
गधों की संख्या लगातार घट रही है. गधों की उन्नत नस्ल और हमेशा डिमांड में रहने वाले मालधारी गधे तो और भी कम हो गए हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 60 फीसद गधों की संख्या में कमी आ चुकी है. गधों की उपयोगिता को देखते हुए दक्षिण भारत में गधों के बड़े-बड़े फार्म हाउस भी बन रहे हैं. और ये सब मुमकिन हो रहा है नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (एनएलएम) योजना से. गधों की कमी को पूरा करने और गधों को बचाने के लिए सरकार एनएलएम के तहत 50 लाख रुपये तक दे रही है. क्योंकि गधा सिर्फ बोझा ढोने के काम ही नहीं आता है. गधी के दूध की भी बहुत वैल्यू है. बाजार में गधी के दूध से बने कॉस्मेटिक आइटम की भी बहुत डिमांड है.
क्रीम-साबुन बनाने में गधी के दूध का महत्व किसी से छिपा नहीं है. यही वजह है कि गधी के दूध की मेडिसिनल वैल्यू को देखते हुए अब गधी के दूध से बहुत सारे कॉस्मेटिक आइटम बनने के साथ ही अब उसके दूध को फूड आइटम में शामिल करने की कोशिश चल रही हैं. नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) के लिए को पत्र भी लिख चुका है. अभी हाल ही में सार्वजनिक तौर पर बाबा रामदेव ने भी गधी का दूध पीकर उसे स्वादिष्ट बताया था.
साल 2015 में नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (एनएलएम) योजना शुरू की गई थी. शुरू में इस योजना के तहत 25 से 50 लाख रुपये की रकम सब्सिडी के तहत दी जाती थी. खासतौर पर गधों की बात करें तो इस योजना के तहत गधों का ब्रीडिंग सेंटर, नस्ल सुधार और गधा पालन पर जोर दिया जा रहा है. सरकार लागत का 50 फीसद सब्सिसडी के तौर पर दे रही है.
एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में हुए पशुगणना के आंकड़ों पर जाएं तो देश में गधों की कुल संख्या 1.23 लाख है. गधों की सबसे ज्यादा संख्या जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र , गुजरात, कर्नाटक और आंध्रा प्रदेश में है. इन राज्यों में गधों की संख्या एक लाख के आसपास है. देश के 28 राज्यों में ही गधे बचे हैं. उसमे भी कई राज्य ऐसे हैं जहां गधों की संख्या दो से लेकर 10 के बीच है.
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