देश में आनाज की बर्बादी पर लगेगा फुल स्टॉप, FCI का 'मिशन साइलो' लॉन्च

देश में आनाज की बर्बादी पर लगेगा फुल स्टॉप, FCI का 'मिशन साइलो' लॉन्च

FCI का 'मिशन साइलो' देश में अनाज की बर्बादी को रोकने की एक बड़ी और आधुनिक मुहिम है. इसके तहत पुराने गोदामों की जगह स्टील की हाई-टेक टंकियां (साइलो) बनाई जा रही हैं, जिनमें नमी और चूहे-सीलन जैसी दिक्कतों से अनाज खराब नहीं होगा. पीपीपी (PPP) मॉडल पर बड़ी कंपनियां इसे मिलकर तैयार कर रही हैं. सबसे खास बात यह है कि इन साइलो में अनाज की बर्बादी बिल्कुल 'जीरो' रही है.

FCI का गेहूं स्टॉक घटा. FCI का गेहूं स्टॉक घटा.
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Jun 04, 2026,
  • Updated Jun 04, 2026, 11:06 AM IST

देश में हर साल कटाई के बाद सही रखरखाव न होने से करीब 1.2 से 1.6 करोड़ टन अनाज बर्बाद हो जाता है. एक ऐसे देश में जहां सरकार करोड़ों किसानों से अनाज खरीदती है और 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को राशन देती है, वहां इतनी बड़ी बर्बादी को रोकना बेहद जरूरी है. इसी बड़ी चुनौती से निपटने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) देश में स्टील के आधुनिक 'साइलो'  में अनाज की विशाल और सुरक्षित टंकियां बना रहा है. यह दुनिया का सबसे बड़ा अनाज भंडारण आधुनिकीकरण कार्यक्रम है, जिसका मकसद पुरानी पारंपरिक तकनीकों को हटाकर अनाज को सड़ने और खराब होने से बचाना है.

क्यों खास हैं ये साइलो?

पारंपरिक गोदामों बोरी वाले गोदामों के मुकाबले इन साइलो में अनाज को सुरक्षित रखने के लिए जबरदस्त तकनीक का इस्तेमाल होता है. इनमें नमी और तापमान को कंट्रोल करने वाले सिस्टम, वेंटिलेशन हवा आने-जाने की सुविधाऔर कंप्यूटर आधारित इन्वेंट्री मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं होती हैं. सारा काम मशीनों से होने के कारण इंसानी हाथ कम लगते हैं, जिससे अनाज के टूटने-फूटने और खराब होने का खतरा न के बराबर हो जाता है. इससे अनाज लंबे समय तक एकदम ताजा बना रहता है और सप्लाई चेन की रफ्तार भी बढ़ जाती है.

देश भर में फैलेगा नेटवर्क

इस पूरे प्रोजेक्ट को एफसीआई के 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के तहत देश के 249 ठिकानों पर तैयार किया जा रहा है. इसका लक्ष्य 108 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा अनाज स्टोर करने की क्षमता बनाना है. यह सिर्फ गोदाम बनाने का काम नहीं है, बल्कि पूरे देश में अनाज के ट्रांसपोर्ट और मैनेजमेंट के तरीके को बदलने की एक बड़ी मुहिम है. इस वैज्ञानिक तरीके से न सिर्फ अनाज सुरक्षित रहेगा, बल्कि जरूरत के समय देश के कोने-कोने में और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) यानी राशन की दुकानों तक अनाज बहुत तेजी से पहुंचाया जा सकेगा.

पीपीपी मॉडल पर होगा काम 

चूंकि इस बड़े प्रोजेक्ट में भारी निवेश और आधुनिक तकनीक की जरूरत थी, इसलिए सरकार ने इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलाने का फैसला किया. साल 2021 से अब तक पारदर्शी और कड़े कॉम्पिटिशन के जरिए करीब 60 लाख मीट्रिक टन क्षमता के ठेके (टेंडर) बांटे जा चुके हैं. इस रेस में अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स (28.25 लाख मीट्रिक टन) और लीप इंडिया फूड (18.25 लाख मीट्रिक टन) दो सबसे बड़े नाम बनकर उभरे. इनके अलावा सार ट्रांसपोर्ट, सबीना अरोड़ा कंसोर्टियम, श्री करणी ट्रेडर्स जैसी कई अन्य कंपनियों ने भी अलग-अलग चरणों में टेंडर जीते, जो यह दिखाता है कि इस पूरे काम में किसी एक कंपनी का एकाधिकार नहीं है.

अनाज की बर्बादी में भारी कमी

इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी निष्पक्ष बोली प्रक्रिया और इसके नतीजे हैं. पहले फेज में अडाणी ने बाजी मारी तो दूसरे फेज में लीप इंडिया ने सबसे कम रेट देकर ज्यादा प्रोजेक्ट्स जीते. लेकिन सबसे बड़ी सफलता इसके परफॉर्मेंस में दिखती है. एफसीआई का कहना है जहां पुराने गोदामों में साल 2023-24 में 10,348 टन अनाज बर्बाद हुआ जो घटकर 2025-26 में 2,247 टन रहा वहीं आधुनिक साइलो में अनाज की बर्बादी 'शून्य' रही है. जब देश के लिए अनाज का एक-एक दाना कीमती है, तब ये साइलो भारत की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में गेम-चेंजर  हो सकता है.

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