Rajasthan: धौलपुर में मॉनसूनी बादलों से बरसी आफत, बाजरा, तुर और मूंग की फसल चौपट

Rajasthan: धौलपुर में मॉनसूनी बादलों से बरसी आफत, बाजरा, तुर और मूंग की फसल चौपट

कृषि विभाग और राजस्व विभाग के मुताबिक धौलपुर जिले में 76 हजार 185 हेक्टेयर कृषि भूमि है जिसमें बाजरा 74 हजार 865 हेक्टेयर, तिल 914 हेक्टेयर, धान सौ हैक्टेयर, ज्वार 15 हेक्टेयर, मक्का 14 हेक्टेयर, तुर 82 हेक्टेयर, मूंग दस हेक्टेयर, उड़द 46 हेक्टेयर, चॉवला 16 हेक्टेयर, मूंगफली 22 हेक्टेयर, गन्ना पांच हेक्टेयर और ग्वार 96 हेक्टेयर में बुवाई हुई है. धौलपुर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ.हब्बल सिंह ने बताया कि धौलपुर जिले में बाजरा मुख्य फसल है और दूसरे नंबर पर तिल है.

बारिश से फसल का भारी नुकसानबारिश से फसल का भारी नुकसान
क‍िसान तक
  • Dholpur,
  • Sep 27, 2024,
  • Updated Sep 27, 2024, 7:24 PM IST

राजस्थान के धौलपुर जिले में इस मॉनसूनी सीजन में बादलों से बरसी राहत ने खरीफ की फसल को चौपट कर दिया है. 44 साल बाद ऐसी बारिश देखी गई जिससे जिले के सात बांध,नदी, तालाब, पोखर और खेत पानी से लबालब हो गए हैं. मॉनसूनी सीजन में जिले में 650 एमएम बारिश दर्ज की जाती है. जिसके एवज में अब तक एक हजार 124.88 एमएम बारिश हो चुकी है. इस बार हुई बारिश ने खेत खलिहान को तालाब के रूप में तब्दील कर दिया है. खेतों में खड़ी खरीफ की करीब 60 फीसदी फसल बारिश के पानी में डूब जाने से नष्ट हो चुकी है. इस बार इंद्र देवता द्वारा बादलों से बरसाई गई राहत ने किसानो को अब संकट में डाल दिया है कि वह क्या करें और क्या न करें. 

किसानों ने इस सीजन में कड़ी मेहनत कर और महंगे खाद बीज डाल कर खरीफ की फसल को मुकाम तक पहुंचाया था. लेकिन इस बार हुई रिकार्ड तोड़ बारिश की मार से किसान से सहम गया है. बारिश से फसल खराबे को लेकर किसान सरकार की तरफ उम्मीद लगा रहा है. सरकार को नष्ट हुई फसल का सर्वे कराना चाहिए. सर्वे के बाद किसानों को उचित मुआवजा सरकार देगी तभी किसान को राहत मिलेगी, अन्यथा किसान फिर से गर्त में चला जाएगा. 'आजतक' की टीम ने ग्रामीण अंचलों में जाकर हालातों का जायजा लिया तो गांवों में तस्वीर चौंकाने वाली सामने आई. जिन खेतों में खरीफ की फसल खड़ी हुई है, वो बारिश के पानी में डूबी हुई मिली. फसल के साथ पशुओं का चारा भी पानी में डूबा हुआ मिला. जिधर देखो उधर खेतों में सिर्फ पानी ही दिखाई दे रहा था. खेत जलमग्न होने से जिले के सैपऊ, बसेड़ी और राजाखेड़ा उप खंड में करीब 60 फीसदी फसल नष्ट हो चुकी है.

फसलों का भारी नुकसान

पानी से फसल के तने, बाली पूरी तरह नष्ट हो गए हैं. बालियां तो पानी से सड़ गई हैं. साथ ही जिन किसानो ने खेतों में खरीफ की फसल के साथ नकदी फसल बोई थी, वो भी पानी में डूबने से नष्ट हो चुकी हैं. जिले में 95 फीसदी बाजरा की बुवाई हुई है और पांच फीसदी में तिल, तुर, मूंग, मोठ, ज्वार, दलहन, मक्का, धान आदि बुवाई की जाती है.

