हिमाचल में इस बार कम बरसेगा मॉनसून, सामान्य से 10% कम बारिश का अनुमान

हिमाचल में इस बार कम बरसेगा मॉनसून, सामान्य से 10% कम बारिश का अनुमान

हिमाचल प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश और ओलावृष्टि से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. मौसम विभाग ने इस साल कमजोर मॉनसून का अनुमान जताते हुए कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है.

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हिमाचल में इस बार कम बरसेगा मॉनसून, सामान्य से 10% कम बारिश का अनुमानहिमाचल प्रदेश में इस बार कम होगी बारिश

हिमाचल प्रदेश में इन दिनों ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिल रहा है. सोमवार को सुबह मौसम साफ बना हुआ था लेकिन दोपहर बाद अचानक मौसम ने करवट ली और देखते ही देखते शिमला समेत राज्य के कई हिस्सों में जबरदस्त बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई है. इससे तापमान में भी 4 से 6 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई. वहीं इस साल मॉनसून का रुख कुछ धीमा रह सकता है, जिससे आम जनता को सामान्य से कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है. वहीं किसान बागवानों की चिंताएं बढ़ सकती हैं.

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक हर साल की अपेक्षा इस साल मॉनसून के बादलों की कम बरसने की संभावना जताई जा रही है. आगामी दिनों में राज्य के मध्य और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अगले पांच दिनों तक लगातार बादल छाए रहने की संभावना है. इस दौरान कुछ स्थानों पर रुक-रुक कर हल्के स्तर की बारिश हो सकती है. 18 और 19 जून को कुछ जिलों के लिए भारी बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट भी जारी किया है.

हिमाचल में कमजोर रहेगा मॉनसून

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार ने आगामी दिनों के लिए पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया कि इस साल राज्य में मॉनसून कमजोर रहने की संभावना है, जिससे कुल बारिश सामान्य से 10% या उससे भी कम दर्ज की जा सकती है. उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में मॉनसून के दौरान औसतन 730 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार इसके घटकर लगभग 670 मिलीमीटर या उससे कम रहने का अनुमान है.

निदेशक शोभित कटियार ने बताया कि मॉनसून को प्रभावित करने वाले वैश्विक पैरामीटर्स (Global Parameters) इस बार अनुकूल नहीं हैं, जिसके कारण बारिश में कमी आएगी. प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Nino) की स्थितियां विकसित हो चुकी हैं, जो आने वाले महीनों में और मजबूत होंगी. अल नीनो के कारण वर्ष में देश और प्रदेश दोनों जगह बारिश कम होती है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अल नीनो के साथ ही हिंद महासागर में दबाव की स्थिति यानी इंडियन ओशन डायपोल फिलहाल 'न्यूट्रल' (सामान्य) बना हुआ है. इसके पॉजिटिव होने पर अच्छी बारिश होती है, लेकिन इस बार इसके न्यूट्रल रहने से मॉनसून को कोई अतिरिक्त बल नहीं मिल रहा है. 

कम होंगी बादल फटने की घटनाएं

यूरेशियन क्षेत्र में बर्फ की चादर की स्थिति भी इस बार मॉनसून के अनुकूल नहीं पाई गई है. हिमाचल में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तिथि 20 से 25 जून के बीच होती है. इस साल मॉनसून अपनी सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है और अब तक देश के दक्षिणी प्रायद्वीप, पूर्वोत्तर राज्यों और पूर्वी भारत के हिस्सों को कवर कर चुका है. मॉनसून जैसे ही उत्तर-पश्चिम भारत में प्रवेश करेगा, उसके बाद हम हिमाचल में इसके पहुंचने की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.

कमजोर मॉनसून के चलते राहत की बात यह है कि 'क्लाउड बर्स्ट' और अत्यधिक भारी बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाएं तुलनात्मक रूप से काफी सीमित रहेंगी, जिससे बड़ी आपदाओं का खतरा कम होगा.

इसके साथ ही मौसम विभाग के निदेशक ने बताया कि जून की शुरुआत में हुई बारिश के कारण प्रदेश में तापमान सामान्य से 6 से 8 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया था. लेकिन 14 जून से बारिश थमने के बाद तापमान में अचानक 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे पारा अब सामान्य स्तर पर पहुंच गया है. आने वाले दो से तीन दिनों में प्रदेश के निचले मैदानी इलाकों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस और बढ़ सकता है. हालांकि, पहाड़ी इलाकों के तापमान में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि तापमान में बढ़ोतरी के बावजूद फिलहाल प्रदेश में 'हीट वेव' जैसी स्थिति बनने की संभावना बेहद कम है.

लगातार 5 दिनों तक छाए रहेंगे बादल

शोभित कटियार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आगामी दिनों में मौसम का मिला-जुला रुख देखने को मिलेगा. राज्य के मध्य और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अगले पांच दिनों तक लगातार बादल छाए रहने की संभावना है. इस दौरान कुछ स्थानों पर रुक-रुक कर हल्के स्तर की बारिश हो सकती है. मौसम विभाग ने 18 और 19 जून को विशेष रूप से कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है. इस अवधि में इन जिलों में गरज-चमक के साथ अंधड़ चलने और बिजली गिरने की आशंका है. इस दौरान हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है. 

हालांकि, अन्य दिनों में प्रदेश में मौसम को लेकर कोई बड़ा या गंभीर संकट नहीं देखा जाएगा. वहीं उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में इस बार सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. इसमें राज्य के निचले मैदानी इलाके, मध्यवर्ती क्षेत्र और किन्नौर जिला शामिल हैं. कुछ क्षेत्रों के लिए राहत की खबर है. विभाग के अनुसार, लाहौल-स्पीति, चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों, कुल्लू और कुल्लू से सटे मंडी जिले के कुछ हिस्सों में इस दौरान सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है.

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