Pulses Import: दालों के आयात और MSP पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, किसानों को मिलेगी राहत

Pulses Import: दालों के आयात और MSP पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, किसानों को मिलेगी राहत

दालों के आयात और MSP के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर बड़ा आदेश सामने आया है. अदालत ने केंद्र सरकार से दलहन नीति और पीली मटर के आयात पर सभी संबंधित पक्षों की बैठक कर समाधान तलाशने को कहा है.

Supreme Court Order On Pusles Import and MSPSupreme Court Order On Pusles Import and MSP
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 14, 2026,
  • Updated Mar 14, 2026, 5:58 PM IST

देश में दलहन किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम मिलने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया. किसान महापंचायत की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार को संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने और उसकी रिपोर्ट अदालत के सामने रखने के निर्देश दिए हैं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने रिट याचिका संख्या 911/2025 की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 8 मई 2026 की तारीख तय की है. अदालत ने कहा कि देश में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी नीतिगत कदमों पर विचार किया जाए.

सरकार की नीति और नीयत पर उठाए सवाल

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने के मकसद से छह वर्ष का कार्यक्रम "मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज" शुरू किया है, जिसके लिए 11400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इस योजना का मकसद MSP आधारित खरीद व्यवस्था को मजबूत करना भी बताया गया है. लेकिन, दलहन आयात से जुड़ी नीति कई मामलों में सरकार की इस नीति से मेल नहीं खाती, जिससे किसानों को नुकसान होता है.

'आयात शुल्‍क जीरो करने से किसानों को हुआ नुकसान'

किसान महापंचायत की याचिका के अनुसार, सरकार ने एक समय पीली मटर की दाल के आयात पर शुल्क शून्य कर दिया था. इससे देश में बड़ी मात्रा में सस्ती आयातित दाल आने लगी. इसके कारण घरेलू बाजार में चना, अरहर जैसी प्रमुख दलहन फसलों के दाम दबाव में आ गए और कई जगह किसानों को MSP से कम कीमत पर अपनी उपज बेचने को मजबूर होना पड़ा.

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. उन्‍होंने कहा कि सस्ती आयातित दाल के कारण भारतीय दलहन किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और उन्हें सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

कृषि मंत्रालय ने खाद्य-उपभोक्ता मंत्रालय से की थी यह मांग

किसान महापंचायत ने अदालत को बताया कि हालांकि, केंद्रीय कृषि मंत्री ने भी इस विषय को गंभीर मानते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री को पत्र लिखकर पीली मटर पर आयात शुल्क बढ़ाने का सुझाव दिया था. उन्होंने कहा था कि पीली मटर की लैंडिंग कीमत भारत में प्रमुख दलहनों की MSP मंडी कीमतों से काफी कम है. इसलिए घरेलू किसानों के हितों की रक्षा के लिए इस पर लगभग 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की जरूरत है.

2024 के बाद रिकॉर्ड स्‍तर पर दालों का आयात 

अदालत के सामने यह भी बताया गया कि भारत में 2024 के बाद से दलहन का आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है. इससे देश के दलहन उत्पादक किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है. अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए सरकार से कहा है कि वह सभी संबंधित पक्षों के साथ चर्चा करे और उसके निष्कर्ष अदालत को बताए.

बैठक कर पक्षों से बातचीत करे सरकार

वहीं,अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि इस मुद्दे पर बैठक आयोजित कर दलहन किसानों, नीति से जुड़े पक्षों और अन्य संबंधित पक्षों के विचारों को भी शामिल किया जाए. इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए.

किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के साथ अधिवक्ता नेहा राठी, सौम्या कुमारी, काजल गिरी और प्रतीक यादव अदालत में मौजूद थे. वहीं, केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमन के साथ अधिवक्ता गुरमीत सिंह मक्कड़, अमन झा, अश्वनी भारद्वाज और वरद किलोर अदालत में पेश हुए.

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