किसान अजीत परमार, देवा राजपूत, उमेश परमार, धीरेंद्र सिंह परमार, हीरा सिंह, मंजू, गुड्डी ने 'आजतक' की टीम को बताया कि इस बार हुई बारिश ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया है. खेतों में खड़ी खरीफ की फसल, जिसमें बाजरा, तुर, मूंग, मोठ, ज्वार, दलहन, मक्का, धान और सब्जी की नकदी फसल पानी में डूब जाने से नष्ट हो चुकी है. साथ ही पशुओं का चारा भी पानी में डूब जाने से ख़राब हो गया है. किसानों ने बताया कि खेतों में करीब दो से तीन फ़ीट पानी अभी भी भरा हुआ है जिससे आगामी रबी की फसल की भी बुवाई के आसार नजर नहीं आ रहे हैं क्योकि खेतों में भरा पानी अभी हाल ही में सूखने वाला नहीं है.

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किसानों ने बताया कि खेतों में मेहनत कर फसल को उगाकर तैयार किया था. लेकिन बारिश ने अरमानों पर पानी फेर दिया है. उनके पास फसल के अलावा दूसरा जरिया आजीविका का पशुपालन रह जाता है. लेकिन चारा बर्बाद होने से आगामी दिनों में पशु पालने में भी संकट का सामना करना पड़ेगा. किसानों ने बताया कि गांव में बाढ़ जैसे हालात बारिश थमने के बाद भी बने हुए हैं. लेकिन प्रशासन ने कोई भी राहत नहीं पहुंचाई है. किसानों ने बताया कि गांव में कई मकान भी गिर गए हैं. लेकिन जो भी अधिकारी देखने आए उन्होंने ना तो पानी की निकासी के इंतजाम किए और ना ही कोई राहत पहुंचाई. किसानों ने बताया कि कैसे परिवार का पालन पोषण करें और अभी तक फसल नुकसान का सर्वे करने के लिए कोई भी नहीं आया है. किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि ख़राब हुई फसल का सर्वे करा कर मुआबजा दिलाया जाए और खेतों से पानी निकालने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए. साथ ही जो मकान गिर गए हैं उनको भी मुआवजा दिया जाए.

कृषि विभाग ने क्या कहा?

कृषि विभाग और राजस्व विभाग के मुताबिक धौलपुर जिले में 76 हजार 185 हेक्टेयर कृषि भूमि है जिसमें बाजरा 74 हजार 865 हेक्टेयर, तिल 914 हेक्टेयर, धान सौ हैक्टेयर, ज्वार 15 हेक्टेयर, मक्का 14 हेक्टेयर, तुर 82 हेक्टेयर, मूंग दस हेक्टेयर, उड़द 46 हेक्टेयर, चॉवला 16 हेक्टेयर, मूंगफली 22 हेक्टेयर, गन्ना पांच हेक्टेयर और ग्वार 96 हेक्टेयर में बुवाई हुई है. धौलपुर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ.हब्बल सिंह ने बताया कि धौलपुर जिले में बाजरा मुख्य फसल है और दूसरे नंबर पर तिल है. तुर, मूंग, उड़द, धान और अन्य खरीफ की फसलों का एरिया बहुत कम है. जिले में बाजरा की 74 हजार 865 हेक्टेयर और तिल की 914 हेक्टेयर में बुवाई हुई है. जिले में बारिश का एवरेज 650 एमएम है और अबकी बार ज्यादा बारिश हुई है जो निचले इलाके हैं वहां फसलों का नुकसान हुआ है. 

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जिले के सैपऊ और बसेड़ी उप खंड में फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. राजखेड़ा में एरिया कम है लेकिन यहां भी करीब 60 फीसदी नुकसान हुआ है. सरमथुरा उप खंड में नुकसान नहीं है क्योंकि यहां से पानी बह कर आगे चला जाता है और यहां अच्छी फसल है.सैपऊ उप खंड में करीब 1895 हेक्टेयर, बसेड़ी उप खंड में करीब साढ़े तीन हजार हैक्टेयर, राजाखेड़ा में करीब सवा सौ हैक्टेयर खरीफ की फसल नष्ट हुई है. जिले में करीब पचास से 60 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है. जिले में जहां जहां जलभराव है वहां वहां खरीफ की फसल का नुकसान हुआ है. जिले में 95 फीसदी बाजरा की बुवाई होती है जिसमें ज्यादा नुकसान है.(उमेश कुमार की रिपोर्ट)

 

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