
भारत में इस साल सरकारी गेहूं खरीद ने एक नया रिकॉर्ड बना दिया है. सरकार ने पहले गेहूं खरीद का लक्ष्य 35.54 मिलियन टन रखा था, लेकिन 21 जून तक यह खरीद बढ़कर 35.76 मिलियन टन तक पहुंच गई है. यह पिछले साल की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है. पिछले वर्ष इसी समय में 29.95 मिलियन टन गेहूं की खरीद हुई थी. इस बार कई राज्यों में किसानों से अच्छी मात्रा में गेहूं खरीदा गया, जिससे कुल आंकड़ा लक्ष्य से भी आगे निकल गया.
इस साल देश में गेहूं का उत्पादन भी बढ़ने का अनुमान लगाया गया है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, इस साल गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 120.66 मिलियन टन तक पहुंच सकता है. यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 2.3 प्रतिशत अधिक है. उत्पादन बढ़ने के कारण सरकार ने भी खरीद लक्ष्य को दो बार बढ़ाया. पहले इसे 30.3 मिलियन टन से बढ़ाकर 34.5 मिलियन टन किया गया और बाद में कुछ राज्यों की मांग पर और बढ़ाया गया.
इस साल राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में गेहूं की अच्छी खरीद हुई है. राजस्थान में इस बार रिकॉर्ड खरीद दर्ज की गई है. उत्तर प्रदेश में भी पिछले साल की तुलना में दोगुने से अधिक गेहूं खरीदा गया है. बिहार में भी खरीद में बड़ा उछाल देखा गया है.
उत्तर प्रदेश में इस साल 2.16 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा लगभग आधा था. राजस्थान में 2.71 मिलियन टन गेहूं की खरीद हुई, जो पिछले साल से अधिक है. बिहार में भी खरीद 40,364 टन तक पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में दोगुनी से ज्यादा है.
पंजाब में इस साल 12.16 मिलियन टन गेहूं की खरीद हुई है, जो पिछले साल से थोड़ी अधिक है. यहां खरीदी गई अधिकांश गेहूं की गुणवत्ता में थोड़ी कमी रही, क्योंकि कुछ जिलों में मौसम खराब होने से फसल पर असर पड़ा था.
मध्य प्रदेश में इस साल 10.44 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है. वहीं हरियाणा में भी लगभग 8.12 मिलियन टन गेहूं की खरीद हुई, जो तय लक्ष्य से भी अधिक है.
इस साल सरकार ने गेहूं खरीद में कुछ गुणवत्ता मानकों में ढील दी, जिससे अधिक किसानों से गेहूं खरीदा जा सका. कुल खरीदे गए गेहूं में लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा ऐसे गेहूं का है जो ढीले गुणवत्ता मानकों के तहत खरीदा गया है. इसका फायदा किसानों को मिला और उनकी फसल आसानी से सरकारी खरीद में शामिल हो सकी.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास इस समय गेहूं का बड़ा स्टॉक मौजूद है. जून की शुरुआत तक यह स्टॉक 53.41 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो तय बफर नॉर्म से काफी अधिक है. इसका मतलब है कि देश में गेहूं की आपूर्ति फिलहाल मजबूत स्थिति में है.
कुछ राज्यों ने गेहूं खरीद की अवधि बढ़ाने की मांग भी की थी, ताकि ज्यादा किसानों की फसल खरीदी जा सके. खासकर राजस्थान में खरीद अवधि को लेकर चर्चा हुई है. राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वय से यह सुनिश्चित किया गया कि किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत न हो.
इस पूरी प्रक्रिया से किसानों को बड़ा लाभ मिला है. उन्हें अपनी फसल का सही दाम मिला और सरकारी खरीद केंद्रों के जरिए बड़ी मात्रा में गेहूं की बिक्री संभव हुई. बेहतर उत्पादन और मजबूत खरीद व्यवस्था ने इस साल किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा दोनों को मजबूत किया है.
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