महाराष्ट्र के बीड में भयंकर सूखा: 8.5 लाख मवेशियों पर मंडराया संकट, किसान ने सरकार को दी अनोखी चेतावनी

महाराष्ट्र के बीड में भयंकर सूखा: 8.5 लाख मवेशियों पर मंडराया संकट, किसान ने सरकार को दी अनोखी चेतावनी

महाराष्ट्र के बीड जिले में सूखे से खरीफ की 75% फसलें तबाह हो गई हैं. 8.5 लाख से अधिक मवेशियों के लिए केवल 2 महीने का चारा बचा है. पढ़ें जिला प्रशासन का एक्शन प्लान.

Beed Drought Crisis MaharashtraBeed Drought Crisis Maharashtra
रोहिदास हातागले
  • बीड,
  • Oct 09, 2026,
  • Updated Oct 09, 2026, 2:58 PM IST

महाराष्ट्र के बीड जिले में सूखे जैसी स्थिति पैदा होने के कारण करीब 8 लाख 57 हजार मवेशियों के सामने चारे और पीने के पानी की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है. जिले में केवल 60 दिनों तक चलने भर लायक ही चारा बचा है. इस स्थिति से निपटने के लिए किसान सोयाबीन की फसल से निकलने वाले भूसे को इकट्ठा कर जमा करने में लगे हैं. वहीं, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जिले से बाहर चारे की बिक्री पर रोक लगाने के कदम उठाए हैं.

सरकार के खिलाफ कड़ा रुख

बीड जिले के सनगांव निवासी किसान योगिराज अंजान ने सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. साहेबराव के पास 7 एकड़ जमीन और 18 गाय-भैंसें हैं. पिछले साल अतिवृष्टि और इस साल सूखे के कारण उनकी सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द से जल्द चारा छावनियां (Fodder Camps) और पानी की व्यवस्था नहीं की, तो वे अपने सभी 18 मवेशियों के गले में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और जिले के विधायकों की तस्वीरें टांगकर उन्हें खुला छोड़ देंगे.

जिले में गाय 3,41,240, बकरी 2,92,973, भैंस 1,63,835, भेड़ 57,278, अन्य (सूअर, घोड़े, गधे) 1,736 मवेशियों के सरकारी आंकड़े हैं. जिले में गायों की संख्या सबसे अधिक है. आने वाले दिनों में यदि चारे-पानी के उचित प्रबंध नहीं किए गए, तो पशुपालकों के सामने भारी संकट पैदा होना तय है.

बहुत बुरे हाल हैं. पिछले साल इस इलाके में बाढ़ जैसी हालत हो गई थी. इस साल सूखा पड़ने से जानवरों को चारा और पानी नहीं मिल रहा है.  

मवेशी के गले में बांधेंगे CM की फोटो

किसान योगिराज अंजान ने कहा, मवेशी जब तक मेरे पास हैं तब तक मैं संभाल लूंगा. बाद में मै अपने गाय भैंस के गले में CM, DCM और एग्रीकल्चर मिनिस्टर और जिले के विधायक की फ़ोटो डालकर छोड़ दूंगा. सरकार को हमारे ऊपर कृपा दिखानी चाहिए. सरकार से इनती ही विनती है कि वह पशुपालकों की स्थिति समझे और उनकी मदद करे.  

हाल ही में, डिविजनल कमिश्नर ने बीड जिले में सूखे की स्थिति का रिव्यू किया. खरीफ सीजन में अनुमानित 8,08,946 हेक्टेयर एरिया में से, 7,87,218 हेक्टेयर (97.31 प्रतिशत) पर बुआई हुई थी. सोयाबीन की बुआई 137.90 प्रतिशत हुई, जबकि कपास की बुआई 78.36 प्रतिशत हुई. शुरुआती सर्वे में जिले के सभी 11 तालुकाओं में 75 प्रतिशत से ज़्यादा नुकसान पाया गया, और प्रभावित एरिया लगभग 5.14 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है.

बीड जिले में भयंकर सूखे के हालात बनने लगे हैं. औसत से कम बारिश की वजह से खरीफ सीजन का ट्रिगर 1 लागू कर दिया गया है. आने वाले दिनों में जानवरों के लिए चारे की बहुत कमी होगी.

बीड में मात्र 2 हजार टन चारा

फिलहाल, जिले में सिर्फ 1 लाख 92 हजार मीट्रिक टन चारा बचा है. यह चारा अगले दो महीने के लिए मुश्किल से ही काफी है. सवाल यह उठ सकता है कि दिसंबर से जानवरों को क्या खिलाया जाए. कम से कम दो महीने तक चारे की उपलब्धता बनी रहनी चाहिए. चारे की संभावित कमी से बचने के लिए, बीड जिले में पैदा होने वाले और अभी मौजूद गीले और सूखे चारे को बीड जिले के बाहर ले जाने पर रोक लगा दी गई है. जिला कलेक्टर विवेक जॉनसन ने आदेश दिया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

MORE NEWS

Read more!