12 साल में अनाज उत्पादन 71% बढ़ा, कृषि सुधारों और योजनाओं का असर: शिवराज सिंह

12 साल में अनाज उत्पादन 71% बढ़ा, कृषि सुधारों और योजनाओं का असर: शिवराज सिंह

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश में अनाज उत्पादन 71% बढ़ा है. सरकार के कृषि सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं और किसान हित की नीतियां इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण मानी जा रही हैं.

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अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna/New Delhi,
  • Jun 17, 2026,
  • Updated Jun 17, 2026, 7:35 PM IST

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि पिछले 12 सालों में देश में अनाज के उत्पादन में 71 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को फायदा पहुंचाने और अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई कृषि सुधार और नीतियां लागू की गई हैं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "देश में पिछले 12 सालों में अनाज के उत्पादन में 71 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. सरकार का ध्यान हमेशा लोगों की उम्मीदों को पूरा करने पर रहा है. मोदी जी का यह 12 साल का कार्यकाल भारत के पुनर्निर्माण और लोगों की उम्मीदों को पूरा करने का स्वर्णिम युग है."

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र ने गांवों के लोगों, गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के जीवन को बदल दिया है. चौहान ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने विकास और जन-कल्याण की एक नई गाथा लिखी है – जन धन खातों से लेकर आयुष्मान भारत तक, और पीएम आवास योजना से लेकर डिजिटल इंडिया क्रांति तक. उन्होंने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में देश 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है.

उन्होंने आगे कहा कि 'विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (VB–G RAM G) इस साल 1 जुलाई से पूरे देश में लागू किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि MGNREGA के तहत सभी बकाया भुगतान 30 जून से पहले कर दिए जाएंगे.

गोदाम, दाल मिल, थ्रेसिंग फ्लोर इकाइयां लगेंगी

चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं कृषोन्नति योजना के तहत दलहन, तिलहन, मक्का, मिलेट्स और जूट के क्षेत्र विस्तार के साथ-साथ कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिए अनेक परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं. इन योजनाओं के अंतर्गत 304 भंडारण गोदामों, 800 पक्का थ्रेसिंग फ्लोर, 11 दाल मिल, 102 तेल प्रसंस्करण इकाइयों और 204 कोल्ड प्रेस तेल इकाइयों की स्थापना की जाएगी. इसके साथ ही कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए 246 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है. इसके तहत 267 फार्म मशीनरी बैंक, 480 किसान ड्रोन और 200 फसल अवशेष प्रबंधन कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित किए जाएंगे. किसानों को 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे.

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, कई योजनाएं मंजूर

केंद्रीय मंत्री चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए 65 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं. बिहार में फार्मर रजिस्ट्री और डिजिटल कृषि कार्यक्रमों के माध्यम से अब तक 53.90 लाख किसानों का फार्मर आईडी बनाया जा चुका है. साथ ही बिहार लीची, मखाना और मशरूम उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है. मखाना बोर्ड के गठन और 476 करोड़ रुपये की केंद्रीय योजना से मखाना क्षेत्र के विस्तार, प्रसंस्करण और निर्यात को नई मजबूती मिलेगी.

इससे पहले दिन में, केंद्रीय मंत्री ने पटना में बिहार के कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की. बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अलग-अलग विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे. मुख्यमंत्री कार्यालय के एक बयान के अनुसार, "किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं को तेजी से लागू करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. इस बात पर सहमति बनी कि केंद्र सरकार की मदद से 30 जून से पहले मनरेगा (MGNREGA) के सभी लंबित भुगतान कर दिए जाएंगे."

मुख्यमंत्री ने बैठक में केंद्र सरकार के आजीविका कार्यक्रम के तहत 'लखपति दीदी' पहल को लागू करने में राज्य की सफलता का भी जिक्र किया. बयान में कहा गया, "बिहार अभी 'जीविका दीदियों' को 'लखपति दीदियों' में बदलने के मामले में देश में पहले स्थान पर है और राज्य इस उपलब्धि को और मजबूत करना चाहता है. इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने कहा कि नवाचार को बढ़ावा देने और उत्पादकता में सुधार के लिए प्याज, टमाटर और आम जैसी फसलों के लिए विशेष केंद्र बनाए जाएंगे."

इससे पहले, केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में चौहान ने पटना में स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया.

खेत बचाओ अभियान में 3000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित "खेत बचाओ अभियान" केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि मिट्टी, किसान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का जन-अभियान है. 1 जून 2026 से अब तक राज्य के सभी 38 जिलों में 3,172 जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 2 लाख 16 हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया है. साथ ही 12 से 20 जून के बीच प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 52 विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है.

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