बिहार में भीषण गर्मी से धान की नर्सरी पर संकट, 42-43°C तापमान के बीच जानें वैज्ञानिकों की सलाह

बिहार में भीषण गर्मी से धान की नर्सरी पर संकट, 42-43°C तापमान के बीच जानें वैज्ञानिकों की सलाह

बिहार में बढ़ते तापमान के बीच धान की नर्सरी तैयार करना किसानों के लिए चुनौती बन गया है. कृषि वैज्ञानिकों ने सही समय, सिंचाई और तकनीक अपनाने की सलाह दी है.

DSR तकनीक से धान की रोपाईDSR तकनीक से धान की रोपाई
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • पटना,
  • May 21, 2026,
  • Updated May 21, 2026, 3:58 PM IST

बिहार में मई महीने के दूसरे पखवाड़े में अचानक बढ़ी भीषण गर्मी ने जनजीवन के साथ-साथ खेती-किसानी को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है. महीने की शुरुआत में जहां लोगों को हल्की ठंड का एहसास हो रहा था, वहीं अब तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और कई जिलों में हीट वेव जैसी स्थिति बन गई है.

कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, छपरा सहित कई जिलों में पारा 40 से 44 डिग्री के बीच दर्ज किया जा रहा है. हालात इतने गंभीर हैं कि लोग सुबह 9 बजे के बाद केवल जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं. इसी बीच खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ किसान धान की नर्सरी डालने की तैयारी में जुट गए हैं, लेकिन बढ़ती गर्मी ने उनके सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है.

‘धान के कटोरे’ में भी तपिश का असर

मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 5 से 7 दिनों से बिहार के कई जिलों में तापमान लगातार 40 डिग्री से ऊपर बना हुआ है. कैमूर, रोहतास, भोजपुर और बक्सर जैसे जिलों को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, लेकिन यहां भी तापमान 42 से 43 डिग्री के आसपास पहुंच गया है. ऐसे हालात में किसान 25 मई से धान की नर्सरी डालने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन तेज धूप और गर्म हवाएं नर्सरी के लिए खतरा बन सकती हैं.

नर्सरी के लिए कई डिग्री ज्यादा गर्मी

कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) भोजपुर के पूर्व प्रमुख और कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार द्विवेदी बताते हैं कि धान की नर्सरी के लिए आदर्श तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए. लेकिन वर्तमान में तापमान इससे 7 से 8 डिग्री अधिक है, जो अंकुरण और पौधों की वृद्धि पर नकारात्मक असर डाल सकता है.

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

डॉ. द्विवेदी ने किसानों को धान की नर्सरी सुरक्षित रखने के लिए कुछ अहम सुझाव दिए हैं. नर्सरी डालने के बारे में कहा है कि संभव हो तो बाग-बगीचे या पेड़ों के आसपास नर्सरी तैयार करें. इससे तापमान का असर कम होगा. नर्सरी हमेशा शाम के समय डालें क्योंकि दिन की तेज धूप से बचाव जरूरी है. सिंचाई भी शाम या सुबह जल्दी करें क्योंकि दोपहर में पानी देने से पौधों को नुकसान हो सकता है.

नर्सरी डालने से पहले खेत का उपचार जरूरी

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, अधिक तापमान में नर्सरी डालने से पहले खेत की सही तैयारी बेहद जरूरी है. 3 डिसमिल जमीन के लिए 1 से 2 किलो 60% पोटाश (लाल पोटाश), 5 टोकरी सड़ा गोबर खाद, 300 ग्राम कार्बोफ्यूरान 3G, 3 किलो सरसों खली चूर्ण, 1.5 किलो ध्रुवी गोल्ड (टाटा), 2 किलो पोटाश, 1.5 किलो DAP, 1 किलो यूरिया और 250 ग्राम सल्फर को मिलाकर खेत की अच्छी तरह जुताई करें और भरपूर सिंचाई करें, ताकि खाद और दवाएं मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाएं.

कब करें नर्सरी की शुरुआत

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि वाले धान की नर्सरी 25 मई से 31 मई के बीच डालें. मध्यम और कम अवधि वाले धान का बीज 20 जून (आद्रा नक्षत्र) के दौरान डालें. उन्होंने यह भी कहा कि 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो सकती है, जिससे तापमान और बढ़ेगा. इसलिए समय और तकनीक का विशेष ध्यान रखना जरूरी है.

किसानों के सामने दोहरी चुनौती

इस समय बिहार के किसानों के सामने दोहरी चुनौती है- बढ़ती गर्मी और हीट वेव और धान की नर्सरी को सुरक्षित रखना. अगर इस समय सही तरीके से नर्सरी तैयार नहीं की गई, तो इसका असर पूरे खरीफ सीजन के उत्पादन पर पड़ सकता है.

कुल मिलाकर बिहार में बढ़ती गर्मी ने खेती-किसानी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं, खासकर धान की नर्सरी तैयार कर रहे किसानों के लिए. ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है. सही समय, सही तकनीक और मौसम के हिसाब से काम करने पर ही किसान इस चुनौती से पार पाकर बेहतर उत्पादन सुनिश्चित कर सकते हैं.

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