नांदेड में सूखे की मार, चारा-पानी की किल्लत के चलते औने-पौने दाम में मवेशी बेचने को मजबूर किसान

नांदेड में सूखे की मार, चारा-पानी की किल्लत के चलते औने-पौने दाम में मवेशी बेचने को मजबूर किसान

महाराष्ट्र के नांदेड में सूखे और बारिश की कमी से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. फसल खराब होने के बाद चारे और पानी की किल्लत हो गई है, जिसके चलते किसान अपने मवेशियों को मजबूरी में कम दामों पर बेचने के लिए बाजार पहुंच रहे हैं.

फसल सूखी तो मवेशी बेचने की नौबतफसल सूखी तो मवेशी बेचने की नौबत
कुअरचंद मंडले
  • Nanded,
  • Oct 03, 2026,
  • Updated Oct 03, 2026, 1:51 PM IST

महाराष्ट्र के नांदेड जिले में बारिश नहीं होने से सूखे के हालात गंभीर होते जा रहे हैं. फसलें खराब होने के बाद अब किसानों के सामने मवेशियों को पालना भी मुश्किल हो गया है. चारे और पानी की भारी कमी के कारण कई किसान अपने बैल, गाय और बकरियों को बेचने के लिए पशु बाजार पहुंच रहे हैं. किसानों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में अपने मवेशी औने-पौने दाम पर बेचने पड़ रहे हैं.

'मवेशियों के लिए नहीं बचा चारा'

अर्धापुर तालुका के मेंढला खुर्द गांव के किसान प्रभाकर वानखेड़े ने बताया कि पिछले करीब दो महीनों से बारिश नहीं हुई है. खेतों में फसल खराब हो चुकी है और अब न तो पर्याप्त पानी बचा है और न ही मवेशियों के लिए चारा. उन्होंने बताया कि जिन बकरियों को उन्होंने बचपन से पाल-पोसकर बड़ा किया, उन्हें भी अब मजबूरी में बेचना पड़ रहा है. किसान के मुताबिक, अच्छी बकरियां 10 से 12 हजार रुपये तक में बिक सकती हैं, लेकिन पानी और चारे की कमी का फायदा उठाकर व्यापारी उन्हें महज 5 से 7 हजार रुपये में खरीदने की कोशिश कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि कर्ज पहले से ही बढ़ा हुआ है और मवेशियों के लिए चारा-पानी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है. 

बैलों की जोड़ी के दाम भी गिरे

अर्धापुर के पशु बाजार में बैलों की जोड़ी बेचने पहुंचे एक किसान ने बताया कि उन्होंने करीब 10 एकड़ जमीन में सोयाबीन और कपास की फसल लगाई थी. लेकिन बारिश नहीं होने के कारण दोनों फसलें सूख गईं. अब खेत में चारा नहीं बचा है और मवेशियों के लिए पानी जुटाना भी मुश्किल हो रहा है. किसान के मुताबिक, जिस बैलों की जोड़ी की कीमत करीब 2 लाख रुपये थी, उसे अब मजबूरी में करीब सवा लाख रुपये में बेचने की नौबत आ गई है. वहीं, कुछ किसानों का कहना है कि बाजार में बैलों की जोड़ी के लिए 60 से 70 हजार रुपये तक के ही दाम लगाए जा रहे हैं. इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. एक तरफ फसल बर्बाद हो गई और दूसरी तरफ मवेशियों को भी कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है. 

किसानों ने सरकार से की जल्द राहत की मांग

सूखे और फसल बर्बादी से परेशान किसानों का कहना है कि सिर्फ सूखा घोषित करने से उनकी समस्या खत्म नहीं होगी. किसानों को चारा, पानी और आर्थिक मदद की जरूरत है. मेंढला के किसान गंगाधर ने कहा कि जब तक किसानों को सीधे राहत या मुआवजा नहीं मिलता, तब तक सूखे की घोषणा का उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिलेगा. किसानों ने सरकार से जल्द से जल्द राहत कार्य शुरू करने, मवेशियों के लिए चारे और पानी की व्यवस्था करने और फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है. किसानों का कहना है कि अगर जल्द मदद नहीं मिली तो आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. 

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