12 राज्यों में शुरू हुआ ‘ग्रोमोर ग्राम’ मॉडल प्रोग्राम, 75,000 किसानों तक पहुंचा प्रोजेक्ट

12 राज्यों में शुरू हुआ ‘ग्रोमोर ग्राम’ मॉडल प्रोग्राम, 75,000 किसानों तक पहुंचा प्रोजेक्ट

कोरोमंडल इंटरनेशनल ने किसानों की मदद के लिए ‘ग्रोमोर ग्राम’ मॉडल की शुरुआत की है. यह पहल 12 राज्यों के 101 गांवों में लागू की गई है, जिसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, मिट्टी परीक्षण और विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराना है. इस कार्यक्रम से लगभग 75,000 किसानों को लाभ मिलेगा और खेती को अधिक उत्पादक व टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी.

‘ग्रोमोर ग्राम’ से जुड़ेंगे 75,000 किसान‘ग्रोमोर ग्राम’ से जुड़ेंगे 75,000 किसान
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 09, 2026,
  • Updated Jun 09, 2026, 11:03 AM IST

किसानों की खेती को आसान और बेहतर बनाने के लिए कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड ने एक नई पहल शुरू की है, जिसका नाम ‘ग्रोमोर ग्राम मॉडल’ रखा गया है. इस योजना को देश के 12 राज्यों के 101 गांवों में शुरू किया गया है. इनमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, ओडिशा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और गुजरात जैसे राज्य शामिल हैं. इस पहल का मकसद किसानों को नई तकनीक और सही खेती के तरीके से जोड़ना है, ताकि उनकी मेहनत का बेहतर फल मिल सके.

अब खेतों तक पहुंचेगी वैज्ञानिक खेती की जानकारी

इस योजना के तहत किसानों को अब खेती से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी सीधे उनके गांव और खेतों तक मिलेगी. कंपनी का कहना है कि इसका उद्देश्य यह है कि किसान सही समय पर सही खाद और सही तरीके अपनाएं, जिससे फसल की पैदावार बढ़े और नुकसान कम हो. सरल भाषा में कहें तो अब किसानों को बेहतर खेती के आसान तरीके उनके ही इलाके में सिखाए जाएंगे.

गांवों में मिलेंगी हाई-टेक कृषि सुविधाएं

‘ग्रोमोर ग्राम’ के तहत गांवों में किसानों को कई आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी. इसमें मिट्टी और पत्तियों की जांच, फसल की स्थिति के अनुसार सलाह, खेतों में डेमो प्लॉट और ड्रोन से छिड़काव जैसी तकनीकें शामिल हैं. ये सुविधाएं किसानों को यह समझने में मदद करेंगी कि उनके खेत के लिए क्या सही है और क्या नहीं.

खेती और रिसर्च के बीच खत्म होगी दूरी

कंपनी के अनुसार, यह पहल इस लिए शुरू की गई है ताकि वैज्ञानिक रिसर्च और असली खेती के बीच की दूरी कम हो सके. अक्सर नई तकनीक लैब में तो बनती है, लेकिन किसानों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती. अब इस योजना के जरिए वही जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचेगी और वे उसका फायदा उठा सकेंगे.

75,000 किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

फिलहाल यह कार्यक्रम करीब 75,000 किसानों को जोड़ रहा है और धीरे-धीरे इसे और गांवों में भी बढ़ाया जाएगा. कंपनी का कहना है कि इस पहल से खेती ज्यादा आसान, आधुनिक और फायदेमंद बनेगी. उम्मीद है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और खेती में नई तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ेगा.

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