
रबीनामा: रबी सीजन की शुरुआत हो गई है और खरीफ सीजन समाप्ति की ओर है. यानी एक तरफ फ़सल जहां कट रही है, वहीं दूसरी तरफ़ आगे रबी की कई फ़सलों के लिए खेत तैयारी, जुताई और बुवाई का काम चल रहा है. इसे किसानों के लिए सबसे संवेदनशील समय कह सकते हैं, इसलिए अभी इतने सारे कार्यों का निपटारा तेज़ी से और बेहतर करना एक बड़ी चुनौती है, जिसे कृषि यंत्रों के सहारे बेहद आसान बना सकते हैं. कुछ यंत्र जिनकी क़ीमत आपकी पहुंच में हो और उपयोगिता लगातार हो, उन्हें आप खरीद सकते हैं. या फिर कई यंत्रों को भाड़े पर लेकर अपना काम आसान कर सकते हैं. आज के रबीनामा में जानेंगे खेत तैयारी और रबी फसलों की बुवाई करने वाले आधुनिक कृषि यंत्रो के बारे में.
रोटावेटर 35 हॉर्सपावर या इससे ऊपर के हॉर्सपावर के ट्रैक्टर में संचालित होने वाला उपकरण है. ये मशीन खेत जुताई और खेत को समतल करने में सक्षम है. प्लेन रोटावेटर खरीफ़ की पिछली फ़सल अवशेषों को पूरी तरह से नष्ट करने के साथ-साथ पडलिंग और हरी खाद की फसलों को खेत में मिलाने का काम भी अच्छी तरह से करता है. यह मिट्टी में 06 इंच गहराई तक पहुंच कर फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाता है. इसके जरिए दबाए गए फ़सल अवशेष मिट्टी में मिलकर धीरे-धीरे खाद में बदल जाते हैं. इससे खेत की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है और नमी के संरक्षण में भी मदद मिलती है. इस यंत्र की क़ीमत 80 हज़ार रुपये से शुरू होकर 1.50 लाख तक होती है.
इसी रोटावेटर का एक और रूप जिसे रोटावेटर रोटो टिल ड्रिल कहते हैं, इससे धान, मक्का और गन्ने की कटाई वाले खेतों की जुताई कर बीज बोने का काम असानी किया जा सकता है. इससे समय और ऊर्जा की बचत होती है. इस यंत्र में रोटावेटर और बुवाई मशीन की गहराई अलग-अलग सेट करने का प्रावधान है. इसलिए इसमें दोनों यंत्रों की गहराई को लेकर कोई परेशानी नहीं आती है. इस यंत्र से 30 से 35 प्रतिशत तक समय की बचत और 20 से 25 प्रतिशत तक लागत में कमी भी संभव है. इसकी अनुमानित कीमत लगभग 01 लाख से लेकर 2.5 लाख रुपये तक की होती है.
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इस समय आलू की बुआई का काम चल रहा है और इसमें एक ख़ास मशीन आपकी ज़बर्दस्त मदद कर सकती है. किसानों के लिए आलू की बुवाई बेहद खर्चीला काम है. लेकिन अब ट्रैक्टर खेत में ले जा कर पोटैटो प्लांटर की सहायता से आलू की बवाई का काम कम खर्च में और कम समय में बेहतर तरीके किया जा सकता है. इसके सेमी ऑटोमेटिक यंत्र से आलू की बुवाई करने के लिए इसके हापर में आलू भर दिए जाते हैं. यह हापर पीछे की तरफ से खुला होता है. यंत्र की हर सीट पर एक-एक व्यक्ति बैठा दिया जाता है जो हापर में से आलू उठा कर डिस्क के होल में डालने का काम करते हैं. इस मशीन से एक घंटे में लगभग एक एकड़ में आलू की बुवाई संभव है.
ऑटोमेटिक पोटैटो प्लांटर पोटैटो प्लांटर ऑटोमेटिक वर्जन है. इसमें बिना किसी एक्स्ट्रा व्यक्ति को लगाए ऑटोमेटिक तरीक़े से आलू की बुवाई की जा सकती है. यह यंत्र सेमी ऑटोमेटिक की तुलना में महंगा तो होता ही है, इस मशीन को ट्रैक्टर के साथ भी चलाया जाता है. इसकी दक्षता समान्य पोटैटों प्लांटर से अधिक है. यह मशीन बहुत जल्दी आलू की बुवाई करने में सक्षम है. इसके प्रयोग से कम समय में अधिक क्षेत्रफल में आलू की बुवाई की जा सकती है. साथ ही इसमें बुवाई के साथ उर्वरक का भी खेत में प्रयोग होता है. इस ऑटोमेटिक पोटैटो प्लांटकर की कीमत 01 लाख से लेकर 5.50 लाख तक है. इस तरह के पोटैटों प्लांटर, सोनालिका महिंद्रा, शक्तिमान जैसी बड़ी कंपनियां बनाकर बेचती हैं.
मल्टी क्रॉप प्लांटर से ऐसी फ़सलें जिनमें बीज दर बहुत ही कम या बीज का आकार बड़ा रहता है, साधारण बीज बोने वाली मशीन से इनकी बुआई तरीके से नहीं हो पाती है, इन्हें बोने के लिए इनक्लाइन्ड प्लेट प्लांटर का उपयोग करना ही बेहतर होता है. मल्टी क्रॉप प्लांटर में सीड ड्रिल की तरह लोहे का एक फ्रेम होता है जिस पर कि 06 सीड बॉक्स में फरो ओपनर लगे होते हैं. प्रत्येक बॉक्स में एक बीज गिराने वाली प्लेट लगी होती है. यह डिस्क फरो ओपनर में एक-एक बीज गिराती चलती है, जो कि कूड़ में एक निश्चित दूरी पर गिरता है.
अलग-अलग तरह के बीजों के लिए अलग-अलग प्लेट लगाई जाती है. यानी सरसों, मटर, चना, मक्का, मूंगफली, अरहर, सोयाबीन, चना सभी फसलों के लिए अलग-अलग प्लेट का उपयोग होता है. इस यंत्र की प्लेट की बनावट इस तरह की गई है कि किसी भी फ़सल का बीज उसकी निर्धारित दर के अनुसार ही गिरेगा. इसकी कीमत 01 लाख 25 हजार से लेकर 05 लाख तक है. इसकी कीमत मशीन रो के आधार और बीजों के प्लेट के आधार पर अलग हो सकती है.
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कृषि उपकरण खेती को कम लागत और सरल बनाने के मकसद से तैयार किए जाते हैं ताकि खेती की लागत में कमी लाकर उत्पादन को बढ़ाया जा सके और फसल के नुकसान में कमी लाई जा सके. इन कृषि यंत्रों पर अलग-अलग राज्यों में सब्सिडी का प्रवाधान भी है जिसे अपने जिले के कृषि अधिकारी सम्पर्क कर जानकारी लेकर सब्सिडी लाभ ले सकते हैं.