पश्चिमी विक्षोभ का असर कई राज्यों में देखा जा रहा हैराजस्थान में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली और कई जिलों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि देखने को मिली. पंजाब और हरियाणा में भी इसका असर देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग ने किसानों को आगाह किया है कि गेहूं की फसल को देखते हुए उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. राजस्थान के कई जिलों में पश्चिमी विक्षोभ के असर से बारिश दर्ज की गई है. हरियाणा और पंजाब में भी ऐसी स्थिति देखने को मिल सकती है. मौसम में तेज बदलाव से खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है.
राजस्थान के जिले जैसलमेर, अजमेर, नागौर, सीकर, कुचामन-डीडवाना, जालोर, बाड़मेर और जोधपुर सहित कई इलाकों में शुक्रवार सुबह से ही बादल छाए रहे और तेज मेघगर्जन के साथ बारिश हुई. जैसलमेर के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 10 से 15 मिनट तक ओले गिरे, जबकि चूरू और शेखावाटी क्षेत्र में धूलभरी आंधी चली. बारिश और ओलों के कारण दिन के तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली.
श्रीगंगानगर के पदमपुर में पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 11.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में यह बदलाव एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ और उसके प्रभाव से बने सर्कुलेशन सिस्टम के कारण हुआ है. पाकिस्तान और उससे सटे क्षेत्रों के ऊपर बना यह सिस्टम अरब सागर से नमी खींच रहा है, जिससे राजस्थान के ऊपर बादल बन रहे हैं और बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की स्थिति पैदा हो रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में एक के बाद एक “बैक टू बैक” पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हैं, इसलिए मौसम का यह बदला हुआ मिजाज अभी कुछ दिनों तक बना रहेगा.
मौसम विभाग ने 3 और 4 अप्रैल को राजस्थान के कई हिस्सों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है. बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर, नागौर, पाली, सिरोही, जालोर, राजसमंद और शेखावाटी क्षेत्र के कुछ जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. इन इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की भी प्रबल संभावना है.
नागौर, जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और फलोदी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि जयपुर, अजमेर, टोंक, उदयपुर, भरतपुर और आसपास के जिलों में येलो अलर्ट लागू है. मौसम विभाग का अनुमान है कि 5 और 6 अप्रैल को बारिश और आंधी की गतिविधियों में थोड़ी कमी आएगी, लेकिन 7 अप्रैल से एक और नया मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसके कारण 7 और 8 अप्रैल को फिर से कई जिलों में तेज बारिश और तूफानी हवाओं का दौर लौट सकता है. इसके चलते 10 अप्रैल तक प्रदेश में लू चलने की संभावना लगभग नहीं है. हालांकि 9 अप्रैल के बाद मौसम साफ होते ही तापमान तेजी से बढ़ सकता है और कई जिलों में पारा फिर से 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है.
मौसम विभाग ने किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है. खुले आसमान में रखी गेहूं, सरसों और अन्य फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखने या ढकने की सलाह दी गई है. कृषि मंडियों और धान मंडियों में खुले में रखे अनाज और जिंसों को भी बारिश और ओलों से बचाने के लिए सुरक्षित भंडारण में रखने को कहा गया है. तेज हवा और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले मैदानों से दूर रहने की सलाह दी गई है. अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर बनाए रखें.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से शुक्रवार और शनिवार के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किए जाने और हरियाणा के कई हिस्सों में आंधी, बिजली कड़कने, तेज हवाओं और बारिश का पूर्वानुमान जताए जाने के बाद, किसान अपनी खड़ी फसल की कटाई करने में हिचकिचा रहे हैं क्योंकि अचानक होने वाली बारिश से फसल को नुकसान पहुंच सकता है और उसमें नमी की मात्रा बढ़ सकती है.
भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) के वैज्ञानिकों ने किसानों को सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी है. IIWBR के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने किसानों से अपील की कि वे कटाई करने में जल्दबाजी न करें.
उन्होंने कहा, “किसानों को तब तक इंतजार करना चाहिए जब तक कि पश्चिमी विक्षोभ का असर कम न हो जाए और उसके बाद कुछ दिन धूप न निकल आए. अगर बारिश होती है, तो उन्हें खेतों में निगरानी रखनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कहीं भी पानी जमा न हो. इस दौरान कटाई करने से अनाज में नमी की मात्रा बढ़ सकती है.”
पंजाब का कृषि क्षेत्र इस समय चिंता में है, क्योंकि 3-4 अप्रैल को एक सक्रिय 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) राज्य को प्रभावित करने वाला है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बारिश, गरज-चमक के साथ तूफान, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है. जहां एक ओर सर्दियों की बारिश के लिए ऐसी मौसम प्रणालियां बेहद जरूरी होती हैं, वहीं फसल कटाई के समय इनका आना काफी बाधाएं पैदा कर रहा है. cyclonic circulation की मदद से आने वाला यह मौसमी दौर, मौसम को अस्थिर बना सकता है — जिससे पूरे राज्य में फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है.(रिदम जैन के इनपुट के साथ)
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