हैदराबाद में पहला अंतरराष्ट्रीय मक्का सम्मेलन शुरू, अगले दशक में 750 लाख टन मक्का उत्पादन का लक्ष्य

हैदराबाद में पहला अंतरराष्ट्रीय मक्का सम्मेलन शुरू, अगले दशक में 750 लाख टन मक्का उत्पादन का लक्ष्य

हैदराबाद के JD कन्वेंशन सेंटर में 'बदलती दुनिया में भोजन, पशु आहार, चारे, ईंधन और स्थिरता के लिए मक्का क्रांति' विषय पर पहले अंतर्राष्ट्रीय मक्का सम्मेलन (M4FS) की शुरुआत हुई है. 2 से 4 नवंबर 2026 तक चलने वाले इस सम्मेलन में वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं ने भारत में मक्का उत्पादन को अगले दशक में बढ़ाकर 75 मिलियन टन (750 लाख टन) करने और पारंपरिक '4F' दृष्टिकोण को '5F' तक विस्तारित करने पर जोर दिया है. इस दौरान अधिक उपज देने वाली किस्मों, उन्नत बीज प्रणालियों और टिकाऊ वैल्यू चेन के विकास पर व्यापक चर्चा की गई.

First International Maize Conference M4FS 2026First International Maize Conference M4FS 2026
क‍िसान तक
  • हैदराबाद,
  • Nov 02, 2026,
  • Updated Nov 02, 2026, 5:57 PM IST

हैदराबाद के JD कन्वेंशन सेंटर में 'बदलती दुनिया में भोजन, पशु आहार, चारे, ईंधन और स्थिरता के लिए मक्का क्रांति' (M4FS) विषय पर पहले अंतरराष्ट्रीय मक्का सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया है. सम्मेलन में भारत के मक्का उत्पादन को अगले दशक में 75 मिलियन टन तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है.

सम्मेलन का उद्देश्य और उद्घाटन

हैदराबाद में आयोजित इस तीन दिवसीय (2 से 4 नवंबर 2026) अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, कृषि संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इसका मुख्य उद्देश्य मक्का अनुसंधान, उत्पादकता, और मूल्य-श्रृंखला (value-chain) के विकास को गति देना है. इस दौरान अधिक उपज देने वाली किस्मों, उन्नत बीज प्रणालियों, पोषण गुणवत्ता और संसाधनों के कुशल उपयोग पर गहन मंथन किया गया.

प्रमुख विचार और मक्का उत्पादन के लक्ष्य

'मेज टेक्नोलॉजिस्ट्स Association of India' (MTAI) के अध्यक्ष डॉ. एच. एस. जाट ने स्वागत भाषण में कृषि परिवर्तन में मक्का के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया. वहीं, DARE के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. लेट. जाट ने बताया कि भारत में मक्का का उत्पादन लगभग 55 मिलियन टन तक पहुंच गया है, और अगले दशक में इसे बढ़ाकर 75 मिलियन टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

डॉ. जाट ने पारंपरिक '4F' (भोजन, पशु आहार, चारा और ईंधन) के दृष्टिकोण को किसानों को केंद्र में रखते हुए '5F' तक विस्तारित करने पर जोर दिया. इसके अलावा, उपज के अंतर (yield gaps) को पाटने के लिए 'सिस्टम-साइंस' दृष्टिकोण अपनाने और सार्वजनिक क्षेत्र में हाइब्रिड बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की वकालत की गई.

विशेषज्ञों के सुझाव और तकनीकी नवाचार

ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव ने पिछले पांच वर्षों में 329 मक्का हाइब्रिड के विकास का उल्लेख करते हुए 'AICRP on Maize' को और मजबूत करने का आह्वान किया. मुख्य अतिथि और DARE के पूर्व सचिव डॉ. आर. एस. परोदा ने उन्नत प्रजनन तकनीकों, जर्मप्लाज्म संरक्षण और एफ्लाटॉक्सिन के प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया.

सम्मेलन में बायर क्रॉप साइंस की डॉ. रेनाटा बोलोग्नीस, CIMMYT के डॉ. हमेश गथाला, और PJTAU के डॉ. बलराम मराठी ने भी टिकाऊ खेती, मशीनीकरण और कम लागत वाले कृषि तरीकों पर अपने विचार साझा किए.

यह सम्मेलन भारत में मक्का क्षेत्र को उत्पादक, लाभदायक और टिकाऊ बनाने के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार कर रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और देश की खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा दोनों को सुदृढ़ किया जा सके.

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