खाने का तेल होगा सस्ता! सरकार ने घटाई इंपोर्ट ड्यूटी, सोया-पाम के साथ सूरजमुखी तेल पर बड़ी राहत

खाने का तेल होगा सस्ता! सरकार ने घटाई इंपोर्ट ड्यूटी, सोया-पाम के साथ सूरजमुखी तेल पर बड़ी राहत

त्योहारी सीजन के बीच खाने के तेल की कीमतों से राहत देने के लिए सरकार ने पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटा दी है. कच्चे पाम और सोयाबीन तेल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी 10% से घटाकर 5% कर दी गई है, जबकि कच्चे सूरजमुखी तेल पर BCD को शून्य कर दिया गया है. रिफाइंड पाम और सोयाबीन तेल के साथ रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर भी शुल्क में कटौती की गई है. इस फैसले से खाद्य तेल का आयात बढ़ने और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है.

भारत में क‍ितनी है प्रति व्यक्ति खाद्य तेल की खपत? भारत में क‍ितनी है प्रति व्यक्ति खाद्य तेल की खपत?
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Sep 24, 2026,
  • Updated Sep 24, 2026, 11:42 AM IST

त्योहारी सीजन के बीच खाने के तेल की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पाम तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल की अलग-अलग श्रेणियों पर लगने वाली बेसिक कस्टम्स ड्यूटी यानी BCD में कटौती की गई है. नई दरें लागू होने के बाद इंपोर्ट किए जाने वाले खाद्य तेल की लागत घटने और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है.

सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है. वहीं रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड पाम तेल पर आयात शुल्क 32.5 प्रतिशत से घटाकर 27.5 प्रतिशत किया गया है.

सूरजमुखी तेल पर सबसे बड़ी कटौती

सरकार ने सूरजमुखी तेल पर शुल्क में और बड़ी राहत दी है. कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दी गई है. वहीं रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी को 32.5 प्रतिशत से कम करके 22.5 प्रतिशत किया गया है.

इन बदलावों के बाद कच्चे पाम और कच्चे सोयाबीन तेल पर कुल प्रभावी आयात शुल्क 16.5 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत हो जाएगा. इसके साथ ही कच्चे सूरजमुखी तेल पर कुल शुल्क 16.5 प्रतिशत से कम होकर 5.5 प्रतिशत रह जाएगा.

खाद्य तेल के आयात पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी के अलावा एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस और सोशल वेलफेयर सरचार्ज जैसे शुल्क भी लागू होते हैं.

एक साल में करीब 20% बढ़ी थीं कीमतें

खाद्य तेल की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. ऐसे में सरकार का यह फैसला खासतौर पर त्योहारी सीजन को देखते हुए अहम माना जा रहा है. सितंबर से नवंबर के बीच देश में कई बड़े त्योहार आते हैं और इस दौरान मिठाई, नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थों के उत्पादन और घरेलू इस्तेमाल के कारण खाद्य तेल की मांग बढ़ जाती है.

आयात शुल्क कम होने से विदेश से खाद्य तेल मंगाने की लागत घट सकती है. यदि इसका फायदा बाजार में उपभोक्ताओं तक पहुंचता है तो आने वाले दिनों में पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है.

खाद्य तेल आयात बढ़ने की उम्मीद

ट्रेड से जुड़े लोगों का मानना है कि आयात शुल्क में कमी के बाद भारतीय रिफाइनर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी खरीद बढ़ा सकते हैं. शुल्क में कटौती की उम्मीद के चलते कुछ रिफाइनर्स ने खरीद को रोक रखा था. अब त्योहारी मांग पूरी करने के लिए आयात में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है.

भारत खाद्य तेल की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है. देश में इस्तेमाल होने वाले वेजिटेबल ऑयल की करीब दो-तिहाई जरूरत आयात के जरिए पूरी होती है. पाम तेल के लिए भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों पर निर्भर है, जबकि सोया और सूरजमुखी तेल अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन समेत दूसरे देशों से भी आयात किया जाता है.

सूरजमुखी तेल के आयात को मिल सकता है बढ़ावा

जानकारों ने 'रॉयटर्स' को बताया, शुल्क में हुए बदलाव में सबसे अधिक फायदा सूरजमुखी तेल को मिलने की संभावना है. कच्चे सूरजमुखी तेल की बेसिक कस्टम्स ड्यूटी शून्य किए जाने के कारण यह भारतीय रिफाइनर्स के लिए पहले के मुकाबले अधिक आकर्षक हो सकता है.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सूरजमुखी तेल का आयात बढ़ सकता है और यह पाम और सोया तेल की कुछ मांग को अपनी तरफ खींच सकता है.

इसके अलावा भारत में आयात मांग बढ़ने का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है. भारत दुनिया के बड़े वेजिटेबल ऑयल खरीदारों में शामिल है, इसलिए आयात बढ़ने से मलेशियाई पाम तेल और अमेरिकी सोया तेल के अंतरराष्ट्रीय भाव को समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है.

क्या ग्राहकों को तुरंत मिलेगा सस्ता तेल?

इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती से आयात लागत में कमी आएगी, लेकिन खुदरा बाजार में इसका पूरा असर कितनी जल्दी दिखाई देगा, यह अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये के एक्सचेंज रेट, आयातकों और रिफाइनर्स की लागत और घरेलू मांग जैसे कई फैक्टर पर निर्भर करेगा.

फिलहाल सरकार के इस फैसले से त्योहारों के दौरान खाद्य तेल की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.

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