
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज कारगिल में 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले आधुनिक डेयरी प्लांट की आधारशिला रखी. यह कार्यक्रम वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया, जिसमें लद्दाख के डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई नई पहलें भी शुरू की गईं. इस योजना के तहत मोबाइल मिल्क टेस्टिंग लैब, आधुनिक मिल्क कूलिंग सिस्टम और डेयरी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि इन कदमों से लद्दाख में डेयरी गतिविधियों को संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाएगा, जिससे किसानों को सीधे फायदा मिलेगा.
कारगिल में बनने वाला यह डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है. इस परियोजना को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (National Dairy Development Board) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी द्वारा विकसित किया जा रहा है. यह प्लांट क्षेत्र में मिल्क प्रोसेसिंग की क्षमता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा.
यह परियोजना राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (National Programme for Dairy Development) के तहत लागू की जा रही है. इसमें केंद्र सरकार की ओर से 12.74 करोड़ रुपये की ग्रांट दी जा रही है, जबकि 10 करोड़ रुपये का सहयोग एनडीडीएफ से मिल रहा है. बाकी राशि का प्रबंध लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के फंड और हिमाचल प्रदेश प्रशासन के माध्यम से किया जा रहा है.
इस डेयरी प्लांट को 350 किलोवाट क्षमता वाली सौर ऊर्जा प्रणाली से संचालित किया जाएगा. इससे न केवल बिजली की समस्या का समाधान होगा, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल संचालन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऊर्जा आपूर्ति की चुनौती को देखते हुए यह मॉडल खास महत्व रखता है.
दूध कलेक्शन के लिए मोबाइल मिल्क कलेक्शन और कूलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा. इससे किसानों से सीधे दूध एकत्र किया जा सकेगा और उसकी क्वालिटी भी बरकरार रहेगी. यह व्यवस्था स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मददगार होगी.
डेयरी सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल भुगतान और एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किए गए हैं. मोबाइल मिल्क कलेक्शन यूनिट और ऑटोमेटेड मिल्क कलेक्शन सिस्टम के जरिए दूध की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा रहा है. इससे किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा.
अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का असर अब दिखने लगा है. पहले जहां केवल 74 किसान एक गांव तक सीमित थे, वहीं अब यह नेटवर्क बढ़कर करीब 1700 किसानों तक पहुंच गया है. रोजाना दूध संग्रह लगभग 7000 लीटर तक पहुंच चुका है और किसानों को कुल मिलाकर 15 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है.
इस परियोजना को भारतीय सेना के साथ नियमित दूध आपूर्ति व्यवस्था से भी मजबूती मिली है. इससे डेयरी उत्पादों के लिए स्थिर बाजार तैयार हुआ है और संचालन की विश्वसनीयता बढ़ी है. वहीं, डेयरी उत्पादों में पनीर और दही जैसे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके साथ ही मदर डेयर, सफल और धारा जैसे ब्रांड्स के साथ साझेदारी कर उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंचाने की योजना बनाई गई है.
अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी पहल सहकारी मॉडल पर आधारित ग्रामीण विकास की दिशा में एक मजबूत प्रयास है. इससे किसानों की आय में स्थिरता आएगी और जीवन स्तर में सुधार होगा. यह परियोजना आत्मनिर्भर लद्दाख के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भर भारत की सोच को भी मजबूती देगी.