
भारतीय जीवन शैली में 50 की उम्र पार करते ही बुढ़ापा घेर लेता है. इसके साथ ही शरीर पर बीमारियां भी घर बना लेती हैं. अमूमन, इस बीमारी में अधिकांश व्यक्ति बीपी और शुगर जैसी बीमारियों से परेशान होते हैं. आलम यह होता है कि इस उम्र के लोग अक्सर यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि चाय में कम चीनी देना, शुगर बढ़ जाएगीऋ तो वहीं इसी तरह बीपी का हवाला देते हुए लोग खाने में कम या ज्यादा नमक लेते है. लेकिन, पटना निवासी 58 वर्षीय अनिल पॉल ने इन बीमारियों को मात दी हुई है. जिसका श्रेय वह अपनी घर के छत पर लगी हुए बागवानी फार्म को देते हैं.
पटना शहर के बोरिंग कैनाल रोड के त्रिवेणी अपार्टमेंट निवासी अनिल पॉल पेशे से सीरियल एवं फिल्म डायरेक्टर हैं. वह पिछले 24 वर्षो से अपने अपार्टमेंट के छत पर बागवानी कर रहे हैं. अनिल पॉल कहते हैं कि उन्होंने एक हजार स्क्वायर के एरिया में फल,फूल,सब्जी के साथ अन्य पौधे लगाये हुए हैं. वह कभी दूसरे शहर या अन्य स्थानों पर जाते हैं तो वहां से पौधे लेकर आते हैं. वह आर्गेनिक तरीके से उगाए हुए सब्जी, फल पिछले कई वर्षो खा रहे हैं.
अपने घर की छत पर लगे पौधे और उसके पीछे की मेहनत की जानकारी देते हुए अनिल पॉल कहते हैं कि 18 साल से उनके घर से सब्जी, फल और अंडा के छिलकों को बाहर कचरे में नहीं फेंका गया है. वह किचन वेस्ट सामान को एकत्र कर लेते हैं. इसके साथ ही पौधे के सूखे पत्ते को जमा करते हैं और थर्मोकोल के एक डिब्बा में रखते हैं. यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है. वहीं आर्गेनिक खाद तैयार होने में करीब 4 से पांच महीना लग जाता है और उसी खाद का उपयोग पौधे के लिए करते हैं.
वह बताते है कि उनका गांव नजदीक होने के कारण सूखा गोबर वहां से लाते हैं.आगे वह कहते हैं कि किचन वेस्ट चीजों में खाद के लिए चावल,दाल,सब्जी का उपयोगा नहीं करना चाहिए. बल्कि उसे जानवरों को खाने के लिए दे देना चाहिए. वह पौधे को कीड़ों से बचाने के लिए नीम के पत्ते उबालकर उसके पानी का छिडकाव समय-समय पर करते रहते हैं. वे कहते हैं कि सर्दी और गर्मी में पौधे सबसे ज्यादा सूख जाते हैं. सर्दी में पौधे ज्यादा नहीं सूखे इसके लिए तीन से चार दिन पुरानी सरसों की खली के घोल को जरूरत अनुसार 15 दिनों के बीच में डालनी चाहिए . वहीं तीन से चार दिनों के बीच में पौधे के ऊपर पानी का छिड़काव करना चाहिए . इससे पत्तों पर जमी गंदगी धूल जाती है. लेकिन उन पौधों पर पानी का छिड़काव करने से बचना चाहिए, जिन पौधों पर फल के फूल लगे होते हैं.
छत पर इलायची,अंजीर के पौधे से लेकर सब्जी की करते हैं खेती
अनिल सिंंह अपने छत बागवानी शुरू करने की कहानी साझा करते हुए कहते हैं कि उन्होंने 24 साल पहले बागवानी की शुरुआत छत पर एक बरगद का पेड़ लगाकर की थी. उस समय छत पर बागवानी करने को लेकर दोस्त और पड़ोसी कई तरह के सवाल एवं मज़ाक उड़ाते थे.अनिल सिंह बताते हैं कि फिल्म और सीरियल बनाते-बनाते छत पर बागवानी करने का कहां से शौक जग गया. लेकिन, लोग कहते थे कि आप बागवानी नहीं कर सकेंगे. आज इनके बगीचे में इलाचयी, अंजीर के साथ संतरा, अमरूद के कई किस्म के पेड़ हैं. वहीं गोल मिर्च, पत्थर चट्टा, अपराजिता, सीड लेस नींबू, राखी के फूल, वैजयंती, तुलसी, आक्सीजन प्लांट, मेथी, पालक, धनिया, टमाटर, लहसुन के साथ अन्य सब्जी, फूल, फल के छोटे किस्म के पेड़ और पौधे लगे हुए हैं.
वह बताते हैं कि वे मौसम के अनुसार लगने वाले अधिकांश सब्जीयों की खेती करते हैं.साथ ही वह बताते हैं इन सब्जियों का उपयोग परिवार के अलावा पड़ोसी भी करते हैं. जिसके तहत मुख्य रूप से पालक,धनिया,लहसुन,टमाटर के साथ अन्य सब्जियां तैयार होने के बाद बाजार से नहीं खरीदना पड़ता है .