नई-नई खेती की तकनीकें तैयार करता है. इस खास दिन पर कई बड़े वैज्ञानिक और अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए. मुख्य अतिथि थे डॉ. ए. के. नायक, जो नई दिल्ली से आए थे. उनके साथ कई अन्य सम्मानित अतिथि भी मौजूद थे.

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

अपने भाषण में डॉ. ए. के. नायक ने कहा कि हमें साल 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाना है. इसके लिए खेती को और मजबूत बनाना जरूरी है. उन्होंने बताया कि हमें अपनी जमीन, पानी और पेड़-पौधों का सही तरीके से उपयोग करना चाहिए. उन्होंने भूमि की सुरक्षा, पानी की बचत, कार्बन क्रेडिट, अच्छे खाद और जैव विविधता की रक्षा पर जोर दिया. उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि वे ऐसी फसलें तैयार करें जो मौसम के बदलाव को सहन कर सकें और लोगों को अच्छा पोषण दे सकें.

25 साल की बड़ी उपलब्धियां

संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने बताया कि पिछले 25 सालों में संस्थान ने बहुत अच्छा काम किया है. यहां के वैज्ञानिकों ने समेकित कृषि प्रणाली, फसल विविधीकरण और स्मार्ट जल प्रबंधन जैसी कई उपयोगी तकनीकें विकसित की हैं. संस्थान ने 12 नई धान की किस्में, 1 चना, 63 सब्जियां, 2 बाकला और 6 फलों की किस्में तैयार की हैं. इनसे किसानों को ज्यादा उपज मिलती है और लोगों को अच्छा भोजन मिलता है.

इसके साथ ही पूर्णिया गाय, मेदिनी गाय, पलामू बकरी, माला मुर्गी, मैथिली बत्तख और कोड़ो बत्तख जैसे पशुओं का पंजीकरण भी किया गया है, ताकि उनका संरक्षण हो सके. यह काम किसानों और पशुपालकों के लिए बहुत लाभदायक है.

किसानों और वैज्ञानिकों का मिलन

कार्यक्रम में नवाचारी कृषक सम्मेलन भी हुआ. इसमें उन्नत कृषि तकनीकों की प्रदर्शनी लगाई गई. किसानों और वैज्ञानिकों ने आपस में बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए. किसानों के लिए हिंदी में नई किताबों का विमोचन भी किया गया, ताकि वे आसानी से नई जानकारी समझ सकें.

देश के 11 राज्यों से 300 से ज्यादा किसान इस कार्यक्रम में आए. कुल मिलाकर लगभग 650 लोगों ने इसमें भाग लिया. कार्यक्रम में लोकनृत्य और लोकगीत भी प्रस्तुत किए गए, जिससे माहौल बहुत आनंदमय हो गया.

इन लोगों को किया गया सम्मानित

इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों, मीडियाकर्मियों और संस्थान के अच्छे कर्मचारियों को सम्मानित किया गया. अंत में आयोजन सचिव डॉ. ए. के. चौधरी ने सभी अतिथियों और किसानों को धन्यवाद दिया.

यह 26वां स्थापना दिवस सिर्फ एक समारोह नहीं था, बल्कि यह किसानों के उज्ज्वल भविष्य और विकसित भारत के सपने की ओर एक मजबूत कदम था.

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