
नई दिल्ली में कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का 36वां वार्षिक सम्मेलन मंगलवार को शुरू हो गया. दो दिवसीय इस सम्मेलन का आज 26 अगस्त को दूसरा दिन है. इस सम्मेलन का विषय ‘विकसित भारत @2047 के लिए कृषि उच्च शिक्षा की पुनर्कल्पना’ है. बीते दिन केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि शिक्षा की सफलता सिर्फ डिग्री देने से नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में आए बदलाव से मापी जानी चाहिए. उन्होंने कृषि शिक्षा को किसानों की जरूरतों से जोड़ने और उसे ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि अनुसंधान को प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए. शोध से मिले समाधान किसानों तक पहुंचने चाहिए. इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों, उद्योग और किसानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है.
उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा का उद्देश्य युवाओं को सिर्फ नौकरी के लिए तैयार करना नहीं होना चाहिए. युवाओं में उद्यमिता, नवाचार और रोजगार पैदा करने की क्षमता विकसित की जानी चाहिए. कृषि में आधुनिक तकनीक और नए कारोबारी अवसरों को शिक्षा से जोड़ने की जरूरत है.
शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों से स्पष्ट लक्ष्य तय करने और उन्हें पूरा करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा. उन्होंने जोर दिया कि हर सम्मेलन के फैसलों के परिणामों को मापा जाना चाहिए, ताकि चर्चाएं केवल बैठकों तक सीमित न रहें.
वहीं, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि विकसित भारत के लिए मजबूत कृषि क्षेत्र और सशक्त किसान जरूरी हैं. उन्होंने कृषि शिक्षा और अनुसंधान को किसानों की जरूरतों से जोड़ने, आधुनिक तकनीक, उद्यमिता और कृषि व्यवसाय के जरिए युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया.
मंत्री राम नाथ ठाकुर ने कृषि शिक्षा के आधुनिकीकरण और नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि शिक्षा और अनुसंधान किसानों की जरूरतों से जुड़े होने चाहिए और उनका इस्तेमाल खेत स्तर की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान के लिए होना चाहिए.
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि कृषि उच्च शिक्षा को पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़ाकर कौशल, नवाचार और तकनीक आधारित बनाना जरूरी है. उन्होंने उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी मजबूत करने और मांग के अनुसार अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया.
सम्मेलन में छात्र-केंद्रित सुधार, उच्च शिक्षा, शिक्षक विकास, संस्थागत मजबूती, गुणवत्ता, अनुसंधान और नवाचार सहित 14 प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है. इसमें कृषि शिक्षा को ज्यादा समावेशी और रोजगारपरक बनाने, अनुसंधान को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जोड़ने और विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने पर भी विचार किया जा रहा है.
बैठक में छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने के लिए ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव को मजबूत करने पर चर्चा हुई. साथ ही अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप, उद्योग-अकादमिक साझेदारी और नए पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विचार किया गया.