
हरियाणा सरकार ने विजन-2047 के तहत कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने की तैयारी तेज कर दी है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अगले पांच वर्षों के रोडमैप की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि खेती को आधुनिक तकनीक, कम लागत, बेहतर बाजार और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष फोकस किया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को अधिक लाभकारी और भविष्य के अनुरूप बनाना है.
मुख्यमंत्री ने बैठक में विभाग की विभिन्न योजनाओं, बजट घोषणाओं और संकल्प पत्र में किए गए वादों की प्रगति की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर जमीन पर उतारा जाए, ताकि राज्य के हर किसान तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके और कृषि क्षेत्र में अपेक्षित बदलाव दिखाई दे.
बैठक में सेम प्रभावित भूमि को खेती योग्य बनाने के अभियान की भी समीक्षा की गई. अधिकारियों ने बताया कि इस साल 1.40 लाख एकड़ भूमि को सेम मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न उभरे, इसके लिए वैज्ञानिक योजना तैयार की जाए और सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली विकसित कर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए.
राज्य में सॉइल हेल्थ कार्ड अभियान के तहत 15 लाख कार्ड जारी करने का लक्ष्य तय किया गया है. पहले चरण में 3.75 लाख मिट्टी के नमूने एकत्र किए जाने हैं, जिनमें से अब तक 50,620 नमूने लिए जा चुके हैं. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अभियान में स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण युवाओं को स्वयंसेवक के रूप में जोड़ा जाए, ताकि वे मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया को समझें और कृषि के प्रति उनकी रुचि बढ़े.
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों में यूरिया की खपत अधिक है, वहां मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाए. इससे यह पता लगाया जाएगा कि वास्तव में नाइट्रोजन की कमी है या किसान जरूरत से अधिक यूरिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके आधार पर संतुलित उर्वरक इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए.
बैठक में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई. अधिकारियों ने बताया कि 10 जिलों में प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की जा रही है. हिसार और गुरुग्राम में अलग मंडियां स्थापित की जाएंगी, जबकि अन्य आठ मंडियों में इनके लिए अलग स्थान निर्धारित किया जाएगा. साथ ही फसलों के प्रमाणीकरण तंत्र को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया.
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्राकृतिक और जैविक खेती से तैयार उत्पादों की खरीद के लिए मंडियों में अलग रजिस्टर की व्यवस्था की जाए. इसके अलावा हैफेड के माध्यम से इन उत्पादों की खरीद, बिक्री और मार्केटिंग की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए ताकि किसानों को बेहतर बाजार मिल सके.
बैठक में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक के विस्तार और किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के व्यापक प्रचार पर भी चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने अधिक से अधिक किसानों को इस तकनीक से जोड़ने के निर्देश दिए. साथ ही पराली जलाने की घटनाओं को शून्य करने के लक्ष्य के तहत जागरूकता अभियान और आधुनिक कृषि मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया. पंजाब सीमा से लगे जिलों में रीपर सहित आवश्यक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए.
मुख्यमंत्री ने 'मेरा पानी-मेरी विरासत' योजना, ड्रिप सिंचाई और फसल विविधीकरण को आगे बढ़ाने की रणनीति की भी समीक्षा की. उन्होंने कपास उत्पादक क्षेत्रों में आधुनिक चुगाई मशीनों के उपयोग को बढ़ावा देने और किसानों को नई कृषि तकनीकों से परिचित कराने के लिए अगस्त में हिसार में विशेष कृषि मेले के आयोजन के निर्देश दिए.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा विजन-2047 का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं है. सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना, खेती को टिकाऊ बनाना और आधुनिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाना है. उन्होंने अधिकारियों से दलहन, बागवानी और अन्य लाभकारी फसलों को बढ़ावा देने, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और आधुनिक कृषि पद्धतियों के विस्तार पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए.