Camel Milk: बहुत काम की हैं ऊंटनी के दूध से जुड़ी ये 7 बातें, बीमारियां रखेंगी दूर 

Camel Milk: बहुत काम की हैं ऊंटनी के दूध से जुड़ी ये 7 बातें, बीमारियां रखेंगी दूर 

Benifits of Camel Milk नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमिल (NRCC), बीकानेर का कहना है कि कि ऊंटनी का दूध कई गंभीर बीमारियों में दवाई की तरह काम करता है. पाली, राजस्थान से ऊंटनी का दूध लेकर स्पेशल ट्रेन देश के दर्जनों इलाकों में सप्लाई करती है. जिसमे बच्चों के लिए ऑटिज्म जैसी बीमारी के लिए खासतौर पर विपरीत हालात में भी दूध की सप्लाई की जाती है. 

ऊंटनी के दूध ऊंटनी के दूध
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jan 03, 2026,
  • Updated Jan 03, 2026, 12:02 PM IST

क्या किसी खास बीमारी के इलाज में ऊंटनी का दूध कच्चा पीया जा सकता है. क्या ऊंटनी के दूध में फैट और इंसूलिन की मात्रा ज्यादा होती है. गाय-भैंस के दूध की तरह से क्या ऊंटनी के दूध से भी कई तरह के मिल्क प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. ऊंटनी का दूध किन बीमारियों में फायदा करता है. ऊंटनी के दूध का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए. असल में ये वो सवाल हैं जो सीधे तौर पर ऊंटनी का दूध इस्तेमाल करने से जुड़े हुए हैं. अगर आप भी ऊंटनी का दूध पीना चाहते हैं या फिर किसी और रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो ऐसे ही खास सवालों के जवाब नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमिल (NRCC), बीकानेर ने दिए हैं. 

इतना ही नहीं ऊंटनी के दूध को फ्यूचर मिल्क में शामिल करने की तैयारी भी चल रही है. क्योंकि ऊंटनी के दूध के एक नहीं अनेक फायदे हैं. देश ही नहीं विदेशों में भी ऊंटनी के दूध की डिमांड है. ऊंटनी का दूध डायबिटीज, टीबी और ऑटिज्म जैसी बीमारी में बहुत फायदेमंद है. यही वजह है कि NRCC ऊंटनी के दूध से जुड़ी अफवाहों और भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन भी करता है. 

ऊंटनी के दूध से जुड़ी हैं ये जरूरी 7 बातें 

  • क्या ऊंटनी के दूध में फैट की मात्रा ज्यादा होती है?
  • उत्तर- ऊंटनी के दूध में फैट की फीसद 1.5 से 3.5 के बीच होता है, जो मवेशियों और भैंसों के दूध से कम है.
  • क्या ऊंटनी के दूध में अन्य दूध की तुलना में इंसुलिन की मात्रा ज्यादा होती है?
  • उत्तर- ऊंटनी के दूध में इंसुलिन की मात्रा ज्यादा होती है (करीब 40 µIU/ml).
  • क्या ऊंटनी के दूध से प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं या नहीं?
  • उत्तर- ऊंट रिसर्च सेंटर द्वारा विभिन्न डेयरी प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं जैसे- चाय, कॉफी, फ्लेवर्ड मिल्क, फॉर्मेंट दूध, पाश्चुरीकृत दूध, कुल्फी, पनीर, मावा, गुलाब जामुन, बर्फी, रसगुल्ला, पेड़ा और दूध पाउडर आदि.
  • क्या मनुष्यों में कुछ बीमारियों को ठीक करने के लिए बिना पाश्चुरीकृत ऊंटनी का दूध पीना जरूरी है?
  • उत्तर- जैसा कि हम जानते हैं कि प्रोसेसिंग की वजह से हर एक फूड आइटम अपने कुछ पोषक तत्व खो देता है और प्रोटीन समेत अन्य तत्वों का भी विकृतीकरण हो जाता है. इसलिए इसके कार्यात्मक मूल्य में कमी आ सकती है. क्योंकि दूध उत्पादन, हैंडलिंग और परिवहन के दौरान विभिन्न रोगाणुओं का कैरियर होता है, इसलिए हम कभी भी बिना पाश्चुरीकृत दूध के सेवन का सुझाव नहीं देते हैं.
  • क्या ऊंटनी के दूध में इंसानों को फायदा पहुंचाने वाली मेडिशन वैल्यू है?
  • उत्तर- शोधकर्ताओं का कहना है कि ऊंटनी के दूध में इंसुलिन की उच्च मात्रा के कारण, इसका सेवन मनुष्यों में टाइप-1 डायबिटीज के प्रबंधन में प्रभावी भूमिका निभाता है. यह इंसानों में विभिन्न प्रकार के तपेदिक रोगों के स्वास्थ्य प्रबंधन में भी कारगर बताया गया है.
  • क्या ऊंटनी का दूध गोजातीय दूध से एलर्जी वाले बच्चों के लिए सुरक्षित है?
  • उत्तर- हां, ऊंटनी के दूध की प्रोटीन संरचना मानव दूध के बहुत करीब है और यह बच्चों में एलर्जी पैदा नहीं करती है.
  • क्या ऊंटनी का दूध लैक्टोज इनटॉलरेंस वाले लोगों के लिए सुरक्षित है?
  • उत्तर- हां, ऊंटनी के दूध के सेवन से इंसानों में लैक्टोज इनटॉलरेंस की रिपोर्ट नहीं की गई है.

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