
बहुत सारी ऐसी जानलेवा बीमारियां होती हैं जो पशुओं से इंसानों में आती हैं. यही वजह है कि विदेश से देश में आने वाले पशु-पक्षियों पर पैनी नजर रखी जाती है. इसी के चलते इंपोर्ट होने वाले पशु-पक्षियों को क्वारंटाइन किया जाता है. जिससे की विदेशी बीमारियों को कंट्रोल किया जा सके. और ये काम करता है एनिमल क्वारंटाइन सर्टिफिकेशन सर्विसेज (AQCS) सेंटर. देश के कई बड़े शहरों में ये सेंटर बनाए गए हैं. एनिमल एक्सपसर्ट की मानें तो देशभर में खुले एक्यूसीएस सेंटर से एक्सपोर्ट होने वाले पशु-पक्षी भी आसानी से विदेशों तक चले जाते हैं. जिसके चलते पशु-पक्षियों पशु-पक्षियों में किसी भी तरह की बीमारी का डर नहीं रहता है.
क्वारंटाइन सेंटर में पशु-पक्षियों के साथ ही उनके केयर-टेकर के रुकने के लिए भी जगह होती है. गौरतलब रहे चार-पांच साल में लंपी बीमारी ने खासा कहर बरपाया है. हजारों गाय तड़प-तड़प कर मर गईं. देश के दूध उत्पादन पर भी इसका असर पड़ा. इसी तरह कुछ साल पहले ही देश में स्वाइन फ्लू ने भी दस्तक दी है. ये दोनों बीमारी दूसरे देशों से हमारे देश में आई हैं.
दो साल पहले बेंगलुरु में नया सेंटर खोला गया है. इसका मकसद ये था कि दक्षिण भारत के पशु-पक्षी के एक्सपोर्ट और इंपोर्ट कारोबार को और आसान बनाया जाए. इसके अलावा देश में और भी एनिमल क्वारंटाइन सर्टिफिकेशन सर्विसेज स्टेशन काम कर रहे हैं, जहां से पशुओं और पक्षियों को विदेश भेजा जाता है और अपने देश में लाए जाते हैं. जैसे उत्तर क्षेत्र का दिल्ली में, पश्चिमी क्षेत्र का मुम्बई में, पूर्व का कोलकाता में, दक्षिण का चेन्नई में काम कर रहा है. इसके अलावा हैदराबाद में भी एक स्टेशन है और अब बेंगलुरु में शुरू हो गया है.
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