पहाड़ों में मछली पालन से बढ़ेगी कमाई, ट्राउट किसानों के लिए सरकार बनाएगी नई योजना

पहाड़ों में मछली पालन से बढ़ेगी कमाई, ट्राउट किसानों के लिए सरकार बनाएगी नई योजना

उत्तराखंड नेपाल को ट्राउट मछली निर्यात करने वाला पहला हिमालयी राज्य बन गया है. पिथौरागढ़ में सरकार ने ट्राउट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए पांच साल का रोडमैप तैयार करने पर चर्चा की. योजना में किसानों को बेहतर कीमत, गुणवत्तापूर्ण चारा, कोल्ड स्टोरेज, प्रशिक्षण और नए बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, जिससे उनकी कमाई बढ़ सके.

ट्राउट फार्मिंग से पहाड़ों में रोजगार की नई उम्मीदट्राउट फार्मिंग से पहाड़ों में रोजगार की नई उम्मीद
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Oct 20, 2026,
  • Updated Oct 20, 2026, 3:32 PM IST

उत्तराखंड में ट्राउट मछली पालन को बढ़ावा देने और किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए सरकार ने नई योजना पर काम शुरू किया है. उत्तराखंड नेपाल को ट्राउट मछली निर्यात करने वाला पहला हिमालयी राज्य बन गया है. इसके साथ ही राज्य ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) को भी ट्राउट मछली की आपूर्ति करने की उपलब्धि हासिल की है. इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए 19 अक्टूबर 2026 को पिथौरागढ़ कलेक्ट्रेट में एक समीक्षा बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने की. बैठक में मछली उत्पादन बढ़ाने, किसानों को बेहतर कीमत दिलाने, चारे की उपलब्धता और आने वाले पांच साल में ट्राउट फार्मिंग के विकास पर चर्चा की गई.

पिथौरागढ़ में ट्राउट मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा

पिथौरागढ़ का ठंडा पानी और यहां का मौसम ट्राउट मछली पालन के लिए अनुकूल है. खासकर रेनबो ट्राउट मछली को ठंडे पानी में पाला जाता है. इसलिए उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में यह किसानों की कमाई बढ़ाने का अच्छा साधन बन सकती है. केंद्र सरकार ने देशभर में 34 मत्स्य पालन समूह बनाए हैं, जिनमें पिथौरागढ़ का शीतजल मत्स्य पालन समूह भी शामिल है. इसका उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाना, किसानों को जरूरी सुविधाएं देना और उनके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना है. बैठक में पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगाईं ने जिले में मछली पालन से जुड़ी उपलब्धियों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी मछली का बेहतर दाम दिलाने के लिए बाजार से जोड़ना जरूरी है. साथ ही, मछली से दूसरे खाद्य उत्पाद तैयार करने को बढ़ावा देना चाहिए. जिला प्रशासन ने इस दिशा में मत्स्य पालन विभाग के साथ मिलकर काम करने का भरोसा दिया.

अगले पांच साल के लिए तैयार होगा रोडमैप

बैठक में ट्राउट मछली पालन को आगे बढ़ाने के लिए अगले पांच साल की योजना पर चर्चा हुई. राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बी. के. बेहेरा ने बताया कि मछली पालन को मजबूत बनाने के लिए उत्पादन से पहले और मछली तैयार होने के बाद की व्यवस्थाओं में सुधार करना जरूरी है. मछली पालन शुरू करने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले मछली के बीज और चारे की जरूरत होती है. वहीं, मछली तैयार होने के बाद उसे सुरक्षित रखने, पैक करने, बाजार तक पहुंचाने और बेचने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. इन सुविधाओं में सुधार होने से किसानों को मछली बेचने में आसानी होगी और उनकी कमाई बढ़ सकती है.

मत्स्य पालन विभाग की संयुक्त सचिव गुंजन कृष्णा ने भी नई तकनीक अपनाने और अलग-अलग सरकारी योजनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि मछली पालन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है.

ITBP को ट्राउट की आपूर्ति से खुलेंगे नए बाजार

बैठक में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) को ट्राउट मछली की आपूर्ति बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई. केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के सचिव ने दूसरे हिमालयी राज्यों को भी ITBP और अन्य सशस्त्र बलों को मछली बेचने की संभावनाएं तलाशने का सुझाव दिया. इसके लिए संबंधित विभागों के साथ समझौता किया जा सकता है. ITBP के अपर महानिदेशक संजय कुमार गुंज्याल ने बताया कि सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में भी ITBP को ट्राउट मछली की काफी जरूरत है. इससे इन राज्यों के किसानों को भी अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिल सकता है.

सरकारी संस्थानों को नियमित रूप से मछली की आपूर्ति होने से किसानों को खरीदार तलाशने में मदद मिलेगी. हालांकि, इसके लिए कीमत तय करते समय किसानों की उत्पादन और परिवहन लागत का ध्यान रखना भी जरूरी है.

महंगा चारा और ढुलाई किसानों की बड़ी समस्या

बैठक में ट्राउट पालकों ने अपनी समस्याएं भी सामने रखीं. किसानों ने बताया कि उन्हें मछली का बेहतर दाम नहीं मिल पाता. अच्छी गुणवत्ता वाला चारा महंगा है और उसे समय पर उपलब्ध कराना भी चुनौती है. उन्होंने प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की जरूरत भी बताई. मुनस्यारी के एक ट्राउट किसान ने कहा कि चारे और परिवहन पर काफी खर्च होता है. ऐसे में ITBP को मछली की आपूर्ति के लिए मिलने वाली कीमत उनके हिसाब से कम है. किसानों का कहना है कि लागत को ध्यान में रखकर उचित कीमत तय की जानी चाहिए, ताकि उन्हें कारोबार से मुनाफा मिल सके. इन समस्याओं को दूर करना जरूरी है, क्योंकि उत्पादन लागत बढ़ने और कम कीमत मिलने से किसानों के लिए मछली पालन जारी रखना मुश्किल हो सकता है.

फिश मोमोज और फिश फिंगर्स से महिला किसान की कमाई

बैठक में महिला मछली पालक रेखा जोशी ने अपनी सफलता की कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि वह ट्राउट मछली से फिश बॉल्स, फिश फिंगर्स और फिश मोमोज जैसे खाद्य उत्पाद तैयार कर रही हैं. इन उत्पादों की बिक्री से उन्हें रोजाना करीब 5,000 रुपये की बिक्री होती है. यह उदाहरण बताता है कि किसान केवल ताजी मछली बेचने के बजाय उससे दूसरे उत्पाद बनाकर भी कमाई बढ़ा सकते हैं. मछली को अलग-अलग खाद्य उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया को मूल्य संवर्धन कहा जाता है. इससे उत्पाद की कीमत बढ़ाने और नए ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है.

कोल्ड स्टोरेज और बेहतर परिवहन पर जोर

ट्राउट मछली जल्दी खराब हो सकती है. इसलिए उसे फार्म से बाजार तक पहुंचाने के दौरान ठंडा रखना जरूरी है. बैठक में हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों के पास कोल्ड स्टोरेज केंद्र बनाने की जरूरत पर चर्चा हुई. इन केंद्रों की मदद से मछली को सुरक्षित रखा जा सकेगा और दूर के बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा. इससे दूसरे राज्यों और विदेशों में ट्राउट बेचने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं. इसके साथ ही पैकिंग, गुणवत्ता जांच और मछली को समय पर पहुंचाने की व्यवस्था में सुधार किया जाएगा.

वैज्ञानिक तकनीक और स्टार्टअप से बढ़ेगा कारोबार

केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के सचिव ने शीतजल मत्स्य पालन समूह में स्टार्टअप और नए कारोबारियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया. नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन से मछली पालन को अधिक फायदेमंद बनाया जा सकता है. समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के अध्यक्ष पी. जवाहर ने किसानों को प्रशिक्षण देने और मछली की गुणवत्ता, प्रसंस्करण तथा पैकिंग में सुधार करने की जरूरत बताई. वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उप महानिदेशक डॉ. जे. के. जेना ने वैज्ञानिक तरीकों और तकनीकी सहायता के महत्व को रेखांकित किया.

बैठक में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड को मछली पालन की पूरी प्रक्रिया से जुड़ी परियोजनाओं की विस्तृत योजना तैयार करने का सुझाव दिया गया. सरकार का लक्ष्य है कि बेहतर चारा, मछली के बीज, भंडारण और बाजार की सुविधाओं के जरिए उत्तराखंड सहित दूसरे हिमालयी राज्यों में ट्राउट फार्मिंग को मजबूत बनाया जाए. इससे किसानों को बेहतर कीमत और रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं.

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