
किसानों को कीट और रोगों से बचाने के लिए कीटनाशक बहुत जरूरी हैं. लेकिन लोगों के बीच इनके बारे में बहुत सारी गलतफहमियां फैल गई हैं. क्रॉपलाइफ इंडिया ने इन्हीं गलतफहमियों को दूर करने के लिए ‘मिथक बनाम तथ्य’ समझाया है. उनका कहना है कि सही जानकारी से किसान सुरक्षित तरीके से फसल बचा सकते हैं और हमें अपने पर्यावरण और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए.
भारत में किसान हर हेक्टेयर खेत पर औसतन 0.3 से 0.6 किलो कीटनाशक लगाते हैं. यह दुनिया में बहुत कम है. कई यूरोपीय देशों में यह 2-4 किलो और चीन में करीब 13 किलो तक होता है. इसका मतलब यह है कि हमारे किसान बहुत ज्यादा कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं करते. सरकार और वैज्ञानिक लोग सुनिश्चित करते हैं कि हर उत्पाद सुरक्षित हो और इसे इस्तेमाल करने के नियम दिए गए हों.
सच्चाई: भारत में हर कीटनाशक को इस्तेमाल से पहले सरकार जांचती है. केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति यह देखती है कि यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और खाने पर सुरक्षित है या नहीं. अगर किसान लेबल पढ़कर, दस्ताने और मास्क पहनकर और सही मात्रा में इस्तेमाल करें, तो किसी को भी कोई खतरा नहीं होता.
सच्चाई: आजकल के ज्यादातर कीटनाशक जल्दी टूट जाते हैं. मिट्टी, पानी और मौसम के अनुसार उनका असर बदलता है. इसलिए लेबल पर लिखा होता है कि फसल काटने से पहले कितने दिन इंतजार करना है.
सच्चाई: हर कीटनाशक की ताकत अलग होती है. कुछ ज्यादा मजबूत होते हैं, कुछ हल्के. हर उत्पाद की अलग जांच होती है और सुरक्षा की अलग श्रेणी होती है. किसान को हमेशा लेबल पढ़ना चाहिए और सही मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए.
सच्चाई: जैविक खेती में भी कुछ कीटनाशक इस्तेमाल होते हैं, जैसे नीम का अर्क या पाइरेथ्रम. यह प्राकृतिक होते हैं, लेकिन इन्हें भी सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है.
सच्चाई: अब किसान IPM यानी समेकित कीट प्रबंधन अपनाते हैं. इसमें जैविक उपाय, निगरानी और जरूरत पड़ने पर ही कीटनाशक इस्तेमाल होते हैं. सही समय और सही मात्रा से मधुमक्खियों और फायदेमंद कीड़ों को नुकसान बहुत कम होता है.
सच्चाई: भारत का खाद्य नियामक (FSSAI) तय करता है कि खाने में कितना अवशेष रह सकता है. 2022-2025 में जांचे गए 86,000 सैंपल में 97% सीमा के अंदर पाए गए. धोने, छीलने और पकाने से अवशेष और कम हो जाते हैं.
सच्चाई: कीट और रोगों से फसल बचाने के बिना किसान 30-50% तक उपज खो सकते हैं. इससे उनकी कमाई घटती है और देश की खाने की सुरक्षा भी कमजोर होती है.
क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा कि कंपनियां स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी सभी जानकारी देती हैं. नियामक सब जांच के बाद ही उत्पाद को मंजूरी देते हैं. किसान ट्रेनिंग और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करें, तो नुकसान नहीं होता.
इस स्पष्टीकरण का मकसद है कि किसान और आम लोग सही जानकारी जानें. कीटनाशक का जिम्मेदार इस्तेमाल, किसान प्रशिक्षण और मजबूत नियमों से ही सुरक्षित और असरदार फसल संरक्षण संभव है. गलत अफवाहों से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि सही जानकारी और सतत खेती अपनाना जरूरी है.
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