
महाराष्ट्र के जालना से सांसद कल्याण काले ने केंद्र सरकार से खरीफ सीजन के दौरान नई ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ मोबाइल एप्लिकेशन को अस्थायी रूप से रोकने की मांग की है. उन्होंने कहा कि तकनीकी दिक्कतों और किसानों की सीमित डिजिटल समझ के कारण खाद वितरण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. कल्याण काले ने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा को पत्र लिखकर बताया कि महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में पायलट आधार पर लागू इस ऐप को लेकर किसानों, उर्वरक विक्रेताओं और कृषि सेवा केंद्र संचालकों के बीच गंभीर चिंताएं सामने आई हैं. उन्होंने दावा किया कि ऐप लागू होने के बाद बुकिंग प्रक्रिया के दौरान बार-बार तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं.
सांसद ने कहा कि बड़ी संख्या में किसानों के पास डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का पर्याप्त अनुभव नहीं है, जिससे परेशानी और बढ़ रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐप लागू करने से पहले किसानों और विक्रेताओं को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया.
संसदीय स्थायी समिति (रसायन एवं उर्वरक) के सदस्य कल्याण काले ने कहा कि खरीफ सीजन कृषि उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है और इस दौरान समय पर उर्वरक मिलना जरूरी है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तकनीकी बाधाएं जारी रहीं तो किसानों को जरूरत के समय खाद नहीं मिल पाएगी, जिससे उत्पादन और आय दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
पत्र में सांसद ने मांग की कि मौजूदा खरीफ सीजन तक इस ऐप को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए. साथ ही इस अवधि में तकनीकी कमियों, संचालन संबंधी समस्याओं और विक्रेताओं की शिकायतों की विस्तृत समीक्षा की जाए. उन्होंने सुझाव दिया कि सुधार के बाद इस व्यवस्था को अधिक प्रभावी तरीके से दोबारा लागू किया जाए.
इधर, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार महाराष्ट्र के दक्षिणी हिस्सों में धीमी पड़ने का असर अब देशभर में दिखाई देने लगा है. 4 जून से 18 जून के बीच भारत में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे कई क्षेत्रों में खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है.
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में देश को जहां सामान्य तौर पर 72.2 मिमी वर्षा मिलनी चाहिए थी, वहीं केवल 42.6 मिमी बारिश दर्ज हुई. सबसे अधिक कमी मध्य भारत में देखने को मिली, जबकि पूर्वोत्तर, दक्षिणी प्रायद्वीपीय और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में भी सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. (पीटीआई)