मौसम में उतार-चढ़ाव से बढ़ा गेहूं–सरसों पर रोगों का खतरा, कृषि वैज्ञानिकों ने बताए ये 10 समाधान

मौसम में उतार-चढ़ाव से बढ़ा गेहूं–सरसों पर रोगों का खतरा, कृषि वैज्ञानिकों ने बताए ये 10 समाधान

मौसम में उतार-चढ़ाव और नमी बढ़ने से गेहूं और सरसों की फसलों पर फंगल और वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पीला रतुआ, लीफ ब्लाइट, पाउडरी मिल्ड्यू, व्हाइट रस्ट और डाउनी मिल्ड्यू की पहचान और नियंत्रण के लिए विशेष सलाह जारी की है. सही समय पर फफूंदनाशकों का प्रयोग, संतुलित खाद और नियमित निगरानी से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.

Gehu Gyan Wheat Price Madhya PradeshGehu Gyan Wheat Price Madhya Pradesh
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Feb 20, 2026,
  • Updated Feb 20, 2026, 1:32 PM IST

मौसम में बदलाव के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव और नमी बढ़ने के साथ, खेती के जानकारों ने किसानों को अलर्ट रहने और अपनी गेहूं और सरसों की फसलों को बीमारियों के हमले से बचाने के लिए समय पर कदम उठाने की सलाह दी है. खेती विभाग के जानकारों के अनुसार, बदलते मौसम की वजह से खड़ी फसलों में फंगल और वायरल बीमारियों के लिए अच्छा माहौल बन जाता है. 

गेहूं में, किसानों को पीला रतुआ (येलो रस्ट), लीफ ब्लाइट और पाउडरी मिल्ड्यू के लक्षणों के लिए खेतों पर रेगुलर नजर रखने की सलाह दी गई है. जल्दी पता लगाने और बताए गए फंगसनाशकों का समय पर स्प्रे करने से इन्फेक्शन को फैलने से रोकने और पैदावार को बचाने में मदद मिल सकती है.

खाद का संतुलित इस्तेमाल जरूरी

इसी तरह, सरसों उगाने वालों को व्हाइट रस्ट और डाउनी मिल्ड्यू जैसी बीमारियों पर कड़ी नजर रखने के लिए कहा गया है, जो समय पर कंट्रोल न करने पर पत्तियों और फलियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. जानकार खेती की गाइडलाइन के अनुसार खेत की सही सफाई, खाद का संतुलित इस्तेमाल और जरूरत के हिसाब से कीटनाशकों का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.

किसानों को बादल वाले मौसम में ज्यादा सिंचाई से बचने के लिए भी कहा गया है, क्योंकि ज्यादा नमी से बीमारी तेजी से बढ़ सकती है. उन्हें सलाह दी गई है कि कोई भी केमिकल इस्तेमाल करने से पहले लोकल खेती के अधिकारियों से सलाह लें ताकि सही डोज और इस्तेमाल का तरीका पक्का हो सके.

वैज्ञान‍िकों ने बताया क‍ि पीला रतुआ के लिए 10-20 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त है. 25 डिग्री सेल्सियस तापमान से अध‍िक होने पर रोग का  फैलाव नहीं होता. भूरा रतुआ के लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ नमी युक्त जलवायु जिम्मेदार है. जबक‍ि काला रतुआ के लिए 20 डिग्री सेल्सियस से उपर तापमान ओर नमी रहित जलवायु जिम्मेदार है. इतना तापमान हो तो गेहूं की फसल को लेकर सतर्क रहें.

पीला रतुआ से कैसे बचाएं गेहूं की फसल

  1. गेहूं की फसल को पीला रतुआ रोग से बचाने के लिए समय रहते फफूंदनाशक दवा का प्रयोग कर लेना चाहिए. 
  2. पीला रतुआ रोग लगने पर 500 ग्राम जिंक सल्फेट, दो किलोग्राम यूरिया को 100 लीटर पानी में मिलाकर पौन एकड़ खेत में छिड़काव करें. ऐसा कर फसल को बचाया जा सकता है. 
  3. पीला रतुआ होने पर प्रोपकोनाजोल 200 मिलीलीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर स्प्रे करें. 
  4. पीला रतुआ लगने पर मैन्कोजेब या दीथाने एम45 नामक दवाई खेत में डाले. प्रकोप कम नहीं होने पर 10 दिनों के अंदर फिर इस दवा का इस्तेमाल करें. 
  5. यदि पीला रतुआ बीमारी लगी फसल पर दवा का छिड़काव करने के दौरान आपके कपड़ों पर पीला रंग लग गया है तो उन्हीं कपड़ों में खेतों में लगी दूसरी फसल में न जाएं. ऐसा करने पर दूसरा खेत भी पीला पाउडर लगने से संक्रमित हो सकता है.
  6. पीला रतुआ का जल्द इलाज न किया जाए तो यह काले रंग का हो जाता है और पौधे को सूखा देता है. यदि कहीं ऐसा दिखाई दे तो अपने नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क करके आप उस पर नियंत्रण कर सकते हैं.
  7. रतुआ रोग पहले खेत में 10-15 पौधों पर एक गोल दायरे के रूप में शुरू होकर बाद में पूरे खेत में फैलता है. इसल‍िए क‍िसान अपने खेतों की नियमित रूप से निगरानी करते रहें. पीले रतुआ रोग की पुष्ट‍ि होते ही दवा का इस्तेमाल करें.
  8. यदि किसी खेत में पीला रतुआ दिखाई देता है तो अगले साल उस गेहूं के बीज का प्रयोग बुवाई में न करें. 
  9. पीला रतुआ बीमारी अधिकतर एचडी 2967, एचडी 2851, डब्ल्यू एच 711 गेहूं की किस्मों में अधिक लगने की संभावना रहती है. ऐसे में इन किस्मों की बिजाई कर रखी है तो विशेष ध्यान रखें. 
  10. गेहूं की डब्लू एच 157, डब्लू एच 283, डब्लू  एच 542, डब्लू एच 896 किस्मों में पीला रतुआ कम लगता है. अगले साल बिजाई के लिए इन किस्मों पर गौर कर सकते हैं.

MORE NEWS

Read more!