MP की सीमा मेहता ने बदली खेती की तस्वीर! गेहूं छोड़ पॉलीहाउस में उगाए जरबेरा के फूल, अब सालाना ₹11.60 लाख का मुनाफा

MP की सीमा मेहता ने बदली खेती की तस्वीर! गेहूं छोड़ पॉलीहाउस में उगाए जरबेरा के फूल, अब सालाना ₹11.60 लाख का मुनाफा

सीहोर की महिला किसान सीमा मेहता ने गेहूं की पारंपरिक खेती छोड़कर 4,000 वर्ग मीटर में पॉलीहाउस के जरिए जरबेरा फूलों की खेती शुरू की। सरकार से ₹16.88 लाख का अनुदान लेकर उन्होंने आधुनिक खेती अपनाई.अब सालाना 3.60 लाख फूलों का उत्पादन कर ₹25.20 लाख की आय और ₹11.60 लाख का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं.

धर्मेंद्र सिंह
  • Sehor ,
  • Oct 30, 2026,
  • Updated Oct 30, 2026, 11:14 AM IST

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की महिला किसान सीमा मेहता ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक पॉलीहाउस तकनीक को अपनाया और अपनी तकदीर बदल दी.4,000 वर्ग मीटर में जरबेरा फूलों की खेती से अब सालाना 25.20 लाख रुपये की आय और करीब 11.60 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं.

खेती में अगर नई तकनीक, सही फसल का चयन और मेहनत का साथ मिल जाए, तो किसान अपनी आमदनी में बड़ा बदलाव ला सकते हैं.मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की महिला किसान सीमा मेहता इसकी एक शानदार मिसाल बनकर सामने आई हैं. कभी गेहूं की पारंपरिक खेती करने वाली सीमा आज पॉलीहाउस में जरबेरा फूलों का उत्पादन कर लाखों रुपये का मुनाफा कमा रही हैं. सरकारी अनुदान और आधुनिक कृषि तकनीक की मदद से उन्होंने खेती को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि एक लाभकारी व्यवसाय बना दिया है.

गेहूं की खेती से होती थी सीमित कमाई

सीहोर विकासखंड के ग्राम बमूलिया निवासी सीमा मेहता पहले अपनी जमीन पर पारंपरिक तरीके से गेहूं की खेती करती थीं. इस खेती से उन्हें लगभग 15 क्विंटल गेहूं का उत्पादन मिलता था. फसल तैयार करने में करीब 10 हजार रुपये की लागत आती थी और उन्हें लगभग 29 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त होता था.

हालांकि पारंपरिक खेती से परिवार का भरण-पोषण हो रहा था, लेकिन सीमा की इच्छा अपनी आमदनी बढ़ाने और खेती में कुछ नया करने की थी.इसी सोच ने उन्हें आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया.

सरकार से मिला ₹16.88 लाख का अनुदान, बनाया पॉलीहाउस

वर्ष 2024-25 में सीमा मेहता को उद्यानिकी एवं संरक्षित खेती योजना के बारे में जानकारी मिली.उन्होंने योजना का लाभ लेने का निर्णय लिया.सरकारी सहायता के तहत उन्हें 16.88 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ. इस राशि की मदद से उन्होंने 4,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में आधुनिक पॉलीहाउस स्थापित किया.

पॉलीहाउस तैयार होने के बाद उन्होंने गेहूं की पारंपरिक खेती के बजाय उच्च मूल्य वाली जरबेरा फूलों की खेती शुरू की.संरक्षित खेती की इस तकनीक से फूलों की फसल को प्रतिकूल मौसम से बचाने और बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिली.

 हर साल 3.60 लाख जरबेरा फूलों का उत्पादन

आधुनिक तकनीक और लगातार मेहनत का परिणाम यह रहा कि सीमा मेहता के पॉलीहाउस में जरबेरा फूलों का उत्पादन तेजी से बढ़ा. वर्ष 2026-27 के उत्पादन काल तक उनके यहां प्रतिवर्ष लगभग 3.60 लाख जरबेरा फूलों का उत्पादन होने लगा.

फूलों की खेती से उनकी आमदनी में भी बड़ा बदलाव आया. अब उनकी वार्षिक आय 25.20 लाख रुपये तक पहुंच गई है. उत्पादन पर लगभग 13.60 लाख रुपये खर्च करने के बाद उन्हें करीब 11.60 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है.

पारंपरिक खेती से आधुनिक खेती तक का सफर बना मिसाल

सीमा मेहता की सफलता बताती है कि खेती में नवाचार और आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं. खासकर पॉलीहाउस जैसी संरक्षित खेती की तकनीक किसानों को पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर फूलों और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन का अवसर देती है.

सीमा ने अपनी इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जिले के उद्यानिकी विभाग को दिया है. उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र की दूसरी महिला किसानों और किसानों के लिए भी प्रेरणा है कि सरकारी योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और मेहनत के जरिए खेती को आत्मनिर्भरता और बेहतर कमाई का माध्यम बनाया जा सकता है.

 

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