Mushroom Farming: मशरूम की खेती से की 90 लाख की कमाई, जानें राजस्थान किसान की सफलता

Mushroom Farming: मशरूम की खेती से की 90 लाख की कमाई, जानें राजस्थान किसान की सफलता

राजस्थान के किसान शंकर मीणा ने परंपरागत खेती छोड़कर मशरूम स्पॉन में अपना व्यवसाय शुरू किया और 90 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल किया. जानिए कैसे उन्होंने चुनौतियों को पार किया, आधुनिक तकनीक अपनाई और पूरे भारत के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला स्पॉन उपलब्ध कराया. यह कहानी किसानों और युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणा है.

शंकर मीणा ने बदल दी राजस्थान की खेती की कहानीशंकर मीणा ने बदल दी राजस्थान की खेती की कहानी
प्राची वत्स
  • Noida ,
  • Jan 25, 2026,
  • Updated Jan 25, 2026, 10:15 AM IST

राजस्थान के अधिकतर किसान मिलेट, मक्का, मूंगफली और दालों की खेती करते हैं. इसके साथ ही पशुओं से भी उनकी आमदनी जुड़ी होती है. लेकिन कुछ किसान नई तकनीक और विज्ञान से जुड़े काम में भी हाथ आजमा रहे हैं. ऐसा ही एक उदाहरण है शंकर मीणा का. उन्होंने बचपन अपने पिता के मक्का के खेतों में खेलकर बिताया. धीरे-धीरे उन्होंने देखा कि उनके पिता कितनी मेहनत करते हैं, लेकिन आमदनी बहुत कम है.

शंकर ने सोचा कि पुरानी फसलें अब पर्याप्त आमदनी नहीं दे रही हैं, इसलिए कुछ नया करना होगा. उन्होंने रिसर्च की और मशरूम की खेती के बारे में जाना.

मशरूम स्पॉन की जरूरत समझी

मशरूम उगाने के लिए सबसे जरूरी चीज होती है स्पॉन. स्पॉन के बिना मशरूम नहीं उगते. भारत के किसान अक्सर दूसरे राज्यों से स्पॉन मंगाते हैं. शंकर ने यही देखा और सोचा, “अगर मैं अच्छा और सस्ता स्पॉन बनाऊं, तो कई किसानों की मदद होगी.” इस सोच के साथ उन्होंने Jeevan Mushrooms की नींव रखी. अब उनका स्पॉन पूरे भारत में बिकता है और हजारों किसानों की मदद करता है.

छोटे गांव से आते हैं शंकर मीणा

शंकर राजस्थान के छोटे गांव डांटली के रहने वाले हैं. उनके परिवार की खेती में आमदनी बहुत कम थी. उन्होंने गांव से पढ़ाई की और कॉमर्स में बैचलर डिग्री ली. 2012 में उन्होंने MBA में नामांकन लिया, लेकिन महसूस किया कि यह कोर्स उनके उद्यमिता के लिए सही नहीं है. इसलिए 2013 में उन्होंने MBA छोड़ दिया. शंकर का मकसद था कि ऐसा बिजनेस बनाएं जो किसानों के लिए स्थायी आमदनी दे.

ट्रेनिंग लेकर की शुरुआत

शंकर ने डॉ. प्रदीप सिंह शेखावत से जयपुर कृषि अनुसंधान केंद्र में प्रशिक्षण लिया. इसके बाद 2015 में उन्होंने ICAR–Directorate of Mushroom Research, सोलन में मशरूम पर वर्कशॉप की. शंकर ने देखा कि राजस्थान में स्पॉन उत्पादन का कोई भी डेडिकेटेड यूनिट नहीं था. इससे किसान दूसरे राज्यों पर निर्भर थे. उन्होंने अपने घर के गैरेज में टेस्ट लैब बनाई और अपने परिवार के व्यापार से कुछ पैसे लगाकर रिसर्च शुरू की.

इन चुनौतियों का किया सामना

शंकर का बैकग्राउंड कॉमर्स का था, इसलिए लैब और माइक्रोबायोलॉजी का अनुभव नहीं था. उन्हें कंटामिनेशन, तापमान, और हैंडलिंग की समस्याएँ आईं. लेकिन उन्होंने हर गलती से सीखकर धीरे-धीरे सुधार किया.

बड़ी चुनौती थी फंड की कमी. शंकर बताते हैं, “मैंने जितनी भी बैंक में अप्रोच की, सभी ने मना कर दिया.”

पहला निवेश और बढ़ोतरी

शंकर ने लगभग 16 लाख रुपये का निवेश किया. इसमें से 9 लाख रुपये प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से आए, बाकी अपने परिवार और बचत से. 2017 में उन्होंने 5 टन स्पॉन प्रति साल क्षमता वाला पहला यूनिट बनाया. उस साल उनकी आमदनी लगभग 5 लाख रुपये हुई.

Jeevan Mushrooms की सफलता

2023 तक, Jeevan Mushrooms ने अपनी लैब बढ़ाकर 12,000 स्क्वायर फीट कर दी. यहां ऑटो क्लेव्स, इनक्यूबेशन चैम्बर, कोल्ड स्टोरेज जैसी आधुनिक मशीनें हैं. यहां अलग-अलग प्रकार के मशरूम जैसे बटन, ऑयस्टर, शिटाके, पोर्टोबेलो, लायन मेन का स्पॉन बनाया जाता है.

फर्म सीधे B2C मॉडल पर काम करती है. राजस्थान और भारत के कई राज्यों के किसानों तक स्पॉन पहुँचाया जाता है.

बिजनेस मॉडल और आमदनी

शंकर का बिजनेस मॉडल सरल है:

  • स्पॉन की बिक्री ₹100 प्रति किलो
  • छोटे और बड़े किसान दोनों को सप्लाई
  • लंबी दूरी के लिए रिलेटिफ्रिजरेटेड पैकेजिंग

2021 में आमदनी 15 लाख, 2022 में 35 लाख, 2023 में 52 लाख, 2024 में 75 लाख और 2025 में 90 लाख रुपये.

2026 में उनका लक्ष्य 2.5 करोड़ रुपये की आमदनी हासिल करना है.

क्या है आगे की योजना

  • उत्पादन क्षमता बढ़ाना
  • पूरे भारत में वितरण नेटवर्क विस्तारित करना
  • मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना
  • हर साल 1000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण देना

शंकर का कहना है, “कृषि में बहुत अवसर हैं. युवाओं को विज्ञान और नवाचार के साथ खेती को अपनाना चाहिए. इससे किसान मदद पाएंगे और देश की प्रगति होगी.”

शंकर मीणा ने यह साबित किया कि rural innovation, साइन्स और मेहनत से किसान भी बड़े बिजनेस में सफलता पा सकते हैं. Jeevan Mushrooms आज एक 90 लाख का टर्नओवर वाला व्यवसाय बन चुका है और हजारों किसानों की मदद कर रहा है. यह कहानी बताती है कि नई सोच और साहस से खेती में भी व्यवसायिक सफलता हासिल की जा सकती है.

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