
फरवरी महीने में गर्मी की तपिश शुरू हो गई है. बसंत की गुलाबी ठंड गायब है. ऐसे में गर्मी की सबसे बड़ी मार गेहूं पर देखी जा रही है. किसानों का कहना है कि जो गर्मी मध्य मार्च के बाद होनी चाहिए, वह अभी से ही सताने लगी है. इससे मिल्किंग स्टेज वाले गेहूं के दाने पूरी तरह से विकसित नहीं होकर सिकुड़ने की स्थिति में जा रहे हैं. गेहूं बेल्ट के अधिकांश इलाकों में किसानों की ऐसी शिकायते हैं. इसके अलावा एक बड़ा खतरा और भी है. तापमान अभी सामान्य से ऊपर जा रहा है, जिससे गेहूं पर माहू कीट लगने की आशंका बढ़ गई है.
माहू कीट के संभावित खतरे को देखते हुए पंजाब में कृषि विभाग ने किसानों को सावधान रहने की सलाह दी है. कृषि विभाग ने कहा है कि किसान गेहूं की बराबर निगरानी बनाए रखें क्योंकि इस पर माहू का आक्रमण हो सकता है. ठंड के तुरंत बाद अचानक तापमान बढ़ने से माहू का प्रकोप बढ़ जाता है. इससे पैदावार में भारी कमी देखी जा सकती है.
कृषि विभाग ने अपनी सलाह में कहा है, किसान गेहूं के खेत को चार हिस्सों में बांट दें और फसल का सर्वे करें. इससे पता चल जाएगा कि फसल पर माहू का अटैक है या नहीं. अगर है तो कितना है. मुक्तसर के मुख्य कृषि अधिकारी गुरप्रीत सिंह 'दि ट्रिब्यून' से कहते हैं, अगर गेहूं की एक बाली पर पांच माहू लगे हैं, तो किसान को समझ लेना चाहिए कि कीटनाशक छिड़काव करने का सही समय आ गया है. माहू के प्रकोप से गेहूं के पत्ते पीले पड़ जाते हैं और ऐसे में किसान को तुरंत इसका समाधान करना जरूरी होता है.
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कृषि अधिकारी गुरप्रीत सिंह कहते हैं, तापमान की स्थिति अभी सही है, लेकिन विशेषज्ञ आने वाले दिनों में बढ़ोतरी का अनुमान जता रहे हैं. तापमान बढ़ने से गेहूं की पैदावार घट सकती है. मौजूदा स्थिति में गेहूं में सिंचाई करने की सलाह किसानों को दी गई है. हालांकि ध्यान रखना है कि हवा तेज हो तो सिंचाई नहीं करनी चाहिए. इससे फसल गिर सकती है क्योंकि उसमें बालियां आ गई हैं.
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अगर किसानों को गेहूं की फसल पर पोटैसियम नाइट्रेट का छिड़काव करना है, तो शाम में ही करना चाहिए. इसी के साथ पीला रतुआ रोग लगने की भी आशंका जताई जा रही है. हालांकि पंजाब के कई इलाकों में कृषि विशेषज्ञों ने खेतों का दौरा किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक गेहूं पर रतुआ रोग के संकेत नहीं मिले हैं. किसान फिलहाल इसे लेकर निश्चिंत रह सकते हैं.