Zoonotics Disease: पशुओं को विदेशी बीमारियों से बचाते हैं AQCS सेंटर, जानें कैसे करते हैं काम 

Zoonotics Disease: पशुओं को विदेशी बीमारियों से बचाते हैं AQCS सेंटर, जानें कैसे करते हैं काम 

Zoonotics Disease बार्डर वाले राज्यों में पशुओं के अवैध तरीके से होने वाले कारोबार के चलते विदेशी बीमारियां देश के पशुओं में फैल जाती हैं. हालांकि सरकार इसे लेकर खासी सख्त है. ऐसी बीमारियों पर काबू पाने के लिए ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग से सरकार ने वन नेशन हैल्थ मिशन भी शुरू किया है. एक्सपिर्ट का दावा है कि इंसानों में होने वाली 70 फीसद बीमारियां पशुओं से इंसानों में आती हैं.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 22, 2026,
  • Updated Jun 22, 2026, 12:49 PM IST

बहुत सारी ऐसी जानलेवा बीमारियां होती हैं जो पशुओं से इंसानों में आती हैं. यही वजह है कि विदेश से देश में आने वाले पशु-पक्षि‍यों पर पैनी नजर रखी जाती है. इसी के चलते इंपोर्ट होने वाले पशु-पक्षि‍यों को क्वारंटाइन किया जाता है. जिससे की विदेशी बीमारियों को कंट्रोल किया जा सके. और ये काम करता है एनिमल क्वारंटाइन सर्टिफिकेशन सर्विसेज (AQCS) सेंटर. देश के कई बड़े शहरों में ये सेंटर बनाए गए हैं. एनिमल एक्सपसर्ट की मानें तो देशभर में खुले एक्यूसीएस सेंटर से एक्सपोर्ट होने वाले पशु-पक्षी भी आसानी से विदेशों तक चले जाते हैं. जिसके चलते पशु-पक्षि‍यों पशु-पक्षियों में किसी भी तरह की बीमारी का डर नहीं रहता है. 

क्वारंटाइन सेंटर में पशु-पक्षियों के साथ ही उनके केयर-टेकर के रुकने के लिए भी जगह होती है. गौरतलब रहे चार-पांच साल में लंपी बीमारी ने खासा कहर बरपाया है. हजारों गाय तड़प-तड़प कर मर गईं. देश के दूध उत्पादन पर भी इसका असर पड़ा. इसी तरह कुछ साल पहले ही देश में स्वाइन फ्लू ने भी दस्तक दी है. ये दोनों बीमारी दूसरे देशों से हमारे देश में आई हैं. 

ये है AQCS के काम करने का तरीका

  • एक्यूसीएस देश से घोड़ा, गाय-भैंस, भेड़-बकरी, कुत्ता, बिल्ली, मुर्गे, बत्तख आदि को एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट करने में मदद करता है. एक्सपोर्ट करने से पहले और इम्पोर्ट हुए पशु-पक्षियों को देश में एंट्री करने से पहले एओक्यूसीएस स्टेशन पर क्वारंटाइन किया जाता है और यहीं उन्हें आगे की एंट्री के लिए सर्टिफिकेट भी दिया जाता है. 
  • एनिमल और एनिमल प्रोडक्ट के आयात और निर्यात में पशुधन आयात अधिनियम और केंद्र सरकार के नियम-कानूनों को लागू करना. 
  • एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट के लिए एनिमल और एनिमल प्रोडक्ट की डिटेल रखना, उन्हें अलग रखना और उनका परीक्षण करना.
  • इम्पोर्ट हुए एनिमल और उसके प्रोडक्ट में संक्रमण का पता लगाना और उसे खत्म करना.
  • राष्ट्रीय खजाने को बढ़ाने के लिए प्री-शिपमेंट क्वामलिटी कंट्रोल पर जोर देना.
  • एनिमल और एनिमल प्रोडक्ट के आयात और निर्यात के दौरान कस्टम विभाग के साथ संपर्क बनाए रखना.
  • एनिमल और एनिमल प्रोडक्ट में बीमारी की स्थिाति और निगरानी के संबंध में राज्य  पशुपालन निदेशकों के साथ संपर्क बनाना.
  • एनिमल और एनिमल प्रोडक्ट की जांच के लिए देश में स्थित सभी लैब और एक्सपर्ट के साथ संपर्क बनाए रखना.
  • हमारे देश से इम्पोर्ट करने वाले देशों के मुताबिक और क्वालिटी के आधार पर उनके सामान की पैकिंग के नियमों का पालन कराना.
  • एनिमल और एनिमल प्रोडक्ट को एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट करने वालों का रजिस्ट्रेशन करना.

देश में और कहां हैं AQCS

दो साल पहले बेंगलुरु में नया सेंटर खोला गया है. इसका मकसद ये था कि दक्षिण भारत के पशु-पक्षी के एक्सपोर्ट और इंपोर्ट कारोबार को और आसान बनाया जाए. इसके अलावा देश में और भी एनिमल क्वारंटाइन सर्टिफिकेशन सर्विसेज स्टेशन काम कर रहे हैं, जहां से पशुओं और पक्षियों को विदेश भेजा जाता है और अपने देश में लाए जाते हैं. जैसे उत्तर क्षेत्र का दिल्ली में, पश्चिमी क्षेत्र का मुम्बई में, पूर्व का कोलकाता में, दक्षिण का चेन्नई में काम कर रहा है. इसके अलावा हैदराबाद में भी एक स्टेशन है और अब बेंगलुरु में शुरू हो गया है.

ये भी पढ़ें: 

Milk Production: गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इन 5 कारणों से कम हो सकता है दूध उत्पादन
EL-Nino: डेयरी-पशुपालन पर बढ़ा अल नीनो का खतरा, कम हो सकता है दूध उत्पादन!

MORE NEWS

Read more!