Nandini Milk Price: कर्नाटक में 8 रुपये तक महंगा होगा दूध, कैबिनेट की मंजूरी, किसानों को मिलेगा बढ़ी कीमत का लाभ

Nandini Milk Price: कर्नाटक में 8 रुपये तक महंगा होगा दूध, कैबिनेट की मंजूरी, किसानों को मिलेगा बढ़ी कीमत का लाभ

कर्नाटक में नंदिनी दूध के दाम बढ़ाने को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. रिपोर्ट के मुताबिक 8 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी को हरी झंडी मिली है, हालांकि इसे लागू करने और अंतिम बढ़ोतरी पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार फैसला करेंगे. बढ़ी कीमत का फायदा दूध उत्पादक किसानों तक पहुंचाने की बात कही गई है.

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क‍िसान तक
  • बेंगलुरु,
  • Oct 06, 2026,
  • Updated Oct 06, 2026, 7:00 PM IST

कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमत को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. राज्य कैबिनेट ने दूध की कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. हालांकि बढ़ी हुई कीमत तत्काल लागू नहीं होगी. अंतिम रूप से कितनी बढ़ोतरी लागू की जाएगी, इसका फैसला मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार करेंगे.

रिपोर्ट के अनुसार, विधान परिषद चुनाव को लेकर आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण सरकार को कीमत बढ़ाने से पहले चुनाव आयोग की अनुमति की जरूरत पड़ सकती है. सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि नई कीमत 1 नवंबर से लागू हो सकती है, लेकिन इसकी अंतिम घोषणा अभी बाकी है.

दूध संघों ने मांगी थी 8 से 10 रुपये की बढ़ोतरी

इससे पहले राज्य के दूध उत्पादक संघों ने नंदिनी दूध की खरीद और खुदरा कीमत में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की मांग की थी. उनका कहना था कि पशु आहार, चारा, दवाइयों, परिवहन और पैकेजिंग पर होने वाला खर्च काफी बढ़ गया है. सूखे के कारण चारे की उपलब्धता में आई कमी ने भी डेयरी किसानों की परेशानी बढ़ाई है.

दूध संघों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सामने भी अपनी मांग रखी थी. सरकार से कहा गया कि बढ़ती उत्पादन लागत के कारण मौजूदा खरीद मूल्य पर डेयरी किसानों के लिए दूध उत्पादन आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है.

दूसरे राज्यों के मुकाबले कम खरीद मूल्य का दावा

दूध संघों का दावा है कि कर्नाटक में किसानों से टोंड दूध की खरीद करीब 35 रुपये प्रति लीटर की दर से होती है. इसके मुकाबले आंध्र प्रदेश में 41.50 रुपये, केरल में 41.80 रुपये, महाराष्ट्र में 41 रुपये और तमिलनाडु में 42.24 रुपये प्रति लीटर खरीद मूल्य बताया गया है. इसी अंतर को आधार बनाकर किसानों के लिए बेहतर कीमत की मांग की जा रही थी.

अभी हाल में बैंगलोर अर्बन, रूरल और रामनगर डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स सोसाइटीज़ यूनियन लिमिटेड के चेयरमैन डी.के. सुरेश ने कहा था कि मवेशियों के चारे, दवाइयों और रखरखाव की अन्य जरूरतों पर खर्च बढ़ने के कारण डेयरी फार्मिंग की लागत काफी बढ़ गई है.

मुख्यमंत्री के भाई सुरेश ने कहा, "मौजूदा सूखे के हालात में फसल के नुकसान से किसानों की आमदनी में भारी गिरावट आई है और चारे की कमी के कारण डेयरी किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है."

उन्होंने कहा कि कई राज्यों में सहकारी संस्थाएं और निजी डेयरियां लगातार दूध और दूध से बने उत्पादों की कीमतें बढ़ा रही हैं, जबकि कर्नाटक की यूनियनों ने उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पिछले डेढ़ साल से दूध की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं.

उन्होंने कहा कि निजी डेयरियां भी अधिक दूध खरीदने की कोशिश कर रही हैं, जिससे दूध खरीदने के लिए कड़ा मुकाबला हो रही है.

किसानों को फायदा पहुंचाने पर जोर

कीमत बढ़ाने की मांग के पीछे दूध उत्पादक किसानों की आमदनी बढ़ाना प्रमुख कारण बताया जा रहा है. इससे पहले दूध उत्पादक संगठनों की ओर से भी मांग की गई थी कि बढ़ी हुई कीमत का बड़ा हिस्सा किसानों को दिया जाए. एक प्रस्ताव में 10 रुपये की बढ़ोतरी में से 7 रुपये किसानों और 3 रुपये दूध संघों को देने की मांग सामने आई थी.

फिलहाल कैबिनेट की सहमति के बाद नजर मुख्यमंत्री के अंतिम फैसले पर है. अगर पूरी 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जाती है, तो नंदिनी के बेसिक टोंड दूध की कीमत मौजूदा 46 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर हो सकती है.(नागार्जुन का इनपुट)

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