
Fodder in Winter Season खासतौर से दो मौसम तो पशुओं के हरे चारे पर आफत बनकर टूटते हैं. ऐसे में पशुओं को सीधे हरा चारा खिलाना मुश्किल हो जाता है. क्योंकि एनिमल एक्सपर्ट सर्दी और बरसात के दिनों में खेत से सीधे हरा चारा काटकर खिलाने की मना करते हैं. अभी कड़ाके की ठंड पड़ रही है. रात और सुबह में कोहरा भी पड़ रहा है. कोहरे के साथ ओस भी खूब गिर रही है. यही ओस खेत में खड़े हरे चारे को गीला कर रही है. ओस की शक्ल में पानी की मोटी-मोटी बूंदें चारे पर होती हैं.
ओस चारे में नमी की मात्रा को बढ़ा देती है. इसी के चलते एक्सपर्ट सुबह काटे गए हरे चारे को सीधे पशुओं को खिलाने के लिए मना करते हैं. फिर वो चाहें गाय-भैंस हो या फिर भेड़-बकरियां. क्योंकि इस नमी के चलते पशुओं को पेट की गंभीर बीमारी हो जाती है. तय मानक से ज्यादा नमी वाला चारा खाने के चलते ही पशुओं का पेट फूल जाता है.
एनिमल एक्सपर्ट डॉ. आरपीएन सिंह का कहना है कि सर्दियों के दौरान हरे चारे में नमी की मात्रा बढ़ जाती है. अब पशु जब इस चारे को खाता है तो उसे डायरिया समेत पेट संबंधी और कई तरह की बीमारियां होने लगती हैं. कई बार बरसात के दिनों में डायरिया पशुओं के लिए जानलेवा भी हो जाता है. अब इस तरह की परेशानी से बचने के लिए पशुपालकों को करना ये चाहिए कि जब पशु को हरा चारा खाने में दें तो उसे सूखा चारा भी खिलाएं. ऐसा करने के चलते चारे में मौजूद नमी की मात्रा कंट्रोल हो सकेगी. क्योंकि चारा खाने के बाद पशु पानी भी पीता है. इसके चलते पशु के दूध की क्वालिटी भी खराब हो जाती है. इसलिए ये जरूरी है कि सूखा चारा खिलाने के साथ-साथ हम उसे मिनरल्स जरूर दें.
गाय-भैंस अफरा से पीडि़त हो, पेट फूल रहा हो और गैस पास नहीं हो रही हो तो फौरन ही घर पर इलाज शुरू कर सकते हैं. खास बात ये है कि इलाज का ज्यादातर सामान रसोई में ही मिल जाएगा. इसके साथ ही पशु के पेट को बायीं और पेड़ू के पास अच्छी तरह से मालिश करनी चाहिए. वहीं पशु को ऐसे स्थान पर बांधें जहां उसका यानि गर्दन वाला धड़ ऊंचाई पर हो.
टिंचर हींग - 15 मि.ली
स्पिरिट अमोनिया एरोमैटिक्स - 15 मिली
तेल तारपीन - 40 मिलीलीटर
अलसी का तेल - 500 मिली.
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