साइक्लोन दित्वा के चलते तमिलनाडु में भारी बारिश (सांकेतिक तस्वीर)चक्रवात ‘दित्वाह’ के प्रभाव से तमिलनाडु के तटीय इलाकों और कावेरी डेल्टा जिलों में शनिवार को लगातार बारिश का दौर जारी रहा. तेज हवाओं और समुद्र में उठती ऊंची लहरों ने प्रशासन को सतर्क मोड में ला दिया है. मौसम विभाग के अनुसार चक्रवात खुले समुद्र में प्रवेश कर उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ते हुए तमिलनाडु तट के करीब पहुंच रहा है. रमनाथपुरम जिले में एक पर्यटक वैन मुसीबत में फंस गई जब अचानक पानी भरने से सड़क का हिस्सा तालाब जैसा हो गया. स्थानीय प्रशासन की मदद से सवार लोग पीछे के दरवाजे से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए.
जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आम लोग अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें, क्योंकि तेज हवाएं और भारी बारिश स्थिति और खतरनाक बना सकती हैं. पर्यटकों को दणुष्कोडी जाने से पूरी तरह रोक दिया गया है. यह वही क्षेत्र है जिसे 1964 के विनाशकारी चक्रवात ने तबाह कर दिया था. अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान मौसम परिस्थितियों को देखते हुए इस इलाके में किसी भी तरह की यात्रा जोखिम भरी हो सकती है.
थंजावुर, नागपट्टिनम, मयिलादुथुरै, कुम्बकोणम, पापनासम, तिरुवैयारू, पट्टुक्कोट्टई, कुड्डलूर और चेन्नई के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई. कुछ संवेदनशील जिलों में स्कूलों को एहतियातन बंद रखा गया, ताकि बच्चों की आवाजाही पर अनावश्यक खतरा न बने. रमनाथपुरम और नागपट्टिनम जिलों में तेज हवाएं, उफनाता समुद्र और लगातार वर्षा ने जनजीवन को प्रभावित किया है. तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार सतर्क रहने और समुद्र के किनारे न जाने की सलाह दी गई है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार चक्रवात दित्वा तड़के 5.30 बजे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तरी श्रीलंका के पास केंद्रित था. बीते छह घंटों में यह करीब 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ा. मौसम विभाग ने बताया कि यह सिस्टम कराईकल से लगभग 190 किलोमीटर, पुदुचेरी से 300 किलोमीटर और चेन्नई से करीब 400 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है.
निजी मौसम ब्लॉगर्स का कहना है कि चक्रवात की दिशा लगभग अनुमानित राह पर ही है और यह तट के समानांतर आगे बढ़ रहा है. उनके अनुसार शाम और रात के दौरान चेन्नई, कुड्डलूर और पुदुचेरी में बारिश का दायरा और बढ़ सकता है. ‘दित्वा’ नाम यमन की ओर से सुझाया गया है, जिसका अर्थ लैगून यानी खाड़ी या ज्वारीय झील होता है. माना जा रहा है कि यह यमन के सोकोत्रा द्वीप पर स्थित प्रसिद्ध ‘देत्वाह लैगून’ से प्रेरित है. (पीटीआई)
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