प्याज की बर्बादी पर ब्रेक: पूसा रिद्धि किस्म से 35% तक बढ़ी उपज, किसानों को मिला बेहतर दाम

प्याज की बर्बादी पर ब्रेक: पूसा रिद्धि किस्म से 35% तक बढ़ी उपज, किसानों को मिला बेहतर दाम

रबी प्याज की बढ़ती पैदावार और स्टोरेज की समस्या का समाधान बनी पूसा रिद्धि प्याज किस्म. ICAR के सहयोग से राजस्थान में किसानों ने 25–35% अधिक उपज, बेहतर भंडारण और प्रति बीघा ₹30,000 तक मुनाफा हासिल किया.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 15, 2026,
  • Updated Jan 15, 2026, 6:55 PM IST

प्याज और लहसुन दुनिया भर में भोजन और औषधीय लाभों के लिए उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण फसलें हैं. भारत में, प्याज की कटाई तीन मौसमों में होती है: खरीफ (अक्टूबर-नवंबर, 20%), लेट खरीफ (फरवरी-मार्च, 20%), और रबी (अप्रैल-मई, 60%). खरीफ और लेट खरीफ प्याज की खपत अधिक मांग के कारण जल्दी हो जाती है, जबकि रबी प्याज, जिसकी कटाई बड़ी मात्रा में होती है, बाजार में बड़ी तादाद में उसकी सप्लाई आती है.

इस प्याज की अधिक मात्रा होने के कारण इसे स्टोर करने की जरूरत होती है. इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जाता है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि स्टोरेज की जरूरत को देखते हुए प्याज के उत्पादन और उसके बल्ब की क्वालिटी को बढ़ाने पर खास ध्यान देना होगा.

कैसे बढ़ेगा प्याज का उत्पादन?

प्याज का उत्पादन बढ़ने के साथ अगर बल्ब की क्वालिटी बेहतर की जाए तो सड़न की समस्या से निजात मिलेगी. किसानों की बर्बादी कम होगी और उन्हें उपज का सही रेट मिलेगा. ऐसा देखा गया है कि भारत की औसत प्याज उपज 18 टन/हेक्टेयर है, जो खराब बीज की क्वालिटी, कीटों, बीमारियों और मौसम के तनाव जैसे फैक्टर के कारण है. इस तरह की समस्या दूसरे प्याज उगाने वाले देशों में कम है.  फसल प्रबंधन और स्टोरेज में सुधार से प्याज की उपज बढ़ सकती है और रबी प्याज की कीमतों को स्थिर किया जा सकता है.

जयपुर में पूसा रिद्धि की टेस्टिंग

सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी एसेसमेंट एंड ट्रांसफर, ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, और ICAR-कृषि विज्ञान केंद्र, चोमू के मिलेजुले प्रयासों से प्याज के क्षेत्र में एक बड़ा काम किया गया है. इसके अंतर्गत रबी 2023-24 के दौरान जयपुर के आछोजई गांव में पूसा रिद्धि प्याज किस्म की जानकारी दी गई. खेतों में सफल डेमो दिए जाने के बाद किसानों ने इस किस्म को अपनाया, जो कॉम्पैक्ट, गहरे लाल रंग की और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है. 

अधिक उपज देती है ये किस्म

दरअसल, 2013 में प्याज की इस खास किस्म को दिल्ली और NCR के लिए जारी किया गया था. इसकी सफलता को देखते हुए अन्य राज्यों में भी इसकी खेती शुरू की गई. राजस्थान भी इसमें शामिल हो गया. इस किस्म ने राजस्थान में अच्छी-खासी गोलाई और 70-100 ग्राम के बल्ब वजन के साथ बेहतर उपज दिया है. अपनी तीखेपन, भंडारण और निर्यात के लिए उपयुक्त, और 32 टन/हेक्टेयर की औसत उपज के लिए जानी जाने वाली इस किस्म ने बहुत अच्छे रिजल्ट दिखाए हैं. प्याज की खेती की बारीकियां जानने के बाद, किसानों ने 33.5 टन/हेक्टेयर की औसत उपज हासिल की, जो पिछली फसलों की तुलना में 25-35% अधिक है.

प्याज से बढ़ेगी कमाई

पूसा रिद्धि प्याज किस्म ने स्थानीय किस्मों की तुलना में बेहतर उपज दिया है, जिसमें अधिक उपज और अधिक बाजार मूल्य है. इसमें बहुत अच्छी भंडारण की क्वालिटी भी है. रिटर्न के मामले में, किसानों ने प्रति बीघा (1,000 वर्ग मीटर) ₹25,000 से ₹30,000 के बीच कमाई की, जिसमें फायदा-लागत अनुपात 2.5 से 3.5 तक रहा. इसकी सफलता के कारण, गांव के सभी किसानों ने इस साल इस किस्म की ज़ोरदार मांग की है.

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