Fertilizer Subsidy: साल की शुरुआत में सरकार का बड़ा फैसला, उर्वरक सब्सिडी को लेकर बदला सिस्टम, पढ़ें डिटेल

Fertilizer Subsidy: साल की शुरुआत में सरकार का बड़ा फैसला, उर्वरक सब्सिडी को लेकर बदला सिस्टम, पढ़ें डिटेल

नए साल की शुरुआत में सरकार ने उर्वरक सब्सिडी को लेकर बड़ा बदलाव किया है. करीब 2 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी अब पूरी तरह डिजिटल सिस्टम से प्रोसेस होगी. इससे भुगतान, निगरानी और पारदर्शिता में क्या बदलाव आएगा, किसानों और कंपनियों को कैसे होगा फायदा, पढ़ें पूरी डिटेल...

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 01, 2026,
  • Updated Jan 01, 2026, 9:36 PM IST

देश की सबसे बड़ी सब्सिडी योजनाओं में शामिल उर्वरक (खाद) सब्सिडी अब पूरी तरह डिजिटल हो गई है. साल 2026 के पहले दिन उर्वरक विभाग ने लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की सालाना सब्सिडी को ऑनलाइन प्रोसेस करने वाली एकीकृत ई-बिल प्रणाली की शुरुआत कर दी है. इस व्यवस्था के लागू होने के बाद खाद कंपनियों के सब्सिडी क्लेम, भुगतान और निगरानी की पूरी प्रक्रिया एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में इस सिस्टम का उद्घाटन किया.

कंंपनियाें के साथ कि‍सानों को भी फायदा

उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया और विकसित भारत के विजन को मजबूती देने वाली है.  नड्डा ने कहा कि उर्वरक सब्सिडी का डिजिटल होना पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा सुधार है, जिसका सीधा फायदा कंपनियों के साथ-साथ किसानों को भी मिलेगा.

ऑनलाइन ट्रैक हो सकेगी प्रक्रिया

उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्र ने कहा कि यह बदलाव केवल कागजी बिल खत्म करने तक सीमित नहीं है. नई प्रणाली से विभाग की पूरी वित्तीय कार्यप्रणाली आधुनिक हो जाएगी. उन्होंने बताया कि अब कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद और सब्सिडी भुगतान तक की प्रक्रिया को एक ही सिस्टम पर ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे निगरानी और नीति निर्माण दोनों आसान होंगे.

हर लेनदेन का रहेगा डिजिटल रिकॉर्ड

इस नई व्यवस्था में उर्वरक विभाग के इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम को वित्त मंत्रालय के पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ दिया गया है. मुख्य लेखा नियंत्रक संतोष कुमार ने कहा कि इस तकनीकी एकीकरण से सभी भुगतान सुरक्षित, ट्रेस योग्य और ऑडिट के लिहाज से मजबूत हो जाएंगे. हर लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी.

सब्सिडी भुगतान में देरी का झंझट होगा खत्म

संयुक्त सचिव वित्त एवं लेखा मनोज सेठी ने बताया कि ई-बिल सिस्टम से सब्सिडी भुगतान में होने वाली देरी खत्म होगी. अब साप्ताहिक आधार पर सब्सिडी समय पर जारी की जा सकेगी. खाद कंपनियां ऑनलाइन ही अपने क्लेम जमा कर सकेंगी और रियल टाइम में भुगतान की स्थिति देख सकेंगी.

नहीं लेना पड़ेगा मैन्‍युअल फॉलोअप

इससे दफ्तरों के चक्कर और मैन्युअल फॉलोअप से राहत मिलेगी. कार्यक्रम में उर्वरक विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. एनआईसी द्वारा विकसित इस प्रणाली को मजबूत वित्तीय नियंत्रण और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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