
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में सूखे के कारण पशुओं के लिए चारे की कमी बढ़ने की आशंका है. इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘फॉडर फ्रेंड्स’ (Fodder Friends) पहल शुरू करने की योजना बनाई है. इस पहल के जरिए पानी की सुविधा वाले किसानों को चारे की खेती के लिए तेजी से बढ़ने वाली और कम पानी में तैयार होने वाली किस्मों के बीज मुफ्त में दिए जाएंगे. इसका उद्देश्य आने वाले महीनों में पशुओं के लिए चारे की कमी को दूर करना और पशुपालकों को संभावित संकट से राहत दिलाना है.
दरअसल, महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने 305 तालुकों में सूखा घोषित किया है. वहीं, नांदेड़ जिले के कुल 16 तालुकों में से 14 को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है, ऐसे में किसानों के साथ-साथ पशुपालकों के सामने भी अपने पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का इंतजाम करना बड़ी चुनौती बन गया है.
नांदेड़ के कलेक्टर राहुल कर्डिले ने बताया कि ‘फॉडर फ्रेंड्स’ पहल के तहत उन किसानों और लोगों को मुफ्त बीज दिए जाएंगे, जिनके पास पानी की सुविधा है और जो चारे की फसल उगाने के इच्छुक हैं. इन बीजों की मदद से किसान कम समय में चारा तैयार कर सकेंगे. इस पहल के तहत किसान सबसे पहले अपने खेत में उगाए गए चारे का इस्तेमाल अपने पशुओं के लिए करेंगे. इसके बाद अगर चारा बचता है, तो उसे उन पशुपालकों को उपलब्ध कराया जाएगा, जिनके पास अपने पशुओं के लिए पर्याप्त चारा नहीं है. इससे स्थानीय स्तर पर चारे की कमी को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
जिला प्रशासन इस योजना को नांदेड़ के 182 पशु चिकित्सा केंद्रों के माध्यम से लागू करने की तैयारी कर रहा है. ये केंद्र किसानों और पशुपालकों को पहल की जानकारी देंगे. साथ ही चारे की खेती में हिस्सा लेने के इच्छुक लोगों के पंजीकरण में भी मदद करेंगे. कलेक्टर राहुल कर्डिले ने पानी की सुविधा वाले किसानों से आगे आकर चारे की खेती करने की अपील की है. उन्होंने किसानों और पशुपालकों से कहा है कि वे बिना देरी किए अपने नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र पर रजिस्ट्रेशन कराएं, ताकि जिले में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाई जा सके.
प्रशासन ने पशुपालकों से सरकार की पशु बीमा योजना का लाभ लेने की भी अपील की है. इस योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार सब्सिडी के रूप में देगी, जबकि बाकी 15 प्रतिशत राशि लाभार्थियों को चुकानी होगी. बीमा योजना का उद्देश्य सूखे और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पशुधन को होने वाले नुकसान की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देना है. इससे संकट के समय उनके नुकसान का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है.
कलेक्टर ने उद्योगों, संस्थानों और अन्य संगठनों से भी अपील की है कि वे अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं का बीमा कराने के लिए करें. उन्होंने कंधार तालुका के बहादुरपुरा गांव के एक परिवार का उदाहरण दिया. इस परिवार ने पूरे गांव के पशुधन का एक साल का बीमा कराया, जिससे सामाजिक जिम्मेदारी की एक मिसाल सामने आई. जिला प्रशासन अब उद्योगों और संस्थानों के सहयोग से दूसरे गांवों में भी ऐसी पहल को बढ़ावा देना चाहता है. इसका उद्देश्य सूखे के दौरान पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखना और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद करना है. (PTI